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गांव से निकलकर अब शहर की सेहत सुधारेंगी आशा
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jan 2016 08:47 PM IST
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शहरी इलाके में सेहत निगरानी के लिए जल्द ही आशाओं की नियुक्ति होगी। शासन ने इसके लिए अनुमति दे दी है। मलिन बस्ती के 500 परिवारों पर एक आशा की नियुक्ति होनी है। इसके लिए अनुभव के आधार पर यूएचआई (अर्बन हेल्थ इनीशिएटिव) में कार्य कर चुकीं महिलाओं के अलावा तलाकशुदा व विधवा महिलाओं को वरीयता दी जाएगी। जिले के शहरी क्षेत्र में 312 आशाओ का चयन होना है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पूरे प्रदेश में शहरी आशाओं की नियुक्ति होनी है। आशा के चयन के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है। मगर इंटरमीडिएट, स्नातक या परास्नातक की पढ़ाई करने वाली महिलाओं को एक-एक अंक अतिरिक्त दिया जाएगा, जबकि तीन अंक साक्षात्कार के होंगे। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में ही आशाओं की तैनाती होती रही है। राष्ट्रीय कार्यक्रमों में आशाओं की भूमिका और बेहतर रिस्पांस को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
जननी सुरक्षा योजना तथा जननी शिशु सुरक्षा योजना में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके तहत गर्भवती की जांच तथा प्रसव और नवजात की देखभाल के साथ ही टीबी, मलेरिया, फायलेरिया, इंसेफेलाइटिस, हाई फीवर, लैप्रोसी जैसे मामलों में भी इनसे निगरानी कराई जाती रही है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पूरे प्रदेश में शहरी आशाओं की नियुक्ति होनी है। आशा के चयन के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है। मगर इंटरमीडिएट, स्नातक या परास्नातक की पढ़ाई करने वाली महिलाओं को एक-एक अंक अतिरिक्त दिया जाएगा, जबकि तीन अंक साक्षात्कार के होंगे। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में ही आशाओं की तैनाती होती रही है। राष्ट्रीय कार्यक्रमों में आशाओं की भूमिका और बेहतर रिस्पांस को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
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जननी सुरक्षा योजना तथा जननी शिशु सुरक्षा योजना में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके तहत गर्भवती की जांच तथा प्रसव और नवजात की देखभाल के साथ ही टीबी, मलेरिया, फायलेरिया, इंसेफेलाइटिस, हाई फीवर, लैप्रोसी जैसे मामलों में भी इनसे निगरानी कराई जाती रही है।
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