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‘कागजों’ में रोपे पौधे, सगे-संबंधियों के नाम पर हड़पी रकम
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‘कागजों’ में रोपे पौधे, सगे-संबंधियों के नाम पर हड़पी रकम
केस-1
पेशे से एमआर कटघर चौक खजनी के मानस उपाध्याय का बैंक अकाउंट (नंबर 475600010002396) सिविल लाइंस स्थित पीएनबी में है। 25 सितंबर 2019 को नेफ्ट के जरिए कोषागार से 24805 रुपये मानस के बैंक अकाउंट में आए। मानस के मुताबिक अकाउंट में पैसा आने की जानकारी जैसे ही वन विभाग के अफसरों को मिली, वैसे ही उन्होंने एक बिचौलिए सूर्य प्रताप सिंह को भेज दिया। सूर्य प्रताप ने कहा, गलती से पैसा आपके अकाउंट में आ गया। इसे मेरे बैंक अकाउंट में भेज दें। 25 सितंबर को ही पहले 10 हजार, फिर 10 हजार और तीसरी बार में चार हजार रुपये दूसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए गए। 805 रुपये छोड़ दिए गए ताकि किसी तरह की शिकायत न की जाए।
केस-2
खजनी की साधना का बैंक अकाउंट सहजनवां की आंध्रा बैंक में है। साधना के बैंक अकाउंट नंबर 182010100089642 में 25 सितंबर को ही गोरखपुर कोषागार से 24805 रुपये भेजे गए। जैसे ही अकाउंट में पैसा पहुंचा, वन विभाग के बिचौलिए साधना के पास पहुंच गए। गलती से पैसा बैंक अकाउंट में आने का तर्क दिया और दूसरा बैंक अकाउंट नंबर देकर भुगतान का दबाव बनाया। साधना को लगा कि कुछ गड़बड़ है, इसलिए कोषागार से आए पैसे को दूसरे के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किया। साधना के मुताबिक वन विभाग के अफसर-कर्मियों ने कई बार धमकी दी। कहा कि जितनी बार पैसा आएगा, उतनी बार निकालकर देना पड़ेगा। अब मेरी और परिवार की जान खतरे में है। वन विभाग के अफसर कुछ भी करा सकते हैं।
गोरखपुर। वन विभाग के सहजनवां रेंज मेें ‘कागजों’ पर पौधे लगाए गए और उसकी रकम हड़प ली गई। विभाग के कुछ अफसर-कर्मियों ने पहले अपने सगे-संबंधियों को श्रमिक व चौकीदार बताकर मेहनताने की रकम उनके बैंक अकाउंट में मंगवाई, फिर बिचौलियों के बैंक अकाउंट में रकम डलवाकर कैश करा लिया। भ्रष्टाचार का यह मामला अभी सहजनवां रेंज का है। अगर सही ढंग से जांच हुई तो और भी मामले सामने आएंगे। ‘अमर उजाला’ संवाददाता ने जब इस मामले में डीएफओ अश्वनी कुमार से पक्ष लेना चाहा तो उन्होंने कहा मामला गंभीर है। चार सदस्यीय कमेटी गठित करके मामले की जांच करा लेता हूं। डीएफओ ने सोमवार को ही कमेटी गठित की और कहा कि जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में आ जाएगी।
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वन विभाग ने सहजनवां रेंज में 99 हजार पौधे लगाने का दावा किया है। अमर उजाला की टीम ने विभागीय दावे की पड़ताल की तो पता चला कि कागजों में ही पौधे लगा दिए गए। विभाग ने जिस जूट मिल से राप्तीनगर पुल रेलवे लाइन के किनारे पौधरोपण का दावा किया था, वहां के ज्यादातर पौधे गायब मिले। पौधरोपण के लिए बड़ी संख्या में गड्ढे खुदवाने के साक्ष्य नहीं मिले। ठीक यही हाल एनएच-28, केएम 242 से 244 पुरानी मगहर सड़क, चरणाव से लखनापार सड़क, नगवा से पराग डेरी, पटना पुल से घघसरा मार्ग, तिलोरा से भीतिनी सड़क, मस्का से चरणाव की सड़क और एचएच-28 एकला से छपिया मार्ग पर पौधरोपण का है। ज्यादातर जगहों पर पौधरोपण के साक्ष्य नहीं मिले हैं। गड्ढे तक नहीं खोदे जा सके, फिर भी सुनियोजित तरीके से पूरी रकम निकलवा ली गई। कटघर खजनी के मानस उपाध्याय प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने वन विभाग की किसी योजना में कभी काम नहीं किया, फिर भी कोषागार से पहले चार हजार, फिर 24805 रुपये उनके बैंक अकाउंट में भिजवाकर जबरन निकलवा लिए गए। मानस का कहना है कि उन्हें वन विभाग का फर्जी मेठ बताया गया और रकम हड़पने का ‘खेल’ हुआ।
