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बजट को किसी ने सराहा किसी ने धोखा बताया
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2016 12:44 AM IST
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विकसित भारत की परिकल्पना है यह बजट
आम बजट गरीबों, किसानों और कमजोर वर्ग को सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और समृद्ध व सशक्त भारत की परिकल्पना को साकार करने वाला व्यावहारिक एवं दूरदर्शी कदम है। किसानों की स्थिति को ध्यान में रखकर बजट में जो महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, वे कृषि क्षेत्र में किसानों को राहत देने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेंगे। प्रधानमंत्री फ सल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा कार्ड स्वास्थ्य स्कीम, जैविक खेती, पशुधन संजीवनी, पशु स्वास्थ्य कार्ड, ई पशुधन हाल्ट, देशी प्रजनन के लिए राष्ट्रीय जैनोमिक केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में संजीवनी का काम करेगा।
- महंत आदित्यनाथ, सदर सांसद
पूरी तरह विकासपरक है बजट
यह बजट देश के गरीबों, किसानों, नागरिकों, शहरी मध्यम वर्ग तथा अनुसूचित जाति को पूरी तरह समर्पित और विकासपरक है। आयकर में तीन लाख तक की आय को कर मुक्त करने, हाउस रेंट एलाउंस की सीमा 24 से बढ़ाकर 60 हजार करने, 60 वर्गमीटर के घर क्रय पर 12.5 प्रतिशत सेवाकर से छूट, 50 लाख तक मकान की खरीद पर ब्याज में 50 हजार की छूट से देश के करोड़ों मध्यवर्गीय नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचेगा। पूरी दुनिया जहां अधो विकास की ओर जा रही है वहीं 7.6 प्रतिशत विकास की दर से 2025 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा।
- डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल, नगर विधायक
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाला बजट
दवा की सस्ती दुकान खोलने का फैसला ठीक है। बजट में गरीब तबके पर ध्यान दिया गया है। यह कोई ऐसा बजट नहीं दिखा जिसे लोक लुभावन कहा जा सके। असल में इसमें योजनाओं पर फोकस किया गया है। यह बजट देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाला है। दवा की दुकानें खुलने से ऐसा भी नहीं है कि इससे दवा व्यापारियों का कोई नुकसान होगा। महिलाओं को गैस कनेक्शन देना, गांवों में बिजली पहुंचाने जैसी तमाम योजनाएं ऐसी हैं जिससे लगता है कि बजट में देश के विकास का ख्याल रखा गया है।
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- दिलीप सिंह, दवा व्यापारी
डिजिटल लिटरेसी सरकार की बेहतर पहल
गांव में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। लेकिन बेहतर शिक्षा नहीं मिल पाने से प्रतिभाओं को पनपने का मौका नहीं मिलता है। सरकार की डिजिटल लिटरेसी योजना इसमें काफी बेहतर साबित हो सकती है। युवाओं के दृष्टिकोण से यह सरकार की अच्छी पहल कही जा सकती है। इसके अलावा कुछ सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की योजना काफी अच्छी कही जा सकती है, लेकिन जब तक इसका सही ढंग से लागू करने की लिए ठोस योजना नहीं बनती तब तक इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
- दुर्गेश कुमार शुक्ल, छात्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय
नॉन ब्रांडेड में देखना होगा विकल्प
मेरी हर संभव कोशिश होती है कि ब्रांडेड सामान का ही इस्तेमाल करूं। लेकिन पिछले कई बजट से देख रहा हूं कि ब्रांडेड सामान उनके निशाने पर होता है। जब बजट में ही उसके दाम बढ़ा दिए जाएंगे तो कंपनियों को तो ग्राहकों से खेलने का और अवसर मिल जाएगा। अब तो बस यही लग रहा है कि नॉन ब्रांडेड सामानों में अपनी जरूरतों को तलाशना होगा। हालांकि इससे छोटी कंपनियों की तादाद मार्केट में बढ़ेगी, जिसका लाभ हम युवाओं को मिलेगा। मुझे लगता है कि छोटी कंपनियां भी इस अघोषित ऑफर को खोना नहीं चाहेंगी।
- अत्रि चेतन, युवा
मध्यम वर्ग को बजट ने निराश किया
आम आदमी ने इस बजट से टैक्स में छूट की आस लगा रखी थी लेकिन इसमें आयकर में छूट की सीमा तो बढ़ाई नहीं गई उल्टे सर्विस टैक्स बढ़ा दिया गया। सर्विस टैक्स बढ़ने से महंगाई की एक और मार पड़ गई है। मध्यम वर्ग के पास विभिन्न चीजों में कटौती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सर्विस टैक्स बढ़ने से आम आदमी की जेब ढीली होगी। अब तो ब्यूटी पार्लर, रेस्टोरेंट आदि जाने के लिए भी सोचना होगा। यहां तक कि फोन पर बात करना भी महंगा हो गया है।
