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सामाजिक सत्ता राजनीतिक सत्ता से बड़ी : डॉ. राधामोहन

Wed, 10 May 2017 01:14 AM IST
संतोष सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
संतोष सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Wed, 10 May 2017 01:14 AM IST
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RMD says, 'Social power is bigger than polytical power'
विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल। - फोटो : Amar Ujala
महिला आईपीएस अफसर चारु निगम से तकरार के बाद नेशनल मीडिया में छाए भाजपा के नगर विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल सीएम योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक गुरु बताते हैं। लेकिन योगी सरकार बनने के बाद से ही जिस तरीके से वह सड़क पर संघर्ष करते दिख रहे हैं, उसे लेकर तरह-तरह के सियासी कयास लगाए जा रहे हैं। ताजा मामले के बाद जनप्रिय और सर्वसुलभ नेता की उनकी छवि को लेकर भी सवाल उठे हैं। कहा तो ये भी जा रहा है कि चार बार के विधायक होने के बावजूद योगी से शीतयुद्ध की वजह से उन्हें मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिल सकी। हालांकि वे कहते हैं कि इसका उन्हें मलाल नहीं। वे सामाजिक सत्ता को राजनीतिक सत्ता से बड़ी बताते हैं। तमाम सवालों पर डॉ. राधामोहन से सीधी और साफ बातचीत हुई। पेश है बातचीत के  प्रमुख अंश -
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डॉ. साहब, सरकार आपकी है लेकिन आपको लोगों के काम कराने के लिए, उन्हें राहत पहुंचाने के लिए लगातार सड़क पर संघर्ष करना पड़ रहा है। ये तो विरोधियों जैसी हालत है?
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नहीं, सरकार सिर्फ हमारी नहीं है। सरकार यूपी के नागरिकों की है। किसी विधायक या फिर मंत्री का इस पर कब्जा नहीं है। नागरिकों के लिए सड़क पर रहकर काम करना हमारा धर्म है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के अलावा हम जैसे कार्यकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना है कि अफसर शासकीय नीति के हिसाब से काम करें। सबका व्यवहार जनता के साथ मधुर और अच्छा रहे।
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आप जुझारू नेता माने जाते रहे हैं, जन प्रिय भी है लेकिन अब आप खुद कह रहे हैं कि मीडिया में विलेन बन गए हैं। क्या है आपका दर्द?
मैं जुझारू नहीं हूं। मेरे पास मारुति कार है, जिसे खुद चलाता हूं। सरकारी ड्राइवर और सुरक्षा गार्ड नहीं ले रखा है। मेरी कार में ठेकेदार या फिर पैसे वाले नहीं बैठतेे हैं। 15 साल से विधायक हूं लेकिन एक भी मुकदमा नहीं है। सिर्फ जनता के बीच का नेता बना रहना चाहता हूं। 

माना जाता है कि एक दल में होने के बावजूद आपकी और सीएम की सियासी लाइन मेल नहीं खाती?
ऐसा नहीं है। सीएम योगी आदित्यनाथ मेरे राजनीतिक गुरु हैं। उनसे मेरा संबंध 1998 से है। सिर्फ राजनीतिक रिश्ता नहीं है। जो लोग राजनीतिक चश्मे से संबंधों की व्याख्या करते हैं, वही सियासी लाइन को अलग बताते हैं। सीएम की सोच को जनता और मेरे स्वभाव को सीएम बखूबी जानते हैं। 

लगातार विधायक चुने जाने के बावजूद आप मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं हैं। क्या यह बात आपको खलती है?
भाजपा ही विधायक और मंत्री बनाती है। संगठन में जगह देती है। यदि मंत्री न बनने का मलाल होता तो घर बैठकर शोक मनाता। लेकिन ऐसा नहीं है। सड़क पर उतरकर जनता की लड़ाई लड़ रहा हूं। जिस विधायक को मंत्री बनने का शौक हो, वह भाजपा छोड़कर जा सकता है। यह वसूलों की पार्टी है।

क्या ये सच नहीं कि मंत्री बनकर आपको समाज की अधिक सेवा का अवसर मिलता?
ये सच है, लेकिन सामाजिक सत्ता राजनीतिक सत्ता से बड़ी होती है। देश सत्ता में बैठे लोगों से नहीं, जनता के बीच रहने वालों से बदलता है। मैं, राजनीति का घसियारा नहीं हूं। जो अधिकार हैं, उसी दायरे में रहकर जनता की लड़ाई को आगे बढ़ाऊंगा।   


क्या आपके मन में कभी कोई ऐसी बात भी आती है कि भाजपा में आपको उचित स्थान नहीं मिल पा रहा?
ऐसा नहीं है। पहला चुनाव भाजपा के खिलाफ लड़ा था। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ही 2002 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से चुनाव लड़ा और शिव प्रताप शुक्ला को हराकर चुनाव जीता भी। 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना प्रत्याशी बना दिया। लगातार चुनाव जीत रहा हूं। हर चुनाव में कुछ लोग टिकट (विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए) कटवाने का खेल खेलते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती है। भाजपा को जमीन से जुड़े अपने विधायक पर भरोसा है।
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