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‘भौगोलिक असमानता के अनुसार बनें योजनाएं’
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 19 Feb 2017 12:33 AM IST
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सेमिनार में मौजूद लोग।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग की ओर से ‘जियोस्पेसियल तकनीक एवं प्रादेशिक विकास’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस मौके पर भौगोलिक असमानता के अनुसार योजनाओं को तैयार करने की आवश्यकता जताई गई।
शनिवार को सेमिनार के पहले दिन डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर (मप्र) के प्रो. एसके शर्मा ने कहा कि प्रादेशिक विकास का मुख्य लक्ष्य मानव विकास है, लेकिन इसमें भी कई असमानताएं हैं। क्षेत्रीय स्तर पर इसमें और ज्यादा असमानताएं हैं। पंजाब, हरियाणा, केरल जैसे राज्य निरंतर विकास पर अग्रसर हैं। वहीं उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा आदि राज्यों की स्थिति सोचनीय है। झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में संसाधन प्रचुरता में होने के बावजूद वहां विकास का स्तर कम है। इसकी मुख्य वजह अधिकांश संसाधनों पर एकाधिकार अधिकार है। 58 प्रतिशत संसाधन देश के एक प्रतिशत व्यक्ति के पास संचित है।
अध्यक्षता करते हुए पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. जगदीश सिंह ने नव्यकरणीय ऊर्जा के सृजन, प्रयोग तथा तकनीकी विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उद्घाटन सत्र के आरंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. नूतन त्यागी ने अतिथियों का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एसके दीक्षित ने एवं संचालन एसके सिंह ने किया। कार्यक्रम में चेन्नई यूनिवर्सिटी के प्रो. पीएस तिवारी, दरभंगा यूनिवर्सिटी के प्रो. नदेश्वर शर्मा, बीएचयू के प्रो. बीएन शर्मा भी मौजूद थे। उद्घाटन के बाद प्रो. उजागीर सिंह स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें भारत में जल संसाधन के संतुलित विकास पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
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शनिवार को सेमिनार के पहले दिन डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर (मप्र) के प्रो. एसके शर्मा ने कहा कि प्रादेशिक विकास का मुख्य लक्ष्य मानव विकास है, लेकिन इसमें भी कई असमानताएं हैं। क्षेत्रीय स्तर पर इसमें और ज्यादा असमानताएं हैं। पंजाब, हरियाणा, केरल जैसे राज्य निरंतर विकास पर अग्रसर हैं। वहीं उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा आदि राज्यों की स्थिति सोचनीय है। झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में संसाधन प्रचुरता में होने के बावजूद वहां विकास का स्तर कम है। इसकी मुख्य वजह अधिकांश संसाधनों पर एकाधिकार अधिकार है। 58 प्रतिशत संसाधन देश के एक प्रतिशत व्यक्ति के पास संचित है।
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अध्यक्षता करते हुए पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. जगदीश सिंह ने नव्यकरणीय ऊर्जा के सृजन, प्रयोग तथा तकनीकी विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उद्घाटन सत्र के आरंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. नूतन त्यागी ने अतिथियों का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एसके दीक्षित ने एवं संचालन एसके सिंह ने किया। कार्यक्रम में चेन्नई यूनिवर्सिटी के प्रो. पीएस तिवारी, दरभंगा यूनिवर्सिटी के प्रो. नदेश्वर शर्मा, बीएचयू के प्रो. बीएन शर्मा भी मौजूद थे। उद्घाटन के बाद प्रो. उजागीर सिंह स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें भारत में जल संसाधन के संतुलित विकास पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
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