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बिना धरोहर ही होगा संग्रहालय का लोकार्पण
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 11 May 2016 08:14 PM IST
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पूर्वाँचल संग्रहालय।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन परिसर में बने पूर्वांचल संग्रहालय का लोकार्पण 14 मई को होना तय है। राज्यसभा सांसद जया बच्चन और लोकसभा सांसद डिंपल यादव के हाथों होने वाले इस लोकार्पण को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है, लेकिन इन सबके बीच लोकार्पण का एक पक्ष यह है कि संग्रहालय की शुरुआत फिलहाल बिना धरोहरों के ही होने जा रही है।
संग्रहालय भवन तो छह महीने पहले से ही बनकर तैयार हो गया, लेकिन जानकारों की मानें तो इस दो मंजिला भवन को देखकर संग्रहालय का अहसास नहीं हो रहा। न तो संग्रहालय में दर्शकों के लिए धरोहरों की गैलरी है और न ही इस उद्देश्य से बनी कोई आलमारी। दरअसल पूर्वांचल की सामाजिक, सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की महत्वाकांक्षा से बना यह संग्रहालय फिलहाल एक बिल्डिंग के अलावा कुछ नहीं।
प्रो. अशोक कुमार बताते हैं कि फिलहाल लोकार्पण करा लेंगे, उसके बाद आगे संग्रहालय को विकसित करने की योजना पर विस्तार से कार्य होगा। बिना धरोहरों के संग्रहालय के लोकार्पण की मजबूरी से जुड़े सवाल का यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।
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उधर, लोकार्पण की तैयारियों को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बुधवार को बैठक की, जिसमें मोहन सिंह की पुत्री राज्यसभा सदस्य कनकलता भी मौजूद रहीं। इसमें तय हुआ कि दोनों सांसद पहले संग्रहालय का लोकार्पण करेंगी उसके बाद का आयोजन दीक्षा भवन में होगा। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच सांसदों का संबोधन होगा।
संजोई जाएंगी मोहन सिंह की स्मृतियां
संग्रहालय मोहन सिंह की सांसद निधि से बना है और अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनसे जुड़े सामानों को संग्रहालय में संजोने का फैसला किया है। मोहन सिंह की पुत्री कनक लता सिंह ने पिता से जुड़े सामानों को उपलब्ध कराने का भरोसा यूनिवर्सिटी को दिया है।
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संग्रहालय भवन तो छह महीने पहले से ही बनकर तैयार हो गया, लेकिन जानकारों की मानें तो इस दो मंजिला भवन को देखकर संग्रहालय का अहसास नहीं हो रहा। न तो संग्रहालय में दर्शकों के लिए धरोहरों की गैलरी है और न ही इस उद्देश्य से बनी कोई आलमारी। दरअसल पूर्वांचल की सामाजिक, सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की महत्वाकांक्षा से बना यह संग्रहालय फिलहाल एक बिल्डिंग के अलावा कुछ नहीं।
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प्रो. अशोक कुमार बताते हैं कि फिलहाल लोकार्पण करा लेंगे, उसके बाद आगे संग्रहालय को विकसित करने की योजना पर विस्तार से कार्य होगा। बिना धरोहरों के संग्रहालय के लोकार्पण की मजबूरी से जुड़े सवाल का यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।
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उधर, लोकार्पण की तैयारियों को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बुधवार को बैठक की, जिसमें मोहन सिंह की पुत्री राज्यसभा सदस्य कनकलता भी मौजूद रहीं। इसमें तय हुआ कि दोनों सांसद पहले संग्रहालय का लोकार्पण करेंगी उसके बाद का आयोजन दीक्षा भवन में होगा। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच सांसदों का संबोधन होगा।
संजोई जाएंगी मोहन सिंह की स्मृतियां
संग्रहालय मोहन सिंह की सांसद निधि से बना है और अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनसे जुड़े सामानों को संग्रहालय में संजोने का फैसला किया है। मोहन सिंह की पुत्री कनक लता सिंह ने पिता से जुड़े सामानों को उपलब्ध कराने का भरोसा यूनिवर्सिटी को दिया है।