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तीन पेट्रोल पंपों पर फिर छापा

Wed, 24 May 2017 01:44 AM IST
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर।
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Wed, 24 May 2017 01:44 AM IST
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Raid on petrol pump again
petrol pump
आयल कंपनियों, बाट-माप और प्रशासन की टीम ने मंगलवार को बड़हलगंज क्षेत्र के तीन पेट्रोल पंप पर छापा मारकर सघन जांच की। इस दौरान सब कुछ सामान्य पाया गया। टीम ने जिन पेट्रोल पंपों की जांच की उनमें आईओसी का साकेत फिलिंग स्टेशन मझगांवा, विजय फिलिंग स्टेशन हाटा तथा बीपीसीएल का उषा फिलिंग स्टेशन अतायर शामिल है। 
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चोर पेट्रोल पंपों पर लटका रहेगा सील का ताला 
सूबे के कई पेट्रोल पंपों पर तेल की चोरी पकड़े जाने के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब शासन ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। अब तक की जांच में गड़बड़ी के बाद जिन भी पेट्रोल पंपों की संबंधित यूनिट का नाजिल सील किया गया है उन्हें अब शासन के आदेश के बाद ही तोड़ा जाएगा। जिला आपूर्ति अधिकारी कमल नयन सिंह के मुताबिक अभी तक जुर्माना (कंपाउंडिंग) वसूलकर नाजिल का सील तोड़ दिया जाता था, मगर शासन की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि उसके निर्देश के बिना घटतौली वाले किसी भी पेट्रोल पंप की यूनिट का सील न खोला जाए। बताते चलें कि तेल चोरी पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी। जिले में अब तक 38 पेट्रोल पंपों की हुई जांच में जहां तीन में घटतौली पकड़ी गई वहीं एक में चिप की मदद से पेट्रोल चोरी की आशंका पर उसका भी नाजिल सील किया जा चुका है। जिन तीन पेट्रोल पंपों पर घटतौली पकड़ी गई है उनमें पिपराइच में आईओसी के मेसर्स तुरवा फीलिंग तथा एचपीसीएल का मेसर्स शक्ति स्रोत तेनुआपार की दो यूनिट शामिल हैं। इसी तरह कैंपियरगज में स्थित आईओसी के मेसर्स मातनहेलिया ऑटो सर्विस में पल्सर यूनिट में छेड़छाड़ पाई गई थी। 
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मातनहेलिया पेट्रोल पंप मालिक की मुश्किलें बढ़ीं
कैंपियरगंज स्थित मातनहेलिया पेट्रोल पंप मालिक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आईओसी ने जिला आपूर्ति और बाट-माप विभाग से पेट्रोल पंप से जब्त की गई पल्सर यूनिट को जांच के लिए मांगा है। गत दिनों इस पेट्रोल पंप की जांच में एक यूनिट में चिप से घटतौली की आशंका पर जांच टीम ने उसका नाजिल सील कर दिया था। 
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जिला आपूर्ति अधिकारी कमल नयन सिंह का कहना है कि पल्सर यूनिट में अलग से पीले रंग के दो तार जोड़े गए थे। पूछताछ में पेट्रोल पंप वालों ने बताया कि छोटी से खराबी हो गई थी जिसे दुरुस्त करने के लिए दोनों तार का इस्तेमाल किया गया, जबकि आयल कंपनियों के नियम के मुताबिक किसी भी दशा में पल्सर यूनिट से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। अगर इसमें कोई खराबी आती है तो पेट्रोल पंप मालिक को इसकी सूचना संबंधित आयल कंपनी को देनी होती है। आयल कंपनी के अफसर की मौजूदगी में पेट्रोल पंप की संबंधित यूनिट को सील किया जाता है फिर नई पल्सर यूनिट लगाई जाती है। पल्सर यूनिट में खराबी आने पर उसे नए सिरे से पूरा बदलने का ही प्रावधान है, मगर मातनहेलिया पेट्रोल पंप के पल्सर यूनिट में बाहर से छेड़छाड़ की गई थी। आईओसी की जांच में यह तत्काल पकड़ में आ जाएगा।


तकनीशियन की कमी ने कई को बचा लिया 
पेट्रोल पंपों की जांच करने वाली टीम में तकनीशियन का अहम रोल होता है। गोरखपुर में आईओसी के पास सिर्फ दो तकनीशियन हैं। ऐसे में शासन की सख्ती और प्रशासन के पास अफसर होने के बाद भी पेट्रोल पंपों की जांच के लिए एक साथ कई टीमें नहीं बनाई जा सकीं। नतीजतन जब एक-एक कर छापामारी शुरू हुई तो जिले के दूसरे पेट्रोल पंप वाले सतर्क हो गए। एक पेट्रोल पंप की एक यूनिट की जांच में तकरीबन दो घंटे का समय लग जाता है। एक पंप पर दो से चार यूनिट होती है। ऐसे में दिन भर में तीन पेट्रोल पंपों की ही जांच हो पाती है। जिला आपूर्ति विभाग के मुताबिक जिले में 137 पेट्रोल पंप हैं और अभी तक 38 की जांच की जा चुकी है। विभाग के मुताबिक बाकी के भी सभी पंपों की जांच होनी है।
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