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पानी और शौचालय के लिए भटक रहे विद्यार्थी
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Sat, 20 Aug 2016 08:30 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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यूनिवर्सिटी में पानी और शौचालय की समस्या यहां आने वाले विद्यार्थियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। पिछले सत्र से पनपी इस समस्या को लेकर की गई विद्यार्थियों की दर्जनों शिकायतों की तो यूनिवर्सिटी प्रशासन अनदेखी कर ही रहा है, शिक्षकों की शिकायतों का भी कोई असर जिम्मेदारों पर नहीं पड़ रहा।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने विशेष प्रयास से शैक्षणिक सत्र को तो पटरी पर ला दिया लेकिन कैंपस में सुविधाओं को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई। शौचालय और पानी की यह शिकायत जब ‘अमर उजाला’ दफ्तर तक पहुंची तो टीम ने यूनिवर्सिटी के विज्ञान संकाय और कला संकाय की पड़ताल की। पंत ब्लॉक से शुरू हुई पड़ताल में ही शिकायतों की पुष्टि होने लगी। यहां पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं था। जहां स्टैंड बने भी हैं तो टैब नदारद हैं। स्टैंड पर लगी काई उसके लंबे समय से इस्तेमाल न होने की गवाही दे रही है। महिला शौचालय का तो आलम यह है कि वह कूड़े का ठिकाना बन गया है। इसे लेकर छात्राओं में खासा रोष भी है।
कला संकाय की स्थिति भी कमोवेश यही है। मजाक तो यह है कि निचले तल पर बना शौचालय छात्र और छात्राओं के लिए साझा है, उनसे दरवाजे भी नदारद हैं। संकाय के तीनों तलों पर बने छह शौचालय भी अव्यवस्था का शिकार हैं। किसी में टैब के अभाव में पानी लगातार गिरता रहता है तो कहीं टैब है तो सूखा हुआ। पीने के पानी का तो कोई इंतजाम ही नहीं है। पिछले दिनों दो आरओ मशीन और वाटर कूलर लगाए गए लेकिन वह शो-पीस बने हैं। विद्यार्थियों से जब बात की गई तो उन्होंने बड़े ही दुखी मन से कहा कि इस दुर्व्यवस्था को अब वे नियति मान चुके हैं।
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उधर अभियंता श्रवण कुमार इस समस्या को दोयम दर्जे का मान रहे हैं। उनका कहना है कि निर्माण के मद में धनराशि आवंटित हुई है। इसके पहले चरण में लैब का निर्माण कराया जा रहा है, उसके बाद ही शौचालय की मरम्मत पर ध्यान दिया जाएगा।
किसी फेकेल्टी या विभाग में यदि कोई बुनियादी समस्या है तो उसके प्रमुख को अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देना चाहिए। इसके अलावा यह लिखित शिकायत कुलपति कार्यालय तक पहुंचनी चाहिए। समस्या बड़ी है, इसे लेकर जिम्मेदारों से पूछताछ होगी और जल्द ही इसे दूर किया जाएगा।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने विशेष प्रयास से शैक्षणिक सत्र को तो पटरी पर ला दिया लेकिन कैंपस में सुविधाओं को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई। शौचालय और पानी की यह शिकायत जब ‘अमर उजाला’ दफ्तर तक पहुंची तो टीम ने यूनिवर्सिटी के विज्ञान संकाय और कला संकाय की पड़ताल की। पंत ब्लॉक से शुरू हुई पड़ताल में ही शिकायतों की पुष्टि होने लगी। यहां पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं था। जहां स्टैंड बने भी हैं तो टैब नदारद हैं। स्टैंड पर लगी काई उसके लंबे समय से इस्तेमाल न होने की गवाही दे रही है। महिला शौचालय का तो आलम यह है कि वह कूड़े का ठिकाना बन गया है। इसे लेकर छात्राओं में खासा रोष भी है।
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कला संकाय की स्थिति भी कमोवेश यही है। मजाक तो यह है कि निचले तल पर बना शौचालय छात्र और छात्राओं के लिए साझा है, उनसे दरवाजे भी नदारद हैं। संकाय के तीनों तलों पर बने छह शौचालय भी अव्यवस्था का शिकार हैं। किसी में टैब के अभाव में पानी लगातार गिरता रहता है तो कहीं टैब है तो सूखा हुआ। पीने के पानी का तो कोई इंतजाम ही नहीं है। पिछले दिनों दो आरओ मशीन और वाटर कूलर लगाए गए लेकिन वह शो-पीस बने हैं। विद्यार्थियों से जब बात की गई तो उन्होंने बड़े ही दुखी मन से कहा कि इस दुर्व्यवस्था को अब वे नियति मान चुके हैं।
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उधर अभियंता श्रवण कुमार इस समस्या को दोयम दर्जे का मान रहे हैं। उनका कहना है कि निर्माण के मद में धनराशि आवंटित हुई है। इसके पहले चरण में लैब का निर्माण कराया जा रहा है, उसके बाद ही शौचालय की मरम्मत पर ध्यान दिया जाएगा।
किसी फेकेल्टी या विभाग में यदि कोई बुनियादी समस्या है तो उसके प्रमुख को अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देना चाहिए। इसके अलावा यह लिखित शिकायत कुलपति कार्यालय तक पहुंचनी चाहिए। समस्या बड़ी है, इसे लेकर जिम्मेदारों से पूछताछ होगी और जल्द ही इसे दूर किया जाएगा।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति