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गोरक्षपीठ से अलग प्रत्याशी भाजपा को पड़ा भारी
संतोष सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Thu, 15 Mar 2018 12:27 AM IST
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बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
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उपचुनाव में गोरक्षपीठ से जुड़ा प्रत्याशी न होने से सदर संसदीय सीट पर 29 साल से चली आ रही विजय यात्रा थम गई। जो जनसमर्थन गोरक्षपीठाधीश्वर या फिर उनके उत्तराधिकारी को मिलता आया था, वह उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को नहीं मिला। नतीजा, 2014 के लोकसभा चुनाव में 3.21 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वाली भाजपा मतगणना के पहले चरण से ही वोटों के लिए संघर्ष करती दिखी।
सदर संसदीय सीट 1989 से गोरक्षपीठ के पास है। पहले महंत अवेद्यनाथ फिर उनके उत्तराधिकारी महंत योगी आदित्यनाथ सांसद बने। योगी 1998 से लगातार चुनाव जीत रहे थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। इस कारण उन्हें सांसदी छोड़नी पड़ी। योगी आदित्यनाथ ही गोरक्षपीठाधीश्वर हैं। उनका कोई उत्तराधिकारी भी नहीं है। ऐसे में भाजपा को गोरक्षपीठ से बाहर का प्रत्याशी उतराना पड़ा, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया।
गोरखपुर सदर संसदीय क्षेत्र की जनता ने भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला को गोरक्षपीठाधीश्वर जैसा स्नेह नहीं दिया। शहर विधानसभा सीट छोड़ दें तो बाकी चार विधानसभा क्षेत्रों सहजनवां, गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच और कैंपियरगंज में उन्हें हार मिली। इससे पहले के आम चुनाव में पांचों विधानसभा क्षेत्रों में महंत योगी आदित्यनाथ को जीत मिली थी। शहर सीट से ही एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे। उपचुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी को सपा के मुकाबले महज 25 हजार वोट ज्यादा मिले। हालांकि वर्ष 2014 की तुलना में शहर विधानसभा क्षेत्र में करीब आठ फीसदी मतदान कम हुआ था।
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महंत अवेद्यनाथ ने गठबंधन को हराया था
गोरखपुर सदर संसदीय सीट पर गोरक्षपीठ का ही प्रभाव रहा है। भाजपा ने 1989 में जनता दल को समर्थन दिया था। इस चुनाव में जनता दल के प्रत्याशी रामपाल सिंह को हिंदू महासभा के प्रत्याशी गोरक्षपीठाधीश्वर रहे महंत अवेद्यनाथ ने हराया था। साफ है कि भाजपा समर्थित प्रत्याशी पर गोरक्षपीठाधीश्वर भारी पड़े थे। 1967 में महंत दिग्विजयनाथ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। 1970 में महंत अवेद्यनाथ ने भी निर्दलीय लड़कर सांसद बने थे।
लोकसभा चुनावों में गोरक्षपीठाधीश्वर को मिले वोट
वर्ष मिले वोट (फीसदी में)
2014 51.80
2009 53.85
2004 51.31
1999 41.10
1998 42.62
1996 42.62
1991 49.70
1989 48
सीएम के बूथ पर मिले सिर्फ 43 वोट
उपचुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कन्या प्राथमिक विद्यालय, गोरखनाथ के जिस बूथ पर वोट डाला था, उस पर भाजपा को करारी शिकस्त मिली है। यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है। बूथ पर करीब 1775 वोट पड़े थे। इसमें से भाजपा को महज 43 वोट मिल सके हैं। इस हिसाब से इस बूथ पर सपा को 1732 वोटों से जीत मिली है।
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सदर संसदीय सीट 1989 से गोरक्षपीठ के पास है। पहले महंत अवेद्यनाथ फिर उनके उत्तराधिकारी महंत योगी आदित्यनाथ सांसद बने। योगी 1998 से लगातार चुनाव जीत रहे थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। इस कारण उन्हें सांसदी छोड़नी पड़ी। योगी आदित्यनाथ ही गोरक्षपीठाधीश्वर हैं। उनका कोई उत्तराधिकारी भी नहीं है। ऐसे में भाजपा को गोरक्षपीठ से बाहर का प्रत्याशी उतराना पड़ा, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया।
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गोरखपुर सदर संसदीय क्षेत्र की जनता ने भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला को गोरक्षपीठाधीश्वर जैसा स्नेह नहीं दिया। शहर विधानसभा सीट छोड़ दें तो बाकी चार विधानसभा क्षेत्रों सहजनवां, गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच और कैंपियरगंज में उन्हें हार मिली। इससे पहले के आम चुनाव में पांचों विधानसभा क्षेत्रों में महंत योगी आदित्यनाथ को जीत मिली थी। शहर सीट से ही एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे। उपचुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी को सपा के मुकाबले महज 25 हजार वोट ज्यादा मिले। हालांकि वर्ष 2014 की तुलना में शहर विधानसभा क्षेत्र में करीब आठ फीसदी मतदान कम हुआ था।
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महंत अवेद्यनाथ ने गठबंधन को हराया था
गोरखपुर सदर संसदीय सीट पर गोरक्षपीठ का ही प्रभाव रहा है। भाजपा ने 1989 में जनता दल को समर्थन दिया था। इस चुनाव में जनता दल के प्रत्याशी रामपाल सिंह को हिंदू महासभा के प्रत्याशी गोरक्षपीठाधीश्वर रहे महंत अवेद्यनाथ ने हराया था। साफ है कि भाजपा समर्थित प्रत्याशी पर गोरक्षपीठाधीश्वर भारी पड़े थे। 1967 में महंत दिग्विजयनाथ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। 1970 में महंत अवेद्यनाथ ने भी निर्दलीय लड़कर सांसद बने थे।
लोकसभा चुनावों में गोरक्षपीठाधीश्वर को मिले वोट
वर्ष मिले वोट (फीसदी में)
2014 51.80
2009 53.85
2004 51.31
1999 41.10
1998 42.62
1996 42.62
1991 49.70
1989 48
सीएम के बूथ पर मिले सिर्फ 43 वोट
उपचुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कन्या प्राथमिक विद्यालय, गोरखनाथ के जिस बूथ पर वोट डाला था, उस पर भाजपा को करारी शिकस्त मिली है। यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है। बूथ पर करीब 1775 वोट पड़े थे। इसमें से भाजपा को महज 43 वोट मिल सके हैं। इस हिसाब से इस बूथ पर सपा को 1732 वोटों से जीत मिली है।