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नजरिया बदलें, बाजार इस्तकबाल को तैयार
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नजरिया बदलें, बाजार इस्तकबाल को तैयार
गोरखपुर। सीजन का असर भी व्यापार में दिखता है, लेकिन यह कुछ पलों के लिए ही होता है। बाजार में जिस मंदी का हौव्वा खड़ा है, दरअसल वह धरातल पर नजर नहीं आ रही। यह बस लोगों की सोच पर हावी हो गई है। अगर बताई जा रही स्थिति सही होती तो लोगों की लाइफ स्टाइल बदल जाती। लेकिन, आज भी लोग पहले जैसा ही कपड़ा पहन रहे हैं, बाहर भोजन करने जा रहे हैं घूमने जा रहे हैं। कुछ भी तो नहीं बदला। ऐसे में मंदी की बात बेमानी है। त्योहार को लेकर व्यापारियों और कंपनियों ने अच्छी तैयारी कर रखी है। ऐसे में जरूरत है बस सोच बदलने की, यकीन मानिए बाजार खुले दिल से ग्राहकों के इस्तकबाल को तैयार है।
यह विचार शहर के प्रतिष्ठित व्यापारियों ने मंगलवार को अमर उजाला के सिटी दफ्तर में आयोजित ‘समृद्धि संवाद’ कार्यक्रम में व्यक्त किए। व्यापारियों ने बाजार की मौजूदा परिस्थितियों पर खुलकर बात की। कहा कि जुलाई से लेकर सितंबर का महीना व्यापार के लिहाज से थोड़ा सुस्त होता है। बावजूद इसके पिछले वर्ष की बैलेंस शीट पर नजर दौड़ाएं तो व्यापारी फायदे में है।
सुस्त सीजन से व्यापार की धीमी रफ्तार
मंदी नहीं सुस्त सीजन की वजह से व्यापार में उतार चढ़ाव हो रहा है। ये हर वर्ष होता है, व्यापारियों में इसे लेकर कोई हताशा नहीं है। मीडिया और सोशल मीडिया ने ही मंदी का हौव्वा खड़ा किया है। - संजय अग्रवाल, निदेशक पीसी ज्वेलर्स
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आने वाले त्योहार करेंगे भरपाई
मार्केट में प्रोडक्ट के डिमांड की कमी को मंदी कहा जाता है, मगर ये बाजार में नजर कहां आ रही है। निश्चित रूप से मध्यम वर्गीय परिवार कैश कम खर्च कर रहा है। पूरी उम्मीद है कि आने वाले त्योहार में यह वर्ग इस कमी को पूरा कर देगा। - प्रेम जालान, निदेशक जालान उत्सव
खरीदने की क्षमता बढ़ी
पहले मोबाइल खरीदने के लिए दुकान पर आने वाले लोग पांच से आठ हजार के बीच का मोबाइल खरीदते थे। अब 15 हजार से ऊपर के मोबाइल की डिमांड करते हैं, अगर मंदी है तो ये डिमांड में कमी आनी चाहिए। - दिनेश मोदी, निदेशक मोदी मोबाइल वर्ल्ड
ऑनलाइन कंपनियों ने पेश की चुनौती
ऑनलाइन कंपनियों ने बेशक रिटेल कारोबारियों के लिए चुनौतियां पेश की है। मगर, सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया जा रहा है। रही मंदी की बात को पिछले साल जुलाई अगस्त महीने की बैलेंस सीट इस वर्ष से मिलाई तो हम फायदे में ही है। - संदीप टेकड़ीवाल, निदेशक संगम फैमिली बाजार
सकारात्मक प्रचार से बूम करेगा मार्केट
सकारात्मक प्रचार प्रसार से ही बाजार अपने पैरों पर खड़ा रहता है। इसमें सोशल मीडिया के साथ मीडिया संगठनों की अहम भूमिका होती है। आज का युवा अच्छी कमाई करने के साथ उसे खर्च करने में भी यकीन करता है। - नीरज दास, निदेशक एडी मॉल
एक मंच पर लाने की कोशिश सराहनीय
तेजी से बदलते आर्थिक वातावरण और ग्राहकों की नवीनतम जरूरतों के साथ-साथ इंडस्ट्री व रिटेल व्यवसाय बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इसे आत्मसात करने के लिए सभी व्यापारी तैयार हैं। सभी को एक मंच पर लाने की अमर उजाला की पहल सराहनीय है। -डॉ. आरिफ सबीर, निदेशक डैक फर्नीचर
बरसात के बाद अच्छा होता है सीजन
बरसात के बाद व्यापार के लिए मौसम अच्छा रहता है। कोई व्यापारी पूरे साल कमाई नहीं करता है। सात से आठ महीने ही व्यापार होता है। बाजार में सुस्ती का दौर आने वाले त्योहारी सीजन में बेहतर हो जाता है। - फैजान अहमद, निदेशक स्पलाइस डोर
