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हॉस्टल खाली कराने के विरोध में छात्रों का हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 07 Jun 2016 06:52 PM IST
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यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन पर हास्टल खाली कराए जाने के विरोध में धरना देते छात्र।
- फोटो : shivharsh
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हॉस्टल खाली कराने के गोरखपुर यूनिवर्सिटी के फैसले से गुस्साए छात्रों का आक्रोश मंगलवार को भड़क गया। सुबह मुख्य गेट पर एकत्र हुए छात्र न सिर्फ नारेबाजी करने लगे बल्कि प्रशासनिक भवन की बिजली काट दी और दक्षिणी गेट पर ताला जड़कर धरने पर बैठ गए।
यही नहीं, दोपहर एक बजे कुलपति से बातचीत के दौरान एक बार फिर छात्र तब नाराज हो गए जब कुलपति ने एक छात्र नेता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दे दिया। इसके बाद छात्रों ने हॉस्टल के पास मुख्य गेट पर करीब दो घंटे तक चक्काजाम कर दिया। बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने पर वे माने। उन्होंने चेताया है कि परीक्षा होने तक यदि छात्रों को हॉस्टल से निकाला गया तो वे कुलपति का घेराव करेंगे।
सात जून के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप से हॉस्टल खाली कराने के गोरखपुर यूनिवर्सिटी के फैसले के खिलाफ सुबह 10 बजे सभी हॉस्टलों के छात्र मुख्य गेट पर इकट्ठा हुए और यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। जब उनकी तादाद बढ़ी तो आक्रोश भी बढ़ा और वे जुलूस की शक्ल में प्रशासनिक भवन की ओर चल पड़े। वहां पहुंचकर इन छात्रों ने बिजली के तार तोड़ दिए। इसके बाद भवन के दक्षिणी गेट पर ताला जड़ दिया और वहीं धरने पर बैठ गए।
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छात्रों का उग्र रूप देख यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तत्काल पुलिस फोर्स बुला ली और फिर प्रॉक्टर डॉ. सतीश चंद्र पांडेय और विवेकानंद हॉस्टल के वार्डेन प्रो. जितेंद्र तिवारी धरनास्थल पर छात्रों को समझाने पहुंचे, लेकिन इससे बात नहीं बनी बल्कि उल्टा छात्रों और प्रॉक्टर में झड़प हो गई। छात्र हॉस्टल खाली कराने के फैसले को बदलने से कम पर मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि अभी बहुत से छात्रों की परीक्षाएं बाकी हैं, इसलिए हॉस्टल खाली करने का सवाल ही नहीं उठता।
प्रॉक्टर के जाने के बाद जब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई तो छात्रों का धैर्य जवाब दे गया और वे दोपहर एक बजे के करीब नारेबाजी करते हुए कुलपति कार्यालय तक पहुंच गए। उनका रुख देख कुलपति ने 15 छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया। वहां पहुंचे छात्रों में छात्रनेता अमर पासवान को देख कुलपति नाराज हो गए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की बात कह दी। उनका इतना कहना था कि किसी नतीजे की उम्मीद में बैठे छात्रों का गुस्सा उबल पड़ा और उन्होंने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल बिगड़ता देख कुलपति बिना आगे बात किए अपने कक्ष में लौट गए।
उधर, एफआईआर के नाम पर उबले छात्र कुलपति कक्ष से नारेबाजी करते हुए निकल कर हॉस्टल के मुख्य गेट पर पहुंचे और सड़क जाम कर दी। इसकी सूचना मिलते ही एसओ कैंट और सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त किया कि किसी छात्रनेता के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की जाएगी, तब जाकर अपराह्न तीन बजे छात्र ने जाम हटाया। छात्रों का नेतृत्व कर रहे छात्र रणविजय सिंह ने कहा कि यदि हॉस्टल खाली कराने का फैसला यूनिवर्सिटी वापस नहीं लेती है तो छात्र कुलपति आवास का घेराव करेंगे। यह घेराव तब तक चलेगा जब तक फैसला बदल नहीं जाता।
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यही नहीं, दोपहर एक बजे कुलपति से बातचीत के दौरान एक बार फिर छात्र तब नाराज हो गए जब कुलपति ने एक छात्र नेता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दे दिया। इसके बाद छात्रों ने हॉस्टल के पास मुख्य गेट पर करीब दो घंटे तक चक्काजाम कर दिया। बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने पर वे माने। उन्होंने चेताया है कि परीक्षा होने तक यदि छात्रों को हॉस्टल से निकाला गया तो वे कुलपति का घेराव करेंगे।
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सात जून के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप से हॉस्टल खाली कराने के गोरखपुर यूनिवर्सिटी के फैसले के खिलाफ सुबह 10 बजे सभी हॉस्टलों के छात्र मुख्य गेट पर इकट्ठा हुए और यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। जब उनकी तादाद बढ़ी तो आक्रोश भी बढ़ा और वे जुलूस की शक्ल में प्रशासनिक भवन की ओर चल पड़े। वहां पहुंचकर इन छात्रों ने बिजली के तार तोड़ दिए। इसके बाद भवन के दक्षिणी गेट पर ताला जड़ दिया और वहीं धरने पर बैठ गए।
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छात्रों का उग्र रूप देख यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तत्काल पुलिस फोर्स बुला ली और फिर प्रॉक्टर डॉ. सतीश चंद्र पांडेय और विवेकानंद हॉस्टल के वार्डेन प्रो. जितेंद्र तिवारी धरनास्थल पर छात्रों को समझाने पहुंचे, लेकिन इससे बात नहीं बनी बल्कि उल्टा छात्रों और प्रॉक्टर में झड़प हो गई। छात्र हॉस्टल खाली कराने के फैसले को बदलने से कम पर मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि अभी बहुत से छात्रों की परीक्षाएं बाकी हैं, इसलिए हॉस्टल खाली करने का सवाल ही नहीं उठता।
प्रॉक्टर के जाने के बाद जब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई तो छात्रों का धैर्य जवाब दे गया और वे दोपहर एक बजे के करीब नारेबाजी करते हुए कुलपति कार्यालय तक पहुंच गए। उनका रुख देख कुलपति ने 15 छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया। वहां पहुंचे छात्रों में छात्रनेता अमर पासवान को देख कुलपति नाराज हो गए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की बात कह दी। उनका इतना कहना था कि किसी नतीजे की उम्मीद में बैठे छात्रों का गुस्सा उबल पड़ा और उन्होंने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल बिगड़ता देख कुलपति बिना आगे बात किए अपने कक्ष में लौट गए।
उधर, एफआईआर के नाम पर उबले छात्र कुलपति कक्ष से नारेबाजी करते हुए निकल कर हॉस्टल के मुख्य गेट पर पहुंचे और सड़क जाम कर दी। इसकी सूचना मिलते ही एसओ कैंट और सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त किया कि किसी छात्रनेता के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की जाएगी, तब जाकर अपराह्न तीन बजे छात्र ने जाम हटाया। छात्रों का नेतृत्व कर रहे छात्र रणविजय सिंह ने कहा कि यदि हॉस्टल खाली कराने का फैसला यूनिवर्सिटी वापस नहीं लेती है तो छात्र कुलपति आवास का घेराव करेंगे। यह घेराव तब तक चलेगा जब तक फैसला बदल नहीं जाता।