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ले रहे सड़क पर ड्यूटी का वेतन, कर रहे अधिकारियों के घर चौका-बर्तन
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ले रहे सड़क पर ड्यूटी का वेतन, कर रहे अधिकारियों के घर चौका-बर्तन
टीपी शाही
गोरखपुर। लोक निर्माण विभाग के जिन कर्मचारियों को सड़कों पर होना चाहिए, वे साहब लोगों के बंगलों और आवासों में चूल्हा-चौका कर रहे हैं। ऐसे लगभग 550 मेठ बेलदार वर्क एजेंट, चौकीदार व सुपरवाइजर लोक निर्माण विभाग में जिले के सभी खंडों में तैनात हैं। मूलत: इन सबको सड़कों से संबंधित कामों का आवंटन है, मगर ये कभी सड़क पर नहीं दिखाई देते हैं। इन कर्मचारियों को 25 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है।
इस मामले में सूचना मिलने पर अमर उजाला संवाददाता ने पीडब्लूडी कर्मचारी बनकर कुछ अधिकारियों से उनके यहां तैनात मेठ, बेलदार जैसे कर्मचारियों की जानकारी विभागीय कार्य के बहाने मांगी। अधिकारियों ने जो कुछ बताया उससे साफ है कि वर्तमान अधिकारियों के यहां ही नहीं, सेवानिवृत्त अधिकारियों के घरों में भी लंबे समय से ऐसे कर्मचारियों की तैनाती है। बानगी के तौर पर कुछ मामले दिए जा रहे हैं। मामले की जांच हुई तो हकीकत अपने आप सामने आ जाएगी कि किस तरह से जमीनी काम के लिए तैनात सरकारी कर्मचारी घरेलू नौकर का काम कर रहे हैं। बदले में सरकार से उनके खाते में मोटी तनख्वाह जाती रहती है।
जानकारी के मुताबिक लोक निर्माण विभाग की 20 किलो मीटर लंबी सड़क पर सात बेलदार व एक मेठ तैनात होते हैं। बेलदार के जिम्मे सड़क के किनारे जहां पर गड्ढे हों, वहां मिट्टी डालने का काम रहता है। बेलदार ही झाड़-झंखाड़ की सफाई भी करते हैं। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी मेठ की रहती है। सुपरवाइजर के जिम्मे काम की मानीटरिंग और अवर अभियंता के साथ मिलकर माप-जोख की रहती है। चौकीदार का काम डाकबंगला से लेकर अन्य विभागीय स्थानों पर चौकीदारी करना होता है। सूत्रों ने बताया कि हेडक्वार्टर जेई राजीव यादव हैं, उनके घर पर विभाग के राममूरत और अंबिका तैनात हैं। नियमानुसार, दोनों की तैनाती सरकारी आवासों के रखरखाव के लिए है। वेतन भी इसी ड्यूटी की बनती है। हालांकि जेई राजीव यादव ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया। साथ ही कहा कि घर पर किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। वहीं, अधीक्षण अभियंता पीएमजीएसवाई अशोक कुमार श्रीवास्तव के घर श्रीनारायण, रामानंद और प्रहलाद काम करते हैं, जबकि कागजों पर इनकी तैनाती सड़क पर है। इन सबको सड़क के रखरखाव का वेतन मिलता है, लेकिन अफसर के घर पर घरेलू काम करते रहे हैं। इस संबंध में अशोक कुमार श्रीवास्तव से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
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केस-1
