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गणित की मौलिकता पर हुआ विमर्श
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Sun, 24 Jul 2016 08:40 PM IST
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यूनिवर्सिटी के गणित विभाग मे आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी को संबोधित करते प्रो. श्यामलाल।
- फोटो : Rajesh Kumar
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‘रीसेंट ट्रेंड्स इन मैथेमेटिकल साइंसेज’ विषय पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी के गणित विभाग में शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। अंतिम सत्र में विद्वानों ने गणित की मौलिकता पर गंभीर विमर्श किया। दो दिन की संगोष्ठी के चार सत्र में 10 आमंत्रित व्याख्यान हुए, जबकि 49 शोधपत्र पढ़े गए।
अंतिम सत्र के मुख्य अतिथि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के प्रो. श्याम लाल ने कहा कि गणित एक मौलिक विषय है, साथ ही विकसित भी। आज विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जो भी नए शोध हो रहे हैं, उनका आधार गणित है। उन्होंने कहा कि मौलिक विषय होने से गणित में इसमें परिष्कृत शोध की आवश्यकता है। इस क्रम में प्रो. एसएस खरे, प्रो. पंकज श्रीवास्तव, प्रो. मनोरंजन सिंह, डॉ. मोहम्मद साजिद, डॉ. गोरखनाथ, डॉ. अरविंद आदि ने गणित की नई विधाओं की जानकारी दी।
संगोष्ठी में वेब डिजाइनिंग और उपग्रह डिजाइनिंग में गणित के उपयोग और इन क्षेत्रों में गणितीय मॉडलिंग की व्याख्या प्रस्तुत की गई। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. एचएस शुक्ल ने की। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. जेपी विश्वकर्मा ने और आभार ज्ञापन प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने किया। संचालन प्रो. उमा श्रीवास्तव ने किया।
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अंतिम सत्र के मुख्य अतिथि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के प्रो. श्याम लाल ने कहा कि गणित एक मौलिक विषय है, साथ ही विकसित भी। आज विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जो भी नए शोध हो रहे हैं, उनका आधार गणित है। उन्होंने कहा कि मौलिक विषय होने से गणित में इसमें परिष्कृत शोध की आवश्यकता है। इस क्रम में प्रो. एसएस खरे, प्रो. पंकज श्रीवास्तव, प्रो. मनोरंजन सिंह, डॉ. मोहम्मद साजिद, डॉ. गोरखनाथ, डॉ. अरविंद आदि ने गणित की नई विधाओं की जानकारी दी।
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संगोष्ठी में वेब डिजाइनिंग और उपग्रह डिजाइनिंग में गणित के उपयोग और इन क्षेत्रों में गणितीय मॉडलिंग की व्याख्या प्रस्तुत की गई। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. एचएस शुक्ल ने की। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. जेपी विश्वकर्मा ने और आभार ज्ञापन प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने किया। संचालन प्रो. उमा श्रीवास्तव ने किया।
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