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Gorakhpur News: मातृभाषा छोड़ रहे, जड़ों से दूर हो रहे
Sun, 20 Sep 2026 02:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 20 Sep 2026 02:41 AM IST
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गोरखपुर। लखनऊ के प्रसिद्ध साहित्यकार नरेश सक्सेना ने कहा कि हम सभी भाषाएं बोल लेते हैं लेकिन अपनी ही मातृभाषा छोड़ते जा रहे हैं। यह देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शुरू से मातृभाषा के बारे में बताया जाना चाहिए। बच्चे अंग्रेजी भी पढ़ें लेकिन पहली प्राथमिकता मातृभाषा को दें। हिंदी को लेकर आए दिन होने वाले विवाद नहीं होने चाहिए।
परमानंद श्रीवास्तव : अवदान और महत्व पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में शामिल होने आए नरेश सक्सेना ने बातचीत में कहा कि आज बच्चे किताबों से दूर होकर सोशल मीडिया पर अधिक समय दे रहे हैं। इससे उनकी सोचने-समझने और कल्पना करने की शक्ति खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका अपनी मातृभाषा को प्राथमिकता देते हैं जबकि हम अपनी भाषा से दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि साहित्य के लिए इकट्ठा होने में हमारी जड़ता है। अपनी अनुभूति साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले मैं वहां देखता था जहां फूल होते थे, अब मैं जहां देखता हूं वहां फूल हैं।”
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परमानंद श्रीवास्तव : अवदान और महत्व पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में शामिल होने आए नरेश सक्सेना ने बातचीत में कहा कि आज बच्चे किताबों से दूर होकर सोशल मीडिया पर अधिक समय दे रहे हैं। इससे उनकी सोचने-समझने और कल्पना करने की शक्ति खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका अपनी मातृभाषा को प्राथमिकता देते हैं जबकि हम अपनी भाषा से दूर होते जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि साहित्य के लिए इकट्ठा होने में हमारी जड़ता है। अपनी अनुभूति साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले मैं वहां देखता था जहां फूल होते थे, अब मैं जहां देखता हूं वहां फूल हैं।”
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