उमाशंकर प्रसाद गोरखपुर में लगभग 12 साल पहले अधीक्षण अभियंता के रूप में तैनात थे। वह रिटायर हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग में तैनात कर्मचारी चुल्हाई की तैनाती पूर्व अधीक्षण अभियंता के घर पर है। उनकी हाजिरी विभाग से बनती है और वेतन उनके खाते में जाता है। इस सूचना की पुष्टि के लिए जब अमर उजाला संवाददाता ने लोक निर्माण विभाग का कर्मचारी बनकर मंगलवार को उमाशंकर से मोबाइल फोन पर बात की तो उन्होंने चुल्हाई की तैनाती स्वीकार की। बोले, एनएच के कुछ कर्मचारियों की तैनाती भी थी, लेकिन वे अब हटा दिए गए। चुल्हाई की तैनाती लंबे समय है। वह बीच में बीमार था। अब भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा है, लेकिन विश्वसनीय है। अभी हटाने की जरूरत नहीं है। मैं, भारती से बात करता हूं। दरअसल, भारती अधिशासी अभियंता हैं। रिटायर अफसर बार-बार भारती से ही बात करने की रट लगाए थे। इस संबंध में एसपी भारती से संपर्क करने की कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
केस-2
छह साल पहले अधीक्षण अभियंता रहे हरिहर प्रसाद रिटायर हो चुके हैं। उनके घर पर लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी अशोक अब भी तैनात हैं। पीडब्लूडी कर्मचारी के रूप में अमर उजाला संवाददाता ने उनसे मंगलवार को मोबाइल फोन पर बातचीत की। हरिहर प्रसाद ने अशोक की तैनाती की बात स्वीकार भी की। हरिहर प्रसाद ने कहा कि छह दिसंबर को घर में शादी है। कम से कम तब तक अशोक को न हटाया जाए तो ठीक रहेगा।
केस-3
निर्माण खंड भवन के अधिशासी अभियंता रामजीत प्रसाद का संतकबीरनगर ट्रांसफर हो गया, लेकिन उन्होंने सरकारी बंगला नहीं छोड़ा। नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ से मिली जानकारी के मुताबिक अधिशासी अभियंता के पिता सरकारी मकान में रहते हैं। इस मकान पर लोक निर्माण विभाग के श्रीकांत, रामजीत सहित तीन कर्मचारी अब भी तैनात हैं। अमर उजाला संवाददाता ने पीडब्लूडी कर्मचारी के रूप में मंगलवार को रामजीत प्रसाद से बात की तो वे उखड़ गए। बोले- अभी एक साल तक बंगला नहीं छोड़ेंगे। जब तक बंगला रहेगा, तब तक कर्मचारी भी तैनात रहेंगे। बंगले में लीगल तरीके से रहते हैं। इसका किराया देते हैं। पहले तो रामजीत प्रसाद ने कर्मचारियों की घर पर तैनाती स्वीकार की। बाद में फोन करके कहा कि किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। बातचीत के ऑडियो उपलब्ध हैं।
हर जेई के अंडर में होते हैं मेठ बेलदार
हर मेठ, बेलदार को कागज में सड़कों पर दिखाया जाता है। वे भले ही किसी साहब के वहां कार्य करते हैं, पर उनकी हाजिरी जेई के पास रखे रजिस्टर में ही होती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार हर जेई के आवास पर दो कर्मचारी होता है। एई के वहां तीन जो काफी रसूख वाला है, वह जितना चाहे रख लेता है। एक्सीईएन जितना चाहे कर्मचारी लगा ले। वैसे पीएमजीएसवाई के अधीक्षण अभियंता के वहां ऐसे तीन कर्मचारी तैनात हैं। पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता के वहां तैनात दो कर्मचारियों को उन्होंने हटा दिया था। चीफ साहब को क्या पूछना है वह तो सर्वेसर्वा हैं।
एसी में बैठने वाले सड़क पर कैसे करेंगे काम
एक कर्मचारी नेता ने कहा कि जो कर्मचारी साहब के वहां एसी कमरे में बैठकर काम करते हैं, वे सड़क पर नहीं खड़े हो पाएंगे। उन्हें साहब, मेम साहब की चाकरी मंजूर पर सड़क पर माटी उठाना मंजूर नहीं है।
जितने भी मेठ बेलदार हैं उनकी तैनाती सड़कों पर है पर कोई सड़क पर कार्य नहीं करता है। सभी इधर उधर घूमते नजर आते हैं। ऐसे लोगों की कोई जरूरत नही है। कार्य न करने वाले को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। - एमपी चौरसिया अधीक्षण अभियंता
