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रेलवे में 50 वर्ष की उम्र पार करने वाले 1200 कर्मचारी नेताओं पर वीआरएस की तलवार
Fri, 13 Dec 2019 12:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Dec 2019 12:15 PM IST
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रेलवे यूनियन के नेता।
- फोटो : अमर उजाला
रेलवे में 50 वर्ष की उम्र पार करने वाले यूनियन के पदाधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति (वीआरएस) देने तैयारी शुरू हो गई है। इससे हड़कंप मच गया है। पूर्वोत्तर रेलवे में करीब 1200 कर्मचारी नेता हैं जो इस दायरे में आ सकते हैं। इन रेलकर्मियों पर वीआरएस की तलवार लटकने लगी है। सूत्रों के अनुसार नियम के दायरे में यूनियन के मुख्य पदाधिकारी भी हैं।
यूनियन के पदाधिकारियों ने ऐसा प्रस्ताव लाने वाले अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उनमें जबरदस्त आक्रोश है। पदाधिकारियों का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से इसकी जांच तो समझ में आती है, लेकिन सभी को नकारा साबित करना निंदनीय है। अमर उजाला ने यूनियन के पदाधिकारियों से इस मामले पर उनके आगे की रणनीति पर बात की तो सभी ने विरोध जताया और आंदोलन की बात कही।
रेलवे व्यवस्था को सुधारने के लिए बैठक थी और उसमें अधिकारियों ने यूनियन के पदाधिकारियों को काम नहीं करने वाला बताया है। यह जनता में छवि खराब करने की कोशिश है। एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। 16 दिसंबर को नरमू के अधिवेशन में इस पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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- केएल गुप्त, महामंत्री नरमू व सहायक महामंत्री एआईआरएफ
अगर कहीं गड़बड़ी है तो व्यक्तिगत तौर पर जांच करानी चाहिए। इस तरह सामूहिक रूप से यूनियन पदाधिकारियों को ही नकारा घोषित करना निंदनीय है। यूनियन के नेता काम करते हैं। आंदोलन भी अवकाश लेकर या भोजनावकाश में करते हैं। सरकार पहले अपने सांसदों और मंत्रियों की समीक्षा करे। अगर जबरन सेवानिवृत्त पर विचार किया गया तो देशभर में आंदोलन होगा।
- विनोद कुमार राय, महामंत्री पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ
केंद्र सरकार यूनियन के पदाधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती है। ताकि निजीकरण का विरोध न किया जाए। रेलवे को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया की ही एक कड़ी है। यूनियन के पदाधिकारी ड्यूटी करने के बाद अतिरिक्त समय संगठन को देते हैं। अगर सरकार ने ऐसा फैसला लिया तो जबरदस्त विरोध किया जाएगा।
- अजय यादव, मीडिया प्रभारी पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ
सामूहिक रूप से यूनियन के पदाधिकारियों को नकारा बताना गलत है। इससे काम करने वालों में नकारात्मकता का भाव पैदा होता है। अगर कहीं गड़बड़ी है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाए। रेलवे बोर्ड ने अगर इस तरह का कोई फैसला लिया तो उसका विरोध किया जाएगा।
- शीतल प्रसाद, जोनल महामंत्री ऑल इंडिया गार्ड कौंसिल
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यूनियन के पदाधिकारियों ने ऐसा प्रस्ताव लाने वाले अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उनमें जबरदस्त आक्रोश है। पदाधिकारियों का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से इसकी जांच तो समझ में आती है, लेकिन सभी को नकारा साबित करना निंदनीय है। अमर उजाला ने यूनियन के पदाधिकारियों से इस मामले पर उनके आगे की रणनीति पर बात की तो सभी ने विरोध जताया और आंदोलन की बात कही।
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रेलवे व्यवस्था को सुधारने के लिए बैठक थी और उसमें अधिकारियों ने यूनियन के पदाधिकारियों को काम नहीं करने वाला बताया है। यह जनता में छवि खराब करने की कोशिश है। एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। 16 दिसंबर को नरमू के अधिवेशन में इस पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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- केएल गुप्त, महामंत्री नरमू व सहायक महामंत्री एआईआरएफ
अगर कहीं गड़बड़ी है तो व्यक्तिगत तौर पर जांच करानी चाहिए। इस तरह सामूहिक रूप से यूनियन पदाधिकारियों को ही नकारा घोषित करना निंदनीय है। यूनियन के नेता काम करते हैं। आंदोलन भी अवकाश लेकर या भोजनावकाश में करते हैं। सरकार पहले अपने सांसदों और मंत्रियों की समीक्षा करे। अगर जबरन सेवानिवृत्त पर विचार किया गया तो देशभर में आंदोलन होगा।
- विनोद कुमार राय, महामंत्री पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ
केंद्र सरकार यूनियन के पदाधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती है। ताकि निजीकरण का विरोध न किया जाए। रेलवे को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया की ही एक कड़ी है। यूनियन के पदाधिकारी ड्यूटी करने के बाद अतिरिक्त समय संगठन को देते हैं। अगर सरकार ने ऐसा फैसला लिया तो जबरदस्त विरोध किया जाएगा।
- अजय यादव, मीडिया प्रभारी पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ
सामूहिक रूप से यूनियन के पदाधिकारियों को नकारा बताना गलत है। इससे काम करने वालों में नकारात्मकता का भाव पैदा होता है। अगर कहीं गड़बड़ी है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाए। रेलवे बोर्ड ने अगर इस तरह का कोई फैसला लिया तो उसका विरोध किया जाएगा।
- शीतल प्रसाद, जोनल महामंत्री ऑल इंडिया गार्ड कौंसिल