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37 कॉलेज की संबद्धता मामले में यूनिवर्सिटी का दो-टूक जवाब
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Fri, 22 Jul 2016 06:58 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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यूनिवर्सिटी से संबद्धता हासिल करने में जुटे 37 कॉलेजों का अंतिम दांव भी खाली जाता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद कॉलेजों की दरख्वास्त पर शासन से आए पत्र को गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने सिरे से खारिज कर दिया है। शासन की ओर से गिनाई गईं सात गलतियों का दो-टूक जवाब यूनिवर्सिटी ने 10 पेज में दिया है। जवाब को मजबूती देने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया गया है।
शासन के निरीक्षण मंडल को दोषी मानते हुए उस पर कार्रवाई न करने के सवाल पर यूनिवर्सिटी ने तर्कसंगत जवाब दिया है, जिसमें कहा गया है कि निरीक्षण मंडल के गठन के बाद कॉलेजों का दायित्व है कि वे मंडल से संपर्क कर निरीक्षण कराएं। यदि निरीक्षण मंडल की ओर से कोई गलती की भी गई तो, इस कॉलेज ने इसकी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। ऐसे में किसी तरह की कार्रवाई का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। इन सबके बीच निरीक्षण मंडल और कॉलेज दोनों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तय तिथि (15 अप्रैल) की जानकारी थी। फिर भी रिपोर्ट समय से यूनिवर्सिटी को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसमें यूनिवर्सिटी का कोई दोष नहीं।
इसके अलावा शासन ने रिपोर्ट में देरी की एक वजह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के निलंबन को बताया था।इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि निरीक्षण की रिपोर्ट 15 अप्रैल तक पहुंचनी थी, जबकि उच्च शिक्षा अधिकारी इस तिथि के बाद निलंबित हुए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट के जनरल और विशेष पीठ से खारिज होने की चर्चा के साथ सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी हवाला दिया है, जिसमें छात्रहित में संबंद्धता देने की अपील पर कोर्ट ने बिना संबद्धता प्रवेश लेने पर फटकार लगाई गई थी। जवाब के तह में जाएं तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस चिट्ठी के जवाब के साथ कॉलेजों की सभी उम्मीदों पर विराम लगा दिया है।
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शासन के निरीक्षण मंडल को दोषी मानते हुए उस पर कार्रवाई न करने के सवाल पर यूनिवर्सिटी ने तर्कसंगत जवाब दिया है, जिसमें कहा गया है कि निरीक्षण मंडल के गठन के बाद कॉलेजों का दायित्व है कि वे मंडल से संपर्क कर निरीक्षण कराएं। यदि निरीक्षण मंडल की ओर से कोई गलती की भी गई तो, इस कॉलेज ने इसकी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। ऐसे में किसी तरह की कार्रवाई का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। इन सबके बीच निरीक्षण मंडल और कॉलेज दोनों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तय तिथि (15 अप्रैल) की जानकारी थी। फिर भी रिपोर्ट समय से यूनिवर्सिटी को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसमें यूनिवर्सिटी का कोई दोष नहीं।
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इसके अलावा शासन ने रिपोर्ट में देरी की एक वजह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के निलंबन को बताया था।इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि निरीक्षण की रिपोर्ट 15 अप्रैल तक पहुंचनी थी, जबकि उच्च शिक्षा अधिकारी इस तिथि के बाद निलंबित हुए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट के जनरल और विशेष पीठ से खारिज होने की चर्चा के साथ सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी हवाला दिया है, जिसमें छात्रहित में संबंद्धता देने की अपील पर कोर्ट ने बिना संबद्धता प्रवेश लेने पर फटकार लगाई गई थी। जवाब के तह में जाएं तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस चिट्ठी के जवाब के साथ कॉलेजों की सभी उम्मीदों पर विराम लगा दिया है।
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