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गोरखपुर विश्वविद्यालय - नियुक्ति पर सवाल, बेटे-बेटी को बना दिया शिक्षक
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गोरखपुर विश्वविद्यालय - नियुक्ति पर सवाल, बेटे-बेटी को बना दिया शिक्षक
गोरखपुर। उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष और गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य प्रो. राम अचल सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती में धांधली के गंभीर आरोप लगाए। साथ ही मामले की लिखित शिकायत सोमवार को नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल से की है। काउंसिल के सदस्य का आरोप है कि शिक्षकों की नियुक्ति में नियम-मानक दरकिनार कर दिए गए। सबसे ज्यादा गड़बड़ी हिंदी, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान में हुई है। इन नियुक्तियों का विरोध किया गया था लेकिन इसे दरकिनार करके तैनाती दे दी गई। उन्होंने गड़बड़ी के लिए सीधे कुलपति प्रो. वीके सिंह को जिम्मेदार ठहराया है। जबकि कुलपति ने नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप को निराधार बताया है।
काउंसिल के सदस्य ने नगर विधायक को जो पत्र दिया है, उसके मुताबिक गोरखपुर विश्वविद्यालय में 150 प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति साक्षात्कार के आधार पर हुई है। आकाशवाणी में कार्यरत रहे अरविंद त्रिपाठी की उम्र 61 वर्ष से ज्यादा है। इसके बावजूद अरविंद को हिंदी विभाग के प्रेमचंद्र शोध पीठ में प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गया। यूजीसी की नियमावली के मुताबिक प्रोफेसर बनने के लिए एसोसिएट प्रोफेसर होना आवश्यक है। एसोसिएट प्रोफेसर का तीन साल का अनुभव भी जरूरी है। एकेडमिक परफारमेंस इंडेक्स (एपीआई) स्कोर 400 मार्क्स होना चाहिए। यह स्कोर रिसर्च पेपर के प्रकाशन, रिसर्च प्रोजेक्ट और कार्यशालाओं में हिस्सा लेने से मिलता है। अरविंद के पास ये अर्हताएं नहीं हैं। हिंदी और बायोटेक्नोलॉजी विभाग का लिफाफा खोलने से पहले अनियमितता की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई थी। एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में भी आपत्ति जताई गई थी, जिसे दरकिनार कर दिया गया। एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक के मिनट्स गलत बनाए गए हैं। इस संबंध में कुल सचिव को भी पत्र लिखा गया था। ज्यादातर नियुक्तियां जनवरी से जून 2019 के बीच हुई हैं।
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गोरखपुर। उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष और गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य प्रो. राम अचल सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती में धांधली के गंभीर आरोप लगाए। साथ ही मामले की लिखित शिकायत सोमवार को नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल से की है। काउंसिल के सदस्य का आरोप है कि शिक्षकों की नियुक्ति में नियम-मानक दरकिनार कर दिए गए। सबसे ज्यादा गड़बड़ी हिंदी, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान में हुई है। इन नियुक्तियों का विरोध किया गया था लेकिन इसे दरकिनार करके तैनाती दे दी गई। उन्होंने गड़बड़ी के लिए सीधे कुलपति प्रो. वीके सिंह को जिम्मेदार ठहराया है। जबकि कुलपति ने नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप को निराधार बताया है।
काउंसिल के सदस्य ने नगर विधायक को जो पत्र दिया है, उसके मुताबिक गोरखपुर विश्वविद्यालय में 150 प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति साक्षात्कार के आधार पर हुई है। आकाशवाणी में कार्यरत रहे अरविंद त्रिपाठी की उम्र 61 वर्ष से ज्यादा है। इसके बावजूद अरविंद को हिंदी विभाग के प्रेमचंद्र शोध पीठ में प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गया। यूजीसी की नियमावली के मुताबिक प्रोफेसर बनने के लिए एसोसिएट प्रोफेसर होना आवश्यक है। एसोसिएट प्रोफेसर का तीन साल का अनुभव भी जरूरी है। एकेडमिक परफारमेंस इंडेक्स (एपीआई) स्कोर 400 मार्क्स होना चाहिए। यह स्कोर रिसर्च पेपर के प्रकाशन, रिसर्च प्रोजेक्ट और कार्यशालाओं में हिस्सा लेने से मिलता है। अरविंद के पास ये अर्हताएं नहीं हैं। हिंदी और बायोटेक्नोलॉजी विभाग का लिफाफा खोलने से पहले अनियमितता की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई थी। एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में भी आपत्ति जताई गई थी, जिसे दरकिनार कर दिया गया। एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक के मिनट्स गलत बनाए गए हैं। इस संबंध में कुल सचिव को भी पत्र लिखा गया था। ज्यादातर नियुक्तियां जनवरी से जून 2019 के बीच हुई हैं।
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