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भाईयों की कलाई पर बंधी बहनों के स्नेह की डोर
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Thu, 18 Aug 2016 08:49 PM IST
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भाई काो राखी बांधती बहन।
- फोटो : amar ujala
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भाई-बहन के स्नेह भरे रिश्ते का प्रतीक पर्व रक्षा बंधन गुरुवार को हर्षोल्लास के वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाईयों की कलाई पर स्नेह की डोर बांधी और उनसे रक्षा का संकल्प लिया। भाईयों ने भी बहनों को नेग और उपहार देने की संस्कार भरी रवायत पूरी की। बहुत सी बहनों ने व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से त्यौहार मनाया। इस मौके पर शहर में कई आयोजन भी हुए।
त्यौहार को लेकर सुबह से ही उत्साह का माहौल था। बड़े सबेरे ही दुकानदार दुकानों पर राखी सजा कर ग्राहकों का इंतजार करने लगे। मिठाइयों की दुकानों को भी खास ढंग से सजाकर दुकानदार ग्राहकों को लुभाने की कोशिश में लग गए। आठ बजते-बजते दुकानों पर भीड़ लगने लगी। चूंकि राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 3:01 मिनट तक था, सो राखी मिठाई खरीदने का सिलसिला करीब ढाई बजे तक चलता रहा। उधर चूंकि मुहूर्त की शुरुआत सुबह 5:35 मिनट से ही हो गई थी, इसलिए राखी बांधने और बंधवाने का दौर भी बड़े सबेरे से ही शुरू हो गया।
बहनें थाली में राखी, मिठाई और रोली लेकर भाईयों के सामने बैठीं। पहले उन्होंने राखी बांधी, फिर तिलक लगाकर मुंह मीठा कराया। भाईयों ने उपहार और नेग देकर अपना संस्कार पूरा किया। बहुत से भाई बहनों के घर और बहनें भाईयों के घर पहुंचीं और राखी की परंपरा निभाई। इसे लेकर छुट्टी का दिन होने के बावजूद शहर में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही।
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त्यौहार को लेकर सुबह से ही उत्साह का माहौल था। बड़े सबेरे ही दुकानदार दुकानों पर राखी सजा कर ग्राहकों का इंतजार करने लगे। मिठाइयों की दुकानों को भी खास ढंग से सजाकर दुकानदार ग्राहकों को लुभाने की कोशिश में लग गए। आठ बजते-बजते दुकानों पर भीड़ लगने लगी। चूंकि राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 3:01 मिनट तक था, सो राखी मिठाई खरीदने का सिलसिला करीब ढाई बजे तक चलता रहा। उधर चूंकि मुहूर्त की शुरुआत सुबह 5:35 मिनट से ही हो गई थी, इसलिए राखी बांधने और बंधवाने का दौर भी बड़े सबेरे से ही शुरू हो गया।
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बहनें थाली में राखी, मिठाई और रोली लेकर भाईयों के सामने बैठीं। पहले उन्होंने राखी बांधी, फिर तिलक लगाकर मुंह मीठा कराया। भाईयों ने उपहार और नेग देकर अपना संस्कार पूरा किया। बहुत से भाई बहनों के घर और बहनें भाईयों के घर पहुंचीं और राखी की परंपरा निभाई। इसे लेकर छुट्टी का दिन होने के बावजूद शहर में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही।
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