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वाकाथन निकाल किया जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 09 Jun 2016 01:37 AM IST
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वाकाथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते एनईआर की जीएम
- फोटो : amar ujala
रेल फाटक को पार करते वक्त बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए बुधवार की सुबह सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम से वाकाथन आयोजित किया गया। पूर्वोत्तर रेलवे के संरक्षा संगठन और ‘अमर उजाला’ के संयुक्त तत्वावधान में निकले इस वाकाथन में रेलकर्मियों के साथ ही महिलाएं और बच्चों ने भी भाग लिया और लोगों को जागरूकता भरा संदेश दिया।
महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने वाकाथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे में करीब 40 प्रतिशत दुर्घटनाएं और 66 प्रतिशत मृत्यु अनारक्षित रेल फाटकों पर होती है। चिंता का विषय यह है कि बहुत सारे लोग बगैर देखे रेल फाटक पार करते हैं। जल्दबाजी में ट्रेन की गति को समझ नहीं पाते हैं और दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। दुर्घटना का बड़ा कारण इयर फोन का इस्तेमाल, गाड़ियों में काला शीशा होना और तेज म्यूजिक बजाकर रेल फाटक पार करना भी है। ऐसी दुर्घटना के लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं है। दुर्घटनाओं को कम करने के लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
जागरूकता के अलावा अनारक्षित रेल फाटकों की सड़क सतह में सुधार, अनारक्षित रेल फाटकों को बंद या मानवयुक्त करने तथा उपरिगामी पुल, अंडरपास बनाया जा रहा है। समय-समय पर इन्फोर्समेंट के साथ संरक्षा अभियान चलाकर लोगों को समस्या एवं उसके निराकरण के बारे में बताकर भी इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। प्रचार-प्रसार के अलावा नुक्कड़ नाटक, वाकाथन आदि से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने इस कोशिश में सहभागिता के लिए ‘अमर उजाला’ के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
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मुख्य संरक्षा अधिकारी एनके अंबिकेश ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे पर 610 रेल गाड़ियां चलती हैँ। अधिकतर दुर्घटनाएं ट्रैक्टर चालकों की लापरवाही से होती है। मानव रहित रेल फाटकों पर नियमानुसार पहले रेलगाड़ी जाएगी तब अन्य कोई वाहन जाएगा। नियमों का अनुपालन न करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। यह हमारा दायित्व है कि जनता को हम दुर्घटनाओं के प्रति जागरूक करें। कहा कि वर्ष 2016-2017 में 96 मानवरहित रेल फाटकों को बंद करना है।
उप मुख्य संरक्षा अधिकारी (इंजीनियरिंग) भीम सिंह ने मुख्य अतिथि एवं अन्य सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान अपर महाप्रबंधक एसएल वर्मा, मुख्य संरक्षा अधिकारी एनके अंबिकेश आदि उपस्थित थे।
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महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने वाकाथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे में करीब 40 प्रतिशत दुर्घटनाएं और 66 प्रतिशत मृत्यु अनारक्षित रेल फाटकों पर होती है। चिंता का विषय यह है कि बहुत सारे लोग बगैर देखे रेल फाटक पार करते हैं। जल्दबाजी में ट्रेन की गति को समझ नहीं पाते हैं और दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। दुर्घटना का बड़ा कारण इयर फोन का इस्तेमाल, गाड़ियों में काला शीशा होना और तेज म्यूजिक बजाकर रेल फाटक पार करना भी है। ऐसी दुर्घटना के लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं है। दुर्घटनाओं को कम करने के लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
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जागरूकता के अलावा अनारक्षित रेल फाटकों की सड़क सतह में सुधार, अनारक्षित रेल फाटकों को बंद या मानवयुक्त करने तथा उपरिगामी पुल, अंडरपास बनाया जा रहा है। समय-समय पर इन्फोर्समेंट के साथ संरक्षा अभियान चलाकर लोगों को समस्या एवं उसके निराकरण के बारे में बताकर भी इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। प्रचार-प्रसार के अलावा नुक्कड़ नाटक, वाकाथन आदि से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने इस कोशिश में सहभागिता के लिए ‘अमर उजाला’ के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
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मुख्य संरक्षा अधिकारी एनके अंबिकेश ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे पर 610 रेल गाड़ियां चलती हैँ। अधिकतर दुर्घटनाएं ट्रैक्टर चालकों की लापरवाही से होती है। मानव रहित रेल फाटकों पर नियमानुसार पहले रेलगाड़ी जाएगी तब अन्य कोई वाहन जाएगा। नियमों का अनुपालन न करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। यह हमारा दायित्व है कि जनता को हम दुर्घटनाओं के प्रति जागरूक करें। कहा कि वर्ष 2016-2017 में 96 मानवरहित रेल फाटकों को बंद करना है।
उप मुख्य संरक्षा अधिकारी (इंजीनियरिंग) भीम सिंह ने मुख्य अतिथि एवं अन्य सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान अपर महाप्रबंधक एसएल वर्मा, मुख्य संरक्षा अधिकारी एनके अंबिकेश आदि उपस्थित थे।