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40 बेड का होगा इंसेफेलाइटिस का इमरजेंसी वार्ड

Wed, 17 Jul 2019 01:36 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2019 01:36 AM IST
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principal secretry in brd medical college
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अधिकारियों के साथ बैठक करते प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे ।
40 बेड का होगा इंसेफेलाइटिस का इमरजेंसी वार्ड
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गोरखपुर। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे ने मंगलवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अधिकारियों के साथ बैठक कर स्वास्थ्य योजनाओं में प्रगति की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने कई वार्डों का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होेंने इंसेफेलाइटिस वार्ड में 10 बेड के इमरजेंसी वार्ड को एक सप्ताह में बढ़ाकर 40 बेड का करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल में सुबह लगभग 10:30 बजे समीक्षा बैठक शुरू हुई। प्रमुख सचिव ने सबसे पहले आरएमआरसी से इंसेफ्लाइटिस मरीजों की जांच, उपलब्ध किट तथा व्यवस्था के बारे में पूछताछ की। कहा कि इंसेफेलाइटिस के रोकथाम और बेहतर इलाज के लिए हर संभव प्रयास सुनिश्चित कराएं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में कार्य कर रहीं सभी कार्यदायी संस्थाओं उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम, सीएनडीएस, नगर निगम, आवास विकास आदि के अधिकारियों से गुणवत्ता का ध्यान रखने और समयावधि में निर्माण कार्य पूरा करने को कहा। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी विभागों के अध्यक्षों से परेशानियों के बारे में जानकारी ली।
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इसके बाद प्रमुख सचिव ने इंसेफेलाइटिस वार्ड के पीआईसीयू, एनआईसीयू और पीआईसीयू के इमरजेंसी वार्डों व जनरल वार्डों का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान इंसेफेलाइटिस वार्ड में बने नए 10 बेड के इमरजेंसी वार्ड को बढ़ाकर एक सप्ताह के भीतर 40 बेड का करने के निर्देश दिए। उन्होंने 32 कमरों के प्राइवेट वार्ड को ध्वस्त कर वार्ड नंबर एक के पीछे तीन मंजिला प्राइवेट वार्ड बनाने का प्रस्ताव देने को कहा। इस दौरान डीएम के विजयेंद्र पांडियन, डीजीएमई डॉ. केके गुप्ता, प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार, केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जन डॉ. एके सिंह के अलावा सभी विभागों के विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।
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‘प्रतिमाह आयुष्मान भारत में करें 400 मरीजों का इलाज’
गोरखपुर। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे ने मेडिकल कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि अभी तक आयुष्मान भारत योजना में 