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केस-1
पेशे से एमआर कटघर चौक खजनी के मानस उपाध्याय का बैंक अकाउंट (नंबर 475600010002396) सिविल लाइंस स्थित पीएनबी में है। 25 सितंबर 2019 को नेफ्ट के जरिए कोषागार से 24805 रुपये मानस के बैंक अकाउंट में आए। मानस के मुताबिक अकाउंट में पैसा आने की जानकारी जैसे ही वन विभाग के अफसरों को मिली, वैसे ही उन्होंने एक बिचौलिए सूर्य प्रताप सिंह को भेज दिया। सूर्य प्रताप ने कहा, गलती से पैसा आपके अकाउंट में आ गया। इसे मेरे बैंक अकाउंट में भेज दें। 25 सितंबर को ही पहले 10 हजार, फिर 10 हजार और तीसरी बार में चार हजार रुपये दूसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए गए। 805 रुपये छोड़ दिए गए ताकि किसी तरह की शिकायत न की जाए।
केस-2
खजनी की साधना का बैंक अकाउंट सहजनवां की आंध्रा बैंक में है। साधना के बैंक अकाउंट नंबर 182010100089642 में 25 सितंबर को ही गोरखपुर कोषागार से 24805 रुपये भेजे गए। जैसे ही अकाउंट में पैसा पहुंचा, वन विभाग के बिचौलिए साधना के पास पहुंच गए। गलती से पैसा बैंक अकाउंट में आने का तर्क दिया और दूसरा बैंक अकाउंट नंबर देकर भुगतान का दबाव बनाया। साधना को लगा कि कुछ गड़बड़ है, इसलिए कोषागार से आए पैसे को दूसरे के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किया। साधना के मुताबिक वन विभाग के अफसर-कर्मियों ने कई बार धमकी दी। कहा कि जितनी बार पैसा आएगा, उतनी बार निकालकर देना पड़ेगा। अब मेरी और परिवार की जान खतरे में है। वन विभाग के अफसर कुछ भी करा सकते हैं।
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गोरखपुर। वन विभाग के सहजनवां रेंज मेें ‘कागजों’ पर पौधे लगाए गए और उसकी रकम हड़प ली गई। विभाग के कुछ अफसर-कर्मियों ने पहले अपने सगे-संबंधियों को श्रमिक व चौकीदार बताकर मेहनताने की रकम उनके बैंक अकाउंट में मंगवाई, फिर बिचौलियों के बैंक अकाउंट में रकम डलवाकर कैश करा लिया। भ्रष्टाचार का यह मामला अभी सहजनवां रेंज का है। अगर सही ढंग से जांच हुई तो और भी मामले सामने आएंगे। ‘अमर उजाला’ संवाददाता ने जब इस मामले में डीएफओ अश्वनी कुमार से पक्ष लेना चाहा तो उन्होंने कहा मामला गंभीर है। चार सदस्यीय कमेटी गठित करके मामले की जांच करा लेता हूं। डीएफओ ने सोमवार को ही कमेटी गठित की और कहा कि जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में आ जाएगी।
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वन विभाग ने सहजनवां रेंज में 99 हजार पौधे लगाने का दावा किया है। अमर उजाला की टीम ने विभागीय दावे की पड़ताल की तो पता चला कि कागजों में ही पौधे लगा दिए गए। विभाग ने जिस जूट मिल से राप्तीनगर पुल रेलवे लाइन के किनारे पौधरोपण का दावा किया था, वहां के ज्यादातर पौधे गायब मिले। पौधरोपण के लिए बड़ी संख्या में गड्ढे खुदवाने के साक्ष्य नहीं मिले। ठीक यही हाल एनएच-28, केएम 242 से 244 पुरानी मगहर सड़क, चरणाव से लखनापार सड़क, नगवा से पराग डेरी, पटना पुल से घघसरा मार्ग, तिलोरा से भीतिनी सड़क, मस्का से चरणाव की सड़क और एचएच-28 एकला से छपिया मार्ग पर पौधरोपण का है। ज्यादातर जगहों पर पौधरोपण के साक्ष्य नहीं मिले हैं। गड्ढे तक नहीं खोदे जा सके, फिर भी सुनियोजित तरीके से पूरी रकम निकलवा ली गई। कटघर खजनी के मानस उपाध्याय प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने वन विभाग की किसी योजना में कभी काम नहीं किया, फिर भी कोषागार से पहले चार हजार, फिर 24805 रुपये उनके बैंक अकाउंट में भिजवाकर जबरन निकलवा लिए गए। मानस का कहना है कि उन्हें वन विभाग का फर्जी मेठ बताया गया और रकम हड़पने का ‘खेल’ हुआ।