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धूमधाम से निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 06 Jul 2016 08:01 PM IST
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जाफरा बाजार स्थित शीश महल मंदिर से निकाली गई भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा।
- फोटो : shivharsh
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आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया यानी बुधवार को भक्तों ने भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली। इसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बनारस से आई ढोल टीम की धुन पर भक्तगण जयकारा लगाते हुए जमकर झूमे। रथ में सवार भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के स्वागत और दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ सड़क के किनारे उमड़ी।
रथयात्रा की शुरुआत शाम चार बजे शीश महल मंदिर जाफरा बाजार से हुई। यात्रा में सबसे आगे सजाए गए सजीले घोड़े चल रहे थे। उनके पीछे बनारस की वह टीम थी, जो खासतौर से ढोल बजाने के गोरखपुर बुलाई गई थी। ढोल के पीछे चल रहा भगवान जगन्नाथ का रथ सभी के आकर्षण का केंद्र था। रथयात्रा अंधियारी बाग, दुर्गाबाड़ी, चरन लाल चौक, आर्यनगर, थवई का पुल, दीवान बाजार, बेनीगंज, होते हुए वापस शीश महल मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
रथयात्रा की पौराणिक मान्यता पर चर्चा करते हुए आयोजक बाबू मथुरा प्रसाद, शीश महल धर्मार्थ ट्रस्ट के मुख्य सचिव अनिल कुमार ने बताया कि भगवान जगन्नाथ 15 दिन तक अस्वस्थ रहने के बाद जब स्वस्थ हुए तो सुभद्रा ने नगर देखने की इच्छा जताई। इसी के बाद भगवान रथ पर विराजमान होकर निकले। तभी से रथयात्रा निकालने का विधान है। गोरखपुर में यह यात्रा 1848 से निकाली जा रही है। इस दौरान अरुण कुमार, अशोक कुमार, अवधेश कुमार, प्रमोद कुमार, सर्वेश, प्रियांशु, आदित्य, जयेश, शाश्वत, सत्येश, सागर, अंशु, प्रियेश, अमृतांश आदि शामिल थे।
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आर्यनगर में रथयात्रा का हुआ स्वागत
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आर्य नगर व्यापार मंडल की ओर से स्वागत किया गया। आर्यनगर के व्यापारी चौक पर पहले से खड़े थे। जैसे ही रथयात्रा वहां पहुंची, व्यापारियों ने भगवान जगन्नाथ का फूल-मालाओं से स्वागत किया और आरती उतारी। इस दौरान प्रसाद का वितरण भी किया गया। स्वागत करने वालों में अनुराग गुप्ता, पुष्पदंत जैन, कंवलजीत सिंह, बिट्ठल गुप्ता, सिद्धार्थ कृष्ण गुप्ता, संजय गुप्ता, सोनी अग्रवाल, दीप अग्रवाल, भरत केसवानी, राकेश गुप्ता, संजीव गुप्ता आदि शामिल रहे।
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रथयात्रा की शुरुआत शाम चार बजे शीश महल मंदिर जाफरा बाजार से हुई। यात्रा में सबसे आगे सजाए गए सजीले घोड़े चल रहे थे। उनके पीछे बनारस की वह टीम थी, जो खासतौर से ढोल बजाने के गोरखपुर बुलाई गई थी। ढोल के पीछे चल रहा भगवान जगन्नाथ का रथ सभी के आकर्षण का केंद्र था। रथयात्रा अंधियारी बाग, दुर्गाबाड़ी, चरन लाल चौक, आर्यनगर, थवई का पुल, दीवान बाजार, बेनीगंज, होते हुए वापस शीश महल मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
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रथयात्रा की पौराणिक मान्यता पर चर्चा करते हुए आयोजक बाबू मथुरा प्रसाद, शीश महल धर्मार्थ ट्रस्ट के मुख्य सचिव अनिल कुमार ने बताया कि भगवान जगन्नाथ 15 दिन तक अस्वस्थ रहने के बाद जब स्वस्थ हुए तो सुभद्रा ने नगर देखने की इच्छा जताई। इसी के बाद भगवान रथ पर विराजमान होकर निकले। तभी से रथयात्रा निकालने का विधान है। गोरखपुर में यह यात्रा 1848 से निकाली जा रही है। इस दौरान अरुण कुमार, अशोक कुमार, अवधेश कुमार, प्रमोद कुमार, सर्वेश, प्रियांशु, आदित्य, जयेश, शाश्वत, सत्येश, सागर, अंशु, प्रियेश, अमृतांश आदि शामिल थे।
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आर्यनगर में रथयात्रा का हुआ स्वागत
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आर्य नगर व्यापार मंडल की ओर से स्वागत किया गया। आर्यनगर के व्यापारी चौक पर पहले से खड़े थे। जैसे ही रथयात्रा वहां पहुंची, व्यापारियों ने भगवान जगन्नाथ का फूल-मालाओं से स्वागत किया और आरती उतारी। इस दौरान प्रसाद का वितरण भी किया गया। स्वागत करने वालों में अनुराग गुप्ता, पुष्पदंत जैन, कंवलजीत सिंह, बिट्ठल गुप्ता, सिद्धार्थ कृष्ण गुप्ता, संजय गुप्ता, सोनी अग्रवाल, दीप अग्रवाल, भरत केसवानी, राकेश गुप्ता, संजीव गुप्ता आदि शामिल रहे।