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गोरखपुर। सीजन का असर भी व्यापार में दिखता है, लेकिन यह कुछ पलों के लिए ही होता है। बाजार में जिस मंदी का हौव्वा खड़ा है, दरअसल वह धरातल पर नजर नहीं आ रही। यह बस लोगों की सोच पर हावी हो गई है। अगर बताई जा रही स्थिति सही होती तो लोगों की लाइफ स्टाइल बदल जाती। लेकिन, आज भी लोग पहले जैसा ही कपड़ा पहन रहे हैं, बाहर भोजन करने जा रहे हैं घूमने जा रहे हैं। कुछ भी तो नहीं बदला। ऐसे में मंदी की बात बेमानी है। त्योहार को लेकर व्यापारियों और कंपनियों ने अच्छी तैयारी कर रखी है। ऐसे में जरूरत है बस सोच बदलने की, यकीन मानिए बाजार खुले दिल से ग्राहकों के इस्तकबाल को तैयार है।
यह विचार शहर के प्रतिष्ठित व्यापारियों ने मंगलवार को अमर उजाला के सिटी दफ्तर में आयोजित ‘समृद्धि संवाद’ कार्यक्रम में व्यक्त किए। व्यापारियों ने बाजार की मौजूदा परिस्थितियों पर खुलकर बात की। कहा कि जुलाई से लेकर सितंबर का महीना व्यापार के लिहाज से थोड़ा सुस्त होता है। बावजूद इसके पिछले वर्ष की बैलेंस शीट पर नजर दौड़ाएं तो व्यापारी फायदे में है।
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सुस्त सीजन से व्यापार की धीमी रफ्तार
मंदी नहीं सुस्त सीजन की वजह से व्यापार में उतार चढ़ाव हो रहा है। ये हर वर्ष होता है, व्यापारियों में इसे लेकर कोई हताशा नहीं है। मीडिया और सोशल मीडिया ने ही मंदी का हौव्वा खड़ा किया है। - संजय अग्रवाल, निदेशक पीसी ज्वेलर्स
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आने वाले त्योहार करेंगे भरपाई
मार्केट में प्रोडक्ट के डिमांड की कमी को मंदी कहा जाता है, मगर ये बाजार में नजर कहां आ रही है। निश्चित रूप से मध्यम वर्गीय परिवार कैश कम खर्च कर रहा है। पूरी उम्मीद है कि आने वाले त्योहार में यह वर्ग इस कमी को पूरा कर देगा। - प्रेम जालान, निदेशक जालान उत्सव
खरीदने की क्षमता बढ़ी
पहले मोबाइल खरीदने के लिए दुकान पर आने वाले लोग पांच से आठ हजार के बीच का मोबाइल खरीदते थे। अब 15 हजार से ऊपर के मोबाइल की डिमांड करते हैं, अगर मंदी है तो ये डिमांड में कमी आनी चाहिए। - दिनेश मोदी, निदेशक मोदी मोबाइल वर्ल्ड
ऑनलाइन कंपनियों ने पेश की चुनौती
ऑनलाइन कंपनियों ने बेशक रिटेल कारोबारियों के लिए चुनौतियां पेश की है। मगर, सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया जा रहा है। रही मंदी की बात को पिछले साल जुलाई अगस्त महीने की बैलेंस सीट इस वर्ष से मिलाई तो हम फायदे में ही है। - संदीप टेकड़ीवाल, निदेशक संगम फैमिली बाजार
सकारात्मक प्रचार से बूम करेगा मार्केट
सकारात्मक प्रचार प्रसार से ही बाजार अपने पैरों पर खड़ा रहता है। इसमें सोशल मीडिया के साथ मीडिया संगठनों की अहम भूमिका होती है। आज का युवा अच्छी कमाई करने के साथ उसे खर्च करने में भी यकीन करता है। - नीरज दास, निदेशक एडी मॉल
एक मंच पर लाने की कोशिश सराहनीय
तेजी से बदलते आर्थिक वातावरण और ग्राहकों की नवीनतम जरूरतों के साथ-साथ इंडस्ट्री व रिटेल व्यवसाय बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इसे आत्मसात करने के लिए सभी व्यापारी तैयार हैं। सभी को एक मंच पर लाने की अमर उजाला की पहल सराहनीय है। -डॉ. आरिफ सबीर, निदेशक डैक फर्नीचर
बरसात के बाद अच्छा होता है सीजन
बरसात के बाद व्यापार के लिए मौसम अच्छा रहता है। कोई व्यापारी पूरे साल कमाई नहीं करता है। सात से आठ महीने ही व्यापार होता है। बाजार में सुस्ती का दौर आने वाले त्योहारी सीजन में बेहतर हो जाता है। - फैजान अहमद, निदेशक स्पलाइस डोर