- प्रतिमा राय, गृहणी
बजट में मध्यम वर्ग और महिलाओं की उपेक्षा
बजट में मध्यम वर्ग और महिलाओं की उपेक्षा की गई है। महिलाओं के नाम से गैस कनेक्शन देना सरकार का अच्छा फैसला है, लेकिन जिस ढंग से सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी कर दी गई, वह आम आदमी को परेशान करने वाला है। यदि अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए बीमा लेने पर भी ज्यादा रकम चुकानी पड़े तो यह कल्याणकारी कैसे हो सकता है। सरकार को बजट में मध्यम वर्ग का ध्यान रखना चाहिए था। सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी से सीमित आय में सामंजस्य बिठाना मुश्किल हो गया है।
- ममता चौहान, गृहणी
नौकरीपेशा वालों को ठगने वाला है बजट
बजट से आम आदमी अपने को ठगा महसूस कर रहा है। सर्विस टैक्स बढ़ाने से रोजाना की हर वस्तु महंगी हो जाएगी। डीजल का दाम बढ़ने से भी सामानों के दाम बढ़ेंगे। केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा वाले को भी ठगा है। उनकी जीवन भर की मेहनत की कमाई (पीएफ) पर टैक्स लगाना ठीक नहीं है। भविष्य निधि की रकम ही उनके बुढ़ापे मे काम आती है। यह टैक्स वाली सरकार हैं। नेताओं का तो पीएफ कटता नहीं इसलिए वे इसका महत्व क्या समझेंगे।
- प्रवीण सिंह, कर्मचारी
राजस्व मजबूत पर आम जनता कमजोर
बजट का उद्देश्य पूरी तौर साफ है। एक लाइन में अगर कहा जाय तो यह बजट देश के राजस्व को मजबूती देने और घाटे को नियंत्रित करने वाला है। खाद-बीज में सब्सिडी का कम किया जाना भी इसी उद्देश्य को मजबूत करने वाला है। हालांकि कृषि को लेकर बजट की अन्य सुविधाएं किसानों को राहत देंगी लेकिन आम जनता एक बार फिर दरकिनार है। बजट का सरकारात्मक पक्ष यह है कि इसमें आधारिक संरचना पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़कों के मद में 55 हजार करोड़ मिलना इसकी बानगी है। 10 हजार करोड़ से गांव की सड़कों के सुधार की योजना भी सराहनीय है। इससे आवागमन की सुविधा सुधरेगी। रोजगार का भी सृजन होगा।
- डॉ. करुणाकर राम त्रिपाठी, एसोसिएट प्रोफेसर, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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आम बजट गरीबों, किसानों और कमजोर वर्ग को सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और समृद्ध व सशक्त भारत की परिकल्पना को साकार करने वाला व्यावहारिक एवं दूरदर्शी कदम है। किसानों की स्थिति को ध्यान में रखकर बजट में जो महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, वे कृषि क्षेत्र में किसानों को राहत देने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेंगे। प्रधानमंत्री फ सल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा कार्ड स्वास्थ्य स्कीम, जैविक खेती, पशुधन संजीवनी, पशु स्वास्थ्य कार्ड, ई पशुधन हाल्ट, देशी प्रजनन के लिए राष्ट्रीय जैनोमिक केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में संजीवनी का काम करेगा।
- महंत आदित्यनाथ, सदर सांसद
पूरी तरह विकासपरक है बजट
यह बजट देश के गरीबों, किसानों, नागरिकों, शहरी मध्यम वर्ग तथा अनुसूचित जाति को पूरी तरह समर्पित और विकासपरक है। आयकर में तीन लाख तक की आय को कर मुक्त करने, हाउस रेंट एलाउंस की सीमा 24 से बढ़ाकर 60 हजार करने, 60 वर्गमीटर के घर क्रय पर 12.5 प्रतिशत सेवाकर से छूट, 50 लाख तक मकान की खरीद पर ब्याज में 50 हजार की छूट से देश के करोड़ों मध्यवर्गीय नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचेगा। पूरी दुनिया जहां अधो विकास की ओर जा रही है वहीं 7.6 प्रतिशत विकास की दर से 2025 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा।
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- डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल, नगर विधायक
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाला बजट
दवा की सस्ती दुकान खोलने का फैसला ठीक है। बजट में गरीब तबके पर ध्यान दिया गया है। यह कोई ऐसा बजट नहीं दिखा जिसे लोक लुभावन कहा जा सके। असल में इसमें योजनाओं पर फोकस किया गया है। यह बजट देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाला है। दवा की दुकानें खुलने से ऐसा भी नहीं है कि इससे दवा व्यापारियों का कोई नुकसान होगा। महिलाओं को गैस कनेक्शन देना, गांवों में बिजली पहुंचाने जैसी तमाम योजनाएं ऐसी हैं जिससे लगता है कि बजट में देश के विकास का ख्याल रखा गया है।
