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सिस्टम फेल, मजबूरी में जाते हैं प्राइवेट अस्पताल

Wed, 17 Aug 2016 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Wed, 17 Aug 2016 01:59 AM IST
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Sysyetm are alleged to not support in treatment of Encephalytis
मेडिकल कॉलेज में बैठक करते इंडियन कौसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की डायरेक्टर सौम्या स्वामीनाथन व अन्य। - फोटो : Mahesh Kumar
इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों की वजह तलाश रही सरकारी मशीनरी के अफसरों के होश उड़ जा रहे हैं। मंगलवार को एनआरएचएम के मिशन डायरेक्टर आलोक कुमार व वरिष्ठ सलाहकार वीएस अरोरा व्यवस्था की हकीकत जानने मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इंसेफेलाइटिस वार्ड में निरीक्षण के दौरान तीमारदारों से 108 एंबुलेंस, नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बाबत पूछे गए सवालों के जवाब सुनकर खुद मिशन डायरेक्टर के भी होश उड़ गए। तीमारदारों ने एंबुलेंस न आने, स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज न मिलने आदि शिकायतें कीं।
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महराजगंज जनपद के सिसवां रतनपुर के बृजराज से जब अधिकारियों ने बीमारी होने और उसके इलाज के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि बेटी रोशनी को तीन दिन पहले बुखार आने पर जिला अस्पताल महराजगंज में भर्ती कराया था। वहां से रेफर होने पर 108 एंबुलेंस को कई बार कॉल किया, मगर चार घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई तो 750 रुपये में प्राइवेट एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज आया। गुलरिहा के महराजगंज गांव के रहने वाले सोहन ने बताया कि बुखार होने पर पहले जिला अस्पताल गए थे। वहां महज दस मिनट ही रखा गया और तत्काल मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यह दो केस सिर्फ उदाहरण हैं। जिससे भी डायरेक्टर ने सरकारी सुविधाओं के बारे में पूछा, जवाब तकरीबन यही मिला। मिशन डायरेक्टर ने सभी के नाम पते और शिकायत को गंभीरता से नोट किया है। डायरेक्टर ने कहा कि इस मसले पर सीएमओ से बात की जाएगी।
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इंसेफेलाइटिस के इलाज के लिए अभी शोध की जरूरत

पूर्वांचल के लिए अभिषाप बने इंसेफेलाइटिस को लेकर मंथन शुरू हो गया। मंगलवार को इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की निदेशक सौम्या स्वामीनाथन की अगुवाई में एक टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची और इलाज को लेकर बरती जा रही तकनीकों पर भी चर्चा की। दूसरे प्रदेशों से आए लोगों ने भी अपने-अपने क्षेत्र में बीमारी के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बुधवार को भी टीम मेडिकल कॉलेज में इस पर मंथन करेगी।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि जेई के वायरस तो पता चल गए है, मगर एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) में कई वायरस हैं, जिसकी अभी पूरी जानकारी नहीं हो सकी है। इस बीमारी के खात्मे के लिए अभी शोध की जरूरत है। जब तक वायरस की सही जानकारी नहीं हो पाएगी तब तक इससे नहीं निपटा जा सकेगा। यूपी इंसेफेलाइटिस के डायरेक्टर डॉ. सत्य मिश्र ने प्रदेश के किन इलाकों में यह बीमारी है और किस स्थिति में है, इसकी जानकारी दी। बुधवार को भी टीम के सदस्य इस पर मंथन करेंगे। इसमें डॉक्टरों को भी शामिल किया जाएगा।


बैठक में इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के पूर्व निदेशक डॉ. एनके गांगुली, डॉ. जैसफ जान, डॉ. पीएल जोशी, डॉ. एके धारीवाला, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एके सिन्हा, एनआरएचएम के मिशन निदेशक आलोक रंजन प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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