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एनजीटी की रिवर मॉनीटरिंग कमेटी फिर बहाल, बढ़ सकतीं हैं रामगढ़ताल किनारे के लोगों की मुश्किलें
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रामगढ़ताल
एनजीटी की रिवर मॉनीटरिंग कमेटी फिर बहाल, बढ़ सकतीं हैं रामगढ़ताल किनारे के लोगों की मुश्किलें
अरुण चन्द
गोरखपुर। रामगढ़ताल किनारे बसे करीब 50 हजार लोगों की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। नदी, झील एवं ताल आदि के संरक्षण के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तरफ से बनाई गई जिस रिवर मॉनीटरिंग कमेटी को शासन ने पिछले महीने भंग कर दिया था, उसे एनजीटी ने दोबारा बहाल करने के साथ ही इसका कार्यकाल बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दिया है। एनजीटी की कूड़ा निस्तारण प्रबंधन कमेटी का कार्यकाल तो 15 जुलाई को खत्म हो रहा है। मगर रामगढ़ताल का मामला दोनों ही कमेटी में चल रहा है। ऐसे में रिवर मॉनीटरिंग कमेटी के दोबारा बहाल होने से लोगों को राहत की आस कम होती दिख रही है। हालांकि कमेटी से राहत नहीं मिलने की दशा में जीडीए के सामने एनजीटी और फिर सुप्रीम कोर्ट में भी अपील करने का विकल्प खुला रहेगा।
सिर्फ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी भंग होनी थी
एनजीटी की हाई पावर कमेटी के सचिव राजेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि शासन की अपील पर एनजीटी ने मुख्य सचिव को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी की निगरानी खुद करने का अधिकार दिया था। साथ ही यह भी छूट दी थी कि वे चाहें तो इस कमेटी का कार्यकाल आगे बढ़ा सकते हैं या खत्म कर सकते हैं। शासन ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेेंट के साथ ही रिवर मॉनीटरिंग कमेटी भी भंग कर दी। एनजीटी ने इसपर शासन से आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि ट्रिब्यूनल ने सिर्फ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी को निरस्त करने या कार्यकाल बढ़ाने की अनुमति दी थी। ऐसे में रिवर मॉनीटरिंग कमेटी को भंग किया जाना गलत है।
18 को हो सकती है रामगढ़ताल मामले में सुनवाई
राजेंद्र सिंह ने बताया कि रिवर मॉनीटरिंग कमेटी के बहाल होने के बाद इसकी पहली बैठक 18 जुलाई को संभावित है। रामगढ़ताल के 500 मीटर दायरे में हुए निर्माण को ध्वस्त करने की संस्तुति के खिलाफ जीडीए ने जो प्रत्यावेदन दिया है, इस बैठक कमेटी इसपर भी सुनवाई कर सकती है।
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अरुण चन्द
गोरखपुर। रामगढ़ताल किनारे बसे करीब 50 हजार लोगों की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। नदी, झील एवं ताल आदि के संरक्षण के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तरफ से बनाई गई जिस रिवर मॉनीटरिंग कमेटी को शासन ने पिछले महीने भंग कर दिया था, उसे एनजीटी ने दोबारा बहाल करने के साथ ही इसका कार्यकाल बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दिया है। एनजीटी की कूड़ा निस्तारण प्रबंधन कमेटी का कार्यकाल तो 15 जुलाई को खत्म हो रहा है। मगर रामगढ़ताल का मामला दोनों ही कमेटी में चल रहा है। ऐसे में रिवर मॉनीटरिंग कमेटी के दोबारा बहाल होने से लोगों को राहत की आस कम होती दिख रही है। हालांकि कमेटी से राहत नहीं मिलने की दशा में जीडीए के सामने एनजीटी और फिर सुप्रीम कोर्ट में भी अपील करने का विकल्प खुला रहेगा।
सिर्फ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी भंग होनी थी
एनजीटी की हाई पावर कमेटी के सचिव राजेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि शासन की अपील पर एनजीटी ने मुख्य सचिव को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी की निगरानी खुद करने का अधिकार दिया था। साथ ही यह भी छूट दी थी कि वे चाहें तो इस कमेटी का कार्यकाल आगे बढ़ा सकते हैं या खत्म कर सकते हैं। शासन ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेेंट के साथ ही रिवर मॉनीटरिंग कमेटी भी भंग कर दी। एनजीटी ने इसपर शासन से आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि ट्रिब्यूनल ने सिर्फ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी को निरस्त करने या कार्यकाल बढ़ाने की अनुमति दी थी। ऐसे में रिवर मॉनीटरिंग कमेटी को भंग किया जाना गलत है।
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18 को हो सकती है रामगढ़ताल मामले में सुनवाई
राजेंद्र सिंह ने बताया कि रिवर मॉनीटरिंग कमेटी के बहाल होने के बाद इसकी पहली बैठक 18 जुलाई को संभावित है। रामगढ़ताल के 500 मीटर दायरे में हुए निर्माण को ध्वस्त करने की संस्तुति के खिलाफ जीडीए ने जो प्रत्यावेदन दिया है, इस बैठक कमेटी इसपर भी सुनवाई कर सकती है।
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