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मां की अर्थी उठाने नहीं आए बेटे, बेटी ने दी मुखाग्नि

Wed, 25 Dec 2019 01:45 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Dec 2019 01:45 AM IST
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son insensitive in pipiganj, mother death
सरस्वती देवी (फाइल फोटो) - फोटो : GORAKHPUR DEHAT
मां की अर्थी उठाने भी नहीं आए बेटे, बेटी ने दी मुखाग्नि
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पीपीगंज। बेटों की परवरिश की परवाह के आगे जिस मां ने अपनी तकलीफों को भुला दिया, जब उसी ने अंतिम सांस ली तो बेटे अर्थी उठाने और मुखाग्नि देने नहीं पहुंचे। बेटों के ठुकराने के बाद मां अपनी बेटी की ससुराल में रह रही थी। मां की मौत की सूचना देने के बाद भी जब भाई नहीं आए तो बेटी ने ही सोमवार को राप्ती नदी के सिसई घाट पर बेटे का फर्ज अदा करते हुए मुखाग्नि दी।
मामला पीपीगंज क्षेत्र के तिघरा गांव का है। यहां के रामवृक्ष के तीन पुत्र और दो पुत्रियां हैं। गांव के लोगों के अनुसार पांच वर्ष पूर्व तीनों बेटों ने बूढ़े मां-बाप की देखभाल करना छोड़ दिया। रामवृक्ष की पत्नी सरस्वती देवी अक्सर बीमार रहने लगीं। धीरे-धीरे उनकी आंख की रोशनी भी चली गई। इसके बाद बेटे रामदवन, देवीलाल और राजकुमार ने मां का इलाज कराने से इंकार कर दिया। बाद में रामवृक्ष और सरस्वती देवी की देखभाल का जिम्मा उनकी शादीशुदा दो बेटियों शांति और कुसुम ने उठाया। पांच साल से वे ही माता-पिता की देखभाल कर रही थीं। बड़ी बेटी शांति आर्थिक मदद करती थीं। दूसरी बेटी कुसुम मां-बाप को भुईधरपुर गांव में अपने घर लाकर देखभाल कर रही थीं।
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कुसुम के पति रूदल का पूर्व में ही देहांत हो चुका है। दो साल पहले रामवृक्ष की भी मौत हो गई थी। इधर, रविवार की रात सरस्वती देवी ने भी दम तोड़ दिया। उसके बाद कुसुम ने भाइयों को सूचना दी, पर भाई नहीं आए। फिर कुसुम ससुराल के लोगों की मदद से अर्थी के साथ सिसई घाट पर पहुंची और रीति-रिवाज के साथ मां का दाह संस्कार किया। तीन बेटों के होते हुए मां को जब बेटी ने मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हर कोई बेटों को कोसता दिखा।
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मां-बाप नाराज तो बनाई दूरी
इस संबंध में पीपीगंज के पास तिघरा में रहने वाली सरस्वती के तीसरे बेटे राजकुमार ने कहा कि मां-बाप हमेशा नाराज रहते थे, इसलिए हमने भी उनसे दूरी बना ली। वहीं, देवीलाल मुंबई में रहता है जबकि रामदवन दिल्ली में रहकर काम करता है। दोनों बेटों से बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
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