(संवाद न्यूज एजेंसी)
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गोरखपुर। लोक निर्माण विभाग के जिन कर्मचारियों को सड़कों पर होना चाहिए, वे साहब लोगों के बंगलों और आवासों में चूल्हा-चौका कर रहे हैं। ऐसे लगभग 550 मेठ बेलदार वर्क एजेंट, चौकीदार व सुपरवाइजर लोक निर्माण विभाग में जिले के सभी खंडों में तैनात हैं। मूलत: इन सबको सड़कों से संबंधित कामों का आवंटन है, मगर ये कभी सड़क पर नहीं दिखाई देते हैं। इन कर्मचारियों को 25 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है।
इस मामले में सूचना मिलने पर अमर उजाला संवाददाता ने पीडब्लूडी कर्मचारी बनकर कुछ अधिकारियों से उनके यहां तैनात मेठ, बेलदार जैसे कर्मचारियों की जानकारी विभागीय कार्य के बहाने मांगी। अधिकारियों ने जो कुछ बताया उससे साफ है कि वर्तमान अधिकारियों के यहां ही नहीं, सेवानिवृत्त अधिकारियों के घरों में भी लंबे समय से ऐसे कर्मचारियों की तैनाती है। बानगी के तौर पर कुछ मामले दिए जा रहे हैं। मामले की जांच हुई तो हकीकत अपने आप सामने आ जाएगी कि किस तरह से जमीनी काम के लिए तैनात सरकारी कर्मचारी घरेलू नौकर का काम कर रहे हैं। बदले में सरकार से उनके खाते में मोटी तनख्वाह जाती रहती है।
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जानकारी के मुताबिक लोक निर्माण विभाग की 20 किलो मीटर लंबी सड़क पर सात बेलदार व एक मेठ तैनात होते हैं। बेलदार के जिम्मे सड़क के किनारे जहां पर गड्ढे हों, वहां मिट्टी डालने का काम रहता है। बेलदार ही झाड़-झंखाड़ की सफाई भी करते हैं। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी मेठ की रहती है। सुपरवाइजर के जिम्मे काम की मानीटरिंग और अवर अभियंता के साथ मिलकर माप-जोख की रहती है। चौकीदार का काम डाकबंगला से लेकर अन्य विभागीय स्थानों पर चौकीदारी करना होता है। सूत्रों ने बताया कि हेडक्वार्टर जेई राजीव यादव हैं, उनके घर पर विभाग के राममूरत और अंबिका तैनात हैं। नियमानुसार, दोनों की तैनाती सरकारी आवासों के रखरखाव के लिए है। वेतन भी इसी ड्यूटी की बनती है। हालांकि जेई राजीव यादव ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया। साथ ही कहा कि घर पर किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। वहीं, अधीक्षण अभियंता पीएमजीएसवाई अशोक कुमार श्रीवास्तव के घर श्रीनारायण, रामानंद और प्रहलाद काम करते हैं, जबकि कागजों पर इनकी तैनाती सड़क पर है। इन सबको सड़क के रखरखाव का वेतन मिलता है, लेकिन अफसर के घर पर घरेलू काम करते रहे हैं। इस संबंध में अशोक कुमार श्रीवास्तव से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
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उमाशंकर प्रसाद गोरखपुर में लगभग 12 साल पहले अधीक्षण अभियंता के रूप में तैनात थे। वह रिटायर हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग में तैनात कर्मचारी चुल्हाई की तैनाती पूर्व अधीक्षण अभियंता के घर पर है। उनकी हाजिरी विभाग से बनती है और वेतन उनके खाते में जाता है। इस सूचना की पुष्टि के लिए जब अमर उजाला संवाददाता ने लोक निर्माण विभाग का कर्मचारी बनकर मंगलवार को उमाशंकर से मोबाइल फोन पर बात की तो उन्होंने