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जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल में नृत्य में झलकी लद्दाख की पारंपरिक संस्कृति

Wed, 18 Dec 2019 11:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 18 Dec 2019 11:29 AM IST
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traditional ladakh culture gorakhpur
कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रस्तुत करने आये सिकंदर के वंशज
जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे यूनानी सम्राट सिकंदर के वंशजों ने मंगलवार को पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य कर समा बांध दिया। पारंपरिक गीत और नृत्यों पर झूमते आर्यन समुदाय के लोगों ने विद्यार्थियों को लेह लद्दाख की संस्कृति से रूबरू कराया।
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इस अवसर पर विद्यार्थियों ने तरह-तरह के प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। दाहहनु गांव से आए श्रृंग लमचु, ताशी पाल्दन, जलसन दोरजे, श्रृंग डब्लू, श्रृंग दोरजे, ताशी डोलकर, पदमा आग्मो, श्रृंग डोलकर ने बताया कि उनके गांव में आर्यों की मूल प्रजाति बसती है। आज भी आधुनिकता से दूर ये अपनी परंपरागत विशेषताओं के साथ रहते हैं। इनकी अपनी आर्य भाषा है और अपने रहन-सहन की शैली है। लेह से 200 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान सीमा पर सिंधु नदी के किनारे दाहहनु गांव स्थित है।
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जीएन नेशलन पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रस्तुत करते यूनानी सम्राट सिकंदर

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जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रस्तुत करते यूनानी सम्राट सिकंदर

 

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