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संत सभा की बैठक में दिखी ‘अपनों’ को जोड़ने की बेचैनी

Thu, 04 Feb 2016 01:30 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 04 Feb 2016 01:30 AM IST
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sant sammelan ends in gorakhnath mandir
तीन दिवसीय भारतीय संत सभा-चिंतन बैठक में भले ही श्री रामजन्म मंदिर का मुद्दा छाया रहा हो, लेकिन इसमें समरस समाज के निर्माण के लिए हिंदू समाज से दूर जा चुके ‘अपनों’ को साथ लाने की बेचैनी भी दिखी। देश भर से आए हजार से ज्यादा संतों से वंचित वर्ग के साथ मिलकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें जोड़ने का आह्वान किया गया।
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देश में हिंदू आबादी का कम और मुस्लिमों का ज्यादा बढ़ना, दादरी की घटना के विरोध में असहिष्णुता के मुद्दे के राष्ट्रव्यापी बन जाने से चिंतित संतों ने हिंदू समाज को एकजुट करने का बीड़ा उठाया है। संत सभा के दौरान देश में जनसंख्या असंतुलन संबंधी पर्चा बांटकर इसकी जानकारी देने की कोशिश की गई। स्वामी गोविंद देव महाराज ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की गारंटी हिंदू समाज की एकता और सशक्त हिंदू समाज ही है। हिंदू समाज अपनी कमजोरी समझे, उसका मूल्यांकन करे और समाधान के अपने मार्ग का निर्माण करें क्योंकि जिन-जिन भूभाग में हिंदुओं की संख्या घटी, वह क्षेत्र भारत से कटता गया।
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ब्रिटिश सरकार के 1818 में प्रकाशित भारत के नक्शे से यह स्थिति स्पष्ट हो जाती है। इसके लिए सिर्फ हिंदू समाज का बिखराव जिम्मेदार है। ऐसे में साधु-संतों को समरस समाज के लिए आगे आना चाहिए। साधु-संतों के बीच भेद नहीं होना चाहिए। संत छोटा या बड़ा नहीं होता। इस धारणा को बदलने के साथ सभी साधु-संतों को अपने-अपने क्षेत्र में भजन कीर्तन, भंडारा आदि में वंचित वर्ग को शामिल कर उनके साथ भोजन और कीर्तन करना चाहिए।
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महंत आदित्यनाथ ने कहा कि श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों के सृजनकर्ताओं के हम वंशज हैं। ऐसे हिंदू समाज में जाति पाति, ऊंच-नीच, छुआछूत, शास्त्र सम्मत कैसे हो सकता है। इन कुरीतियों को दूर करने के लिए संत समाज को आगे आना होगा। वंचितों को साथ लाना होगा।
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