चुल्हाई की तैनाती स्वीकार की। बोले, एनएच के कुछ कर्मचारियों की तैनाती भी थी, लेकिन वे अब हटा दिए गए। चुल्हाई की तैनाती लंबे समय है। वह बीच में बीमार था। अब भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा है, लेकिन विश्वसनीय है। अभी हटाने की जरूरत नहीं है। मैं, भारती से बात करता हूं। दरअसल, भारती अधिशासी अभियंता हैं। रिटायर अफसर बार-बार भारती से ही बात करने की रट लगाए थे। इस संबंध में एसपी भारती से संपर्क करने की कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
केस-2
छह साल पहले अधीक्षण अभियंता रहे हरिहर प्रसाद रिटायर हो चुके हैं। उनके घर पर लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी अशोक अब भी तैनात हैं। पीडब्लूडी कर्मचारी के रूप में अमर उजाला संवाददाता ने उनसे मंगलवार को मोबाइल फोन पर बातचीत की। हरिहर प्रसाद ने अशोक की तैनाती की बात स्वीकार भी की। हरिहर प्रसाद ने कहा कि छह दिसंबर को घर में शादी है। कम से कम तब तक अशोक को न हटाया जाए तो ठीक रहेगा।
केस-3
निर्माण खंड भवन के अधिशासी अभियंता रामजीत प्रसाद का संतकबीरनगर ट्रांसफर हो गया, लेकिन उन्होंने सरकारी बंगला नहीं छोड़ा। नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ से मिली जानकारी के मुताबिक अधिशासी अभियंता के पिता सरकारी मकान में रहते हैं। इस मकान पर लोक निर्माण विभाग के श्रीकांत, रामजीत सहित तीन कर्मचारी अब भी तैनात हैं। अमर उजाला संवाददाता ने पीडब्लूडी कर्मचारी के रूप में मंगलवार को रामजीत प्रसाद से बात की तो वे उखड़ गए। बोले- अभी एक साल तक बंगला नहीं छोड़ेंगे। जब तक बंगला रहेगा, तब तक कर्मचारी भी तैनात रहेंगे। बंगले में लीगल तरीके से रहते हैं। इसका किराया देते हैं। पहले तो रामजीत प्रसाद ने कर्मचारियों की घर पर तैनाती स्वीकार की। बाद में फोन करके कहा कि किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। बातचीत के ऑडियो उपलब्ध हैं।
हर जेई के अंडर में होते हैं मेठ बेलदार
हर मेठ, बेलदार को कागज में सड़कों पर दिखाया जाता है। वे भले ही किसी साहब के वहां कार्य करते हैं, पर उनकी हाजिरी जेई के पास रखे रजिस्टर में ही होती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार हर जेई के आवास पर दो कर्मचारी होता है। एई के वहां तीन जो काफी रसूख वाला है, वह जितना चाहे रख लेता है। एक्सीईएन जितना चाहे कर्मचारी लगा ले। वैसे पीएमजीएसवाई के अधीक्षण अभियंता के वहां ऐसे तीन कर्मचारी तैनात हैं। पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता के वहां तैनात दो कर्मचारियों को उन्होंने हटा दिया था। चीफ साहब को क्या पूछना है वह तो सर्वेसर्वा हैं।
एसी में बैठने वाले सड़क पर कैसे करेंगे काम
एक कर्मचारी नेता ने कहा कि जो कर्मचारी साहब के वहां एसी कमरे में बैठकर काम करते हैं, वे सड़क पर नहीं खड़े हो पाएंगे। उन्हें साहब, मेम साहब की चाकरी मंजूर पर सड़क पर माटी उठाना मंजूर नहीं है।
जितने भी मेठ बेलदार हैं उनकी तैनाती सड़कों पर है पर कोई सड़क पर कार्य नहीं करता है। सभी इधर उधर घूमते नजर आते हैं। ऐसे लोगों की कोई जरूरत नही है। कार्य न करने वाले को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। - एमपी चौरसिया अधीक्षण अभियंता
(संवाद न्यूज एजेंसी)