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सलाखों के पीछे भी पाकीजगी की कोशिश

Sun, 12 Jun 2016 12:45 AM IST
डॉ. राकेश राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
डॉ. राकेश राय, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sun, 12 Jun 2016 12:45 AM IST
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prissioners have fast on ramzan in jail
रमजान - फोटो : rajesh kumar
मंडलीय जेल का माहौल इन दिनों आम दिनों से इतर है। शहर के अन्य जगहों की तरह यहां भी सहरी और इफ्तार की व्यवस्था है। साथ ही तरावीह की नमाज का मुकम्मल इंतजाम भी। कुरान शरीफ की तिलावत में भी कोई कोर-कसर छोड़ी नहीं जा रही। दरअसल कानून की लड़ाई हारकर जेल पहुंचे 125 कैदी रमजान के इस पाक महीने में रोजा रखकर रब से गुनाहों की माफी मांग रहे हैं। ऐसे रोजेदारों का जेल प्रशासन सिर्फ साथ ही नहीं दे रहा बल्कि तमाम सुविधाएं भी मुहैया करा रहा है।
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खास बात यह है इस इबादत में गंगा-जमुनी तहजीब भी बखूबी कायम है। मुस्लिम कैदियों के अलावा कुछ हिंदू कैदी भी रोजा रख रहे हैं। मन, विक्की, विशाल, विजय, रामप्रीत और अरविंद नाम के ये छह कैदी इसकी बानगी हैं। महिला कैदी भी रोजा रखने और इबादत करने में पीछे नहीं हैं। आठ महिला रमजान महीने की शुरुआत से अपने बैरक में रोजा की सारी मान्यताओं को पूरा कर रही हैं। कैदियों की सहरी ओर इफ्तारी में किसी तरह की कोई मुश्किल न आए, इसे लेकर जेल प्रशासन भी मुस्तैद है।

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जेल की ओर से इसके लिए फल, बिस्किट, पाव, चना, चीनी, दूध, नींबू, समेत कई सामानों को खासतौर मुहैया कराया जा रहा है। रोजेदारों के खाने का अलग से इंतजाम किया गया है। जेल की ओर से राशन उपलब्ध करा दिया जा रहा है, लेकिन उसे बनाने की जिम्मेदारी रोजेदारों को ही सौंपी गई है। इसकी वजह सहरी और इफ्तार के समय का अन्य कैदियों के खाने के समय से मेल न खाना बताया जा रहा है। हालांकि कुरान शरीफ की तिलावत रोजेदार अपने-अपने बैरक में ही कर रहे हैं। जिस बैरक में रोजदारों की तादाद ज्यादा है, वहां उन्हें साथ मिलकर तिलावत करने मौका मिल जा रहा है। जुमे की नमाज पढ़ाने के लिए खासतौर पर बाहर से इमाम बुलाया जा रहा है। 

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जेल में रोजेदारों को इबादत में किसी किस्म की कोई तकलीफ न हो, इसका पूरा इंतजाम किया गया है। इसे लेकर जेल में तैनात सभी बंदीरक्षकों की जिम्मेदारी तय कर दी है साथ ही इंतजाम में सहयोग के लिए भी कहा गया है। 

- एसके शर्मा, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, मंडलीय जेल

आगे आएं स्वयंसेवी संस्थाएं
जेल विजिटर आदिल अमीन के मुताबिक जेल प्रशासन ने तो रोजेदारों की सहूलियत की पूरा ध्यान रख रहा है, लेकिन इफ्तार और सहरी को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं का आगे न आना निराशाजनक है। आदिल अमीन ने ऐसी सभी संस्थाओं से अपील की है कि वे शहर के आम रोजेदारों के इफ्तार के लिए आगे आने के साथ-साथ कैदी रोजेदारों को भी न भूलें। 

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