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डॉक्टर से आठ लाख वसूलने के बाद और पैसों के लिए पुलिस और कथित पत्रकार ने रची साजिश, गिरफ्तार

Thu, 23 May 2019 04:00 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: देव कश्यप Updated Thu, 23 May 2019 04:00 AM IST
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Recovering eight lakhs from Psychiatrist, police threatening again for Two lakh in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

शहर के प्रसिद्ध मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रामशरण श्रीवास्तव से आठ लाख वसूलने के बाद बढ़ते लालच में ही चौकी इंचार्ज शिवप्रकाश सिंह और कथित पत्रकार प्रणव त्रिपाठी खुद की ही रची साजिश में फंसते चले गए। आठ लाख हासिल करने के बाद दो लाख और वसूलने का दबाव चौकी इंचार्ज बनाने लगे। चौकी इंचार्ज ने जिस ज्योति सिंह के प्रार्थना पत्र को दिखाया तो वो देखने के बाद ही डॉक्टर को शक हो गया था। क्योंकि तहरीर में श्रीवास्तव टाइटिल लिखा था जिसका इस्तेमाल डॉक्टर आमतौर पर करते ही नहीं है। इसी के बाद उन्हें शक था कि कोई करीबी ही साजिश में शामिल है। फिर प्रणव ने मदद के बहाने डॉक्टर को बदनामी की धौंस दी और फिर रुपये वसूलने का रास्ता बना। 

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जिस ज्योति सिंह के नाम का इस्तेमाल कर पूरी योजना तैयार की गई थी उसका पता चौकी इंचार्ज के प्रार्थना पत्र में अमरूद बगीया है मगर वहां पर अभी तक की जांच में इस नाम की कोई महिला सामने नहीं आई है। अब पुलिस इसकी भी सचाई जांच रही है कि इस नाम की महिला वास्तव में इस साजिश में शामिल भी है या सिर्फ कल्पना मात्र से ही प्रार्थना पत्र खुद तैयार कराया गया था। डॉक्टर के करीबी होने की वजह से प्रणव को सारी जानकारी थी कि डॉक्टर रुपये दे सकते हैं या नहीं। डॉ. रामशरण ने बताया कि चौकी पर बुलाने पर जब गया तो प्रार्थना पत्र में पढ़ने के बाद से ही संदेह हो गया था। 
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अफसरों से मुलाकात नहीं होने पर पहुंचे मंदिर
डॉक्टर अपनी फरियाद लेकर 19 मई को पहले पुलिस अफसरों के पास पहुंचे थे। मतदान होने की वजह से अफसर मौजूद नहीं थे और उन्हें दो दिन बाद बुलाया गया था। फिर उन्होंने आईएमए अध्यक्ष से संपर्क किया। आईएमए अध्यक्ष ने ही मुख्यमंत्री से वार्ता कर समय लिया और फिर दोनों ने मुख्यमंत्री के पास पहुंचकर सबूतों के साथ अपनी बात रखी। उसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच के बाद रंगदारी वसूलने वाले चौकी इंचार्ज और कथित पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया।

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प्रणव का डॉक्टर ने ही किया था इलाज 

डॉक्टर रामशरण के मुताबिक प्रणव को नशे की आदत थी। उसके चाचा से मेरा परिचय है। चाचा ने ही क्लीनिक पर भेजा था। इलाज करने के दौरान ही वह ज्यादा संपर्क में आ गया और उस पर भरोसा करने लगे थे।

मृतक आश्रित कोटे से पाए थे नौकरी
शिव प्रकाश सिंह 2011 बैच का दरोगा है। वाराणसी निवासी शिव प्रकाश को मृतक आश्रित कोटा से ही नौकरी मिली थी। इसके पहले भी उसके खिलाफ कई शिकायतें आई थी लेकिन सबूत ना होने की वजह से बच जाता था।

स्पीड पोस्ट की बात झूठी
शुरुआती जांच में एक तथ्य यह भी सामने आया था कि स्पीड पोस्ट से ज्योति ने शिकायत की है। जबकि इंस्पेक्टर राजघाट का कहना है कि थाने में इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई थी। 

हैंडराइटिंग की भी करा सकते है जांच
चौकी इंचार्ज ने तहरीर खुद लिखी या फिर कथित पत्रकार ने तैयार की थी। इसकी भी जांच कराए जाने की तैयारी है। पुलिस ने दरोगा के पास से उस तहरीर को बरामद करने के लिए जांच तेज कर दी है। इसके लिए दरोगा से पूछताछ करने की तैयारी है।

आरोप ऐसा कि खुद डॉक्टर भी डर गए 

डॉक्टर के पास जब चौकी इंचार्ज का फोन आया और दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप का मामला सामने आया तो वह खुद भी डर गए। बदनामी से बचने के लिए ही उन्होंने कोशिश जारी कि और फिर बीच में आए प्रणव की मदद से मुलाकात हुई। चौकी इंचार्ज ने तब कहा कि पांच लाख लड़की को देना है और पांच लाख रुपये में कई अफसर भी शामिल है। तत्काल रुपये चाहिए। शुरुआत दस लाख से हुई थी लेकिन बाद में आठ लाख में सौदा तय हो गया। आठ लाख लेने के बाद फिर दो लाख और लेने की कोशिश शुरू कर दी गई। डॉक्टर बताते हैं कि वह बदनामी से इतना डर गए थे कि आईएमए को भी कुछ नहीं बताना चाहते थे लेकिन रुपये देने के बाद फिर जब दोबारा रुपये मांगे गए तो उन्होंने अध्यक्ष से संपर्क किया।

डॉक्टर से वसूली के लिए ज्योति सिंह के नाम से काल्पनिक प्रार्थना पत्र तैयार किया गया होगा। अभी तक ज्योति नाम की कोई महिला सामने नहीं आई है। जांच जारी है, जल्द ही ज्योति की गुत्थी को भी सुलझा लिया जाएगा। -विनय कुमार सिंह, एसपी सिटी 

ऐसे उलझता गया मामला
-15 मई को फोन आने पर डॉक्टर ट्रांसपोर्ट नगर चौकी पर पहुंचे थे
-चौकी पर प्रार्थना पत्र में टाइटिल देखकर डॉक्टर चौंक गए थे
-करीबी प्रणव पर भरोसा और फिर रुपये के लिए बढ़ते दबाव से शक हुआ
-क्लीनिक पर भटकते हुए दरोगा का आना और फिर सीसी टीवी कैमरे को तोड़ने की कोशिश
-पूरी घटना सीसी टीवी कैमरा में रिकॉर्ड होने पर प्रणव ने ही चौकी इंचार्ज को इसकी जानकारी दी थी 

ऐसी घटनाएं खाकी के विश्वास को तोड़ती हैं: आईएमए
पुलिस अगर सीधे साधे लोगों के साथ ऐसा करेगी तो उनकी विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी। सभी नहीं लेकिन एक दो पुलिस वालों से पूरा महकमा शर्मिंदा होता है। आईएमए के अध्यक्ष एपी गुप्ता ने कहा कि पुलिस का काम संवैधानिक तरीके से सुरक्षा देना है। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए शर्मिंदगी की बात है। अध्यक्ष ने कहा कि एक सोची समझी साजिश के तहत डॉक्टर को फंसाया गया उनसे रुपये भी वसूले गए। इस घटना पर त्वरित कार्रवाई से ऐसी मंशा वालों को सबक मिला होगा। आईएमए इस घटना का निंदा करता है।

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