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पैसा वीआईपी का, नंबर दे दिया सामान्य
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 04 Jan 2017 01:02 AM IST
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कार
संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) दफ्तर ने वाहन स्वामी से पैसा वीआईपी नंबर का लिया, मगर नंबर साधारण दे दिया। इसकी शिकायत जब वाहन स्वामी ने विभाग से की तो कोई सुनवाई नहीं हुई। थक हारकर उन्होंने प्रधानमंत्री दफ्तर से शिकायत की। इसके बाद से आरटीओ दफ्तर में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी अब अपने बचाव में जुट गए हैं।
शाहपुर क्षेत्र के राप्तीनगर निवासी विष्णु प्रताप सिंह ने चार अक्टूबर 2016 को मारूती विटारा ब्रेेजा गाड़ी खरीदी थी। छह दिसंबर 2016 को गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ दफ्तर में आवेदन किया। विष्णु ने वीआईपी नंबर यूपी 53 सीएच 0011 के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर निर्धारित शुल्क 6 हजार रुपये भी जमा कर दिया। 14 दिसंबर को उन्होंने लेट फीस 78,637 रुपये कैश भी जमा किया। बावजूद इसके आरटीओ दफ्तर ने उन्हें उनके मनपसंद नंबर की जगह यूपी 53 सीएच 4176 नंबर का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दे दिया। इस पर जब विष्णु ने आपत्ति दर्ज कराई तो अधिकारियों ने उनकी बात अनसुनी कर दी। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री दफ्तर को शिकायत भेजी, जहां से विभागीय आयुक्त को जांच का आदेश मिला। इससे आरटीओ दफ्तर में खलबली मच गई।
आरटीओ प्रशासन सूरजराम पाल ने बताया कि वाहन स्वामी ने रजिस्ट्रेशन के समय वीआईपी नंबर के लिए जमा शुल्क की रसीद फाइल में नहीं लगाई थी। इस वजह से रूटीन में नंबर दे दिया गया। बाद में वाहन स्वामी ने रसीद दिखाकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें अब सुधार की गुंजाइश नहीं है।
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शाहपुर क्षेत्र के राप्तीनगर निवासी विष्णु प्रताप सिंह ने चार अक्टूबर 2016 को मारूती विटारा ब्रेेजा गाड़ी खरीदी थी। छह दिसंबर 2016 को गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ दफ्तर में आवेदन किया। विष्णु ने वीआईपी नंबर यूपी 53 सीएच 0011 के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर निर्धारित शुल्क 6 हजार रुपये भी जमा कर दिया। 14 दिसंबर को उन्होंने लेट फीस 78,637 रुपये कैश भी जमा किया। बावजूद इसके आरटीओ दफ्तर ने उन्हें उनके मनपसंद नंबर की जगह यूपी 53 सीएच 4176 नंबर का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दे दिया। इस पर जब विष्णु ने आपत्ति दर्ज कराई तो अधिकारियों ने उनकी बात अनसुनी कर दी। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री दफ्तर को शिकायत भेजी, जहां से विभागीय आयुक्त को जांच का आदेश मिला। इससे आरटीओ दफ्तर में खलबली मच गई।
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आरटीओ प्रशासन सूरजराम पाल ने बताया कि वाहन स्वामी ने रजिस्ट्रेशन के समय वीआईपी नंबर के लिए जमा शुल्क की रसीद फाइल में नहीं लगाई थी। इस वजह से रूटीन में नंबर दे दिया गया। बाद में वाहन स्वामी ने रसीद दिखाकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें अब सुधार की गुंजाइश नहीं है।
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