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- दिलीप सिंह, दवा व्यापारी
डिजिटल लिटरेसी सरकार की बेहतर पहल
गांव में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। लेकिन बेहतर शिक्षा नहीं मिल पाने से प्रतिभाओं को पनपने का मौका नहीं मिलता है। सरकार की डिजिटल लिटरेसी योजना इसमें काफी बेहतर साबित हो सकती है। युवाओं के दृष्टिकोण से यह सरकार की अच्छी पहल कही जा सकती है। इसके अलावा कुछ सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की योजना काफी अच्छी कही जा सकती है, लेकिन जब तक इसका सही ढंग से लागू करने की लिए ठोस योजना नहीं बनती तब तक इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
- दुर्गेश कुमार शुक्ल, छात्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय
नॉन ब्रांडेड में देखना होगा विकल्प
मेरी हर संभव कोशिश होती है कि ब्रांडेड सामान का ही इस्तेमाल करूं। लेकिन पिछले कई बजट से देख रहा हूं कि ब्रांडेड सामान उनके निशाने पर होता है। जब बजट में ही उसके दाम बढ़ा दिए जाएंगे तो कंपनियों को तो ग्राहकों से खेलने का और अवसर मिल जाएगा। अब तो बस यही लग रहा है कि नॉन ब्रांडेड सामानों में अपनी जरूरतों को तलाशना होगा। हालांकि इससे छोटी कंपनियों की तादाद मार्केट में बढ़ेगी, जिसका लाभ हम युवाओं को मिलेगा। मुझे लगता है कि छोटी कंपनियां भी इस अघोषित ऑफर को खोना नहीं चाहेंगी।
- अत्रि चेतन, युवा
मध्यम वर्ग को बजट ने निराश किया
आम आदमी ने इस बजट से टैक्स में छूट की आस लगा रखी थी लेकिन इसमें आयकर में छूट की सीमा तो बढ़ाई नहीं गई उल्टे सर्विस टैक्स बढ़ा दिया गया। सर्विस टैक्स बढ़ने से महंगाई की एक और मार पड़ गई है। मध्यम वर्ग के पास विभिन्न चीजों में कटौती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सर्विस टैक्स बढ़ने से आम आदमी की जेब ढीली होगी। अब तो ब्यूटी पार्लर, रेस्टोरेंट आदि जाने के लिए भी सोचना होगा। यहां तक कि फोन पर बात करना भी महंगा हो गया है।
- प्रतिमा राय, गृहणी
बजट में मध्यम वर्ग और महिलाओं की उपेक्षा
बजट में मध्यम वर्ग और महिलाओं की उपेक्षा की गई है। महिलाओं के नाम से गैस कनेक्शन देना सरकार का अच्छा फैसला है, लेकिन जिस ढंग से सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी कर दी गई, वह आम आदमी को परेशान करने वाला है। यदि अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए बीमा लेने पर भी ज्यादा रकम चुकानी पड़े तो यह कल्याणकारी कैसे हो सकता है। सरकार को बजट में मध्यम वर्ग का ध्यान रखना चाहिए था। सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी से सीमित आय में सामंजस्य बिठाना मुश्किल हो गया है।
- ममता चौहान, गृहणी
नौकरीपेशा वालों को ठगने वाला है बजट
बजट से आम आदमी अपने को ठगा महसूस कर रहा है। सर्विस टैक्स बढ़ाने से रोजाना की हर वस्तु महंगी हो जाएगी। डीजल का दाम बढ़ने से भी सामानों के दाम बढ़ेंगे। केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा वाले को भी ठगा है। उनकी जीवन भर की मेहनत की कमाई (पीएफ) पर टैक्स लगाना ठीक नहीं है। भविष्य निधि की रकम ही उनके बुढ़ापे मे काम आती है। यह टैक्स वाली सरकार हैं। नेताओं का तो पीएफ कटता नहीं इसलिए वे इसका महत्व क्या समझेंगे।
- प्रवीण सिंह, कर्मचारी
राजस्व मजबूत पर आम जनता कमजोर
बजट का उद्देश्य पूरी तौर साफ है। एक लाइन में अगर कहा जाय तो यह बजट देश के राजस्व को मजबूती देने और घाटे को नियंत्रित करने वाला है। खाद-बीज में सब्सिडी का कम किया जाना भी इसी उद्देश्य को मजबूत करने वाला है। हालांकि कृषि को लेकर बजट की अन्य सुविधाएं किसानों को राहत देंगी लेकिन आम जनता एक बार फिर दरकिनार है। बजट का सरकारात्मक पक्ष यह है कि इसमें आधारिक संरचना पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़कों के मद में 55 हजार करोड़ मिलना इसकी बानगी है। 10 हजार करोड़ से गांव की सड़कों के सुधार की योजना भी सराहनीय है। इससे आवागमन की सुविधा सुधरेगी। रोजगार का भी सृजन होगा।
- डॉ. करुणाकर राम त्रिपाठी, एसोसिएट प्रोफेसर, गोरखपुर यूनिवर्सिटी