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प्राकृतिक तरीके से होगा राप्ती नदी में गिरने वाले पानी का ट्रीटमेंट
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प्राकृतिक तरीके से होगा राप्ती नदी में गिरने वाले पानी का ट्रीटमेंट
गोरखपुर। राप्ती नदी में गिरने वाले 10 नालों के गंदे पानी का प्राकृतिक तरीके से शोधन होगा। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा योजना के अंतर्गत नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) नागपुर इसके लिए योजना भी तैयार कर चुका है। गंगा की सहायक नदी होने की वजह से राप्ती नदी में गिरने वाले नालों के पानी को साफ करने का काम इस योजना में शामिल किया गया है।
शहर में करीब 230 नाले हैं। इन नालों का पानी राप्ती नदी के अलावा रामगढ़ताल में गिरता है। रामगढ़ताल में गिरने वाले नालों के पानी के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तो लगा दिया गया है, लेकिन राप्ती नदी में अब भी बिना साफ किए ही नालों का पानी गिरता है। जबकि शहर के करीब दो तिहाई इलाकों का राप्ती नदी में गिरता है। ऐसे में इन नालों के पानी को साफ करने के लिए एसटीपी की आवश्यकता है, लेकिन इसमें काफी समय लगने वाला है। ऐसे में राप्ती नदी में गिरने वाले नालों को प्राकृतिक तौर पर स्वच्छ करने की योजना तैयार की गई है। करीब 8.5 करोड़ की लागत की इस योजना को अमृत योजना की स्टेट हाई पावर स्टेयरिंग कमेटी ने स्वीकृति दे दी है। फिलहाल यह योजना लघुकालिक योजना के रूप में कार्य करेगी और बाद में इसे एसटीपी से जोड़ दिया जाएगा।
इन नालों का पानी होगा शोधित
ट्रांसपोर्टनगर, हांसुपुर, महेसरा, स्टेपिंग स्टोन, नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर, ग्रीन सिटी फेज -2, मिर्जापुर, बहरामपुर, घसियारी नाला, बसंतपुर
- नालों के पानी का नीरी प्राकृतिक तरीके से उपचार करेगा। इसके अंतर्गत नालों के पानी में कुछ ऐसे बैक्टीरिया विकसित किए जाएंगे जो पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाएंगे। नीरी ने इसके लिए सर्वे भी कर लिया है। योजना के क्रियान्वयन में करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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- सुरेश चंद, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
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गोरखपुर। राप्ती नदी में गिरने वाले 10 नालों के गंदे पानी का प्राकृतिक तरीके से शोधन होगा। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा योजना के अंतर्गत नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) नागपुर इसके लिए योजना भी तैयार कर चुका है। गंगा की सहायक नदी होने की वजह से राप्ती नदी में गिरने वाले नालों के पानी को साफ करने का काम इस योजना में शामिल किया गया है।
शहर में करीब 230 नाले हैं। इन नालों का पानी राप्ती नदी के अलावा रामगढ़ताल में गिरता है। रामगढ़ताल में गिरने वाले नालों के पानी के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तो लगा दिया गया है, लेकिन राप्ती नदी में अब भी बिना साफ किए ही नालों का पानी गिरता है। जबकि शहर के करीब दो तिहाई इलाकों का राप्ती नदी में गिरता है। ऐसे में इन नालों के पानी को साफ करने के लिए एसटीपी की आवश्यकता है, लेकिन इसमें काफी समय लगने वाला है। ऐसे में राप्ती नदी में गिरने वाले नालों को प्राकृतिक तौर पर स्वच्छ करने की योजना तैयार की गई है। करीब 8.5 करोड़ की लागत की इस योजना को अमृत योजना की स्टेट हाई पावर स्टेयरिंग कमेटी ने स्वीकृति दे दी है। फिलहाल यह योजना लघुकालिक योजना के रूप में कार्य करेगी और बाद में इसे एसटीपी से जोड़ दिया जाएगा।
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इन नालों का पानी होगा शोधित
ट्रांसपोर्टनगर, हांसुपुर, महेसरा, स्टेपिंग स्टोन, नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर, ग्रीन सिटी फेज -2, मिर्जापुर, बहरामपुर, घसियारी नाला, बसंतपुर
- नालों के पानी का नीरी प्राकृतिक तरीके से उपचार करेगा। इसके अंतर्गत नालों के पानी में कुछ ऐसे बैक्टीरिया विकसित किए जाएंगे जो पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाएंगे। नीरी ने इसके लिए सर्वे भी कर लिया है। योजना के क्रियान्वयन में करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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- सुरेश चंद, चीफ इंजीनियर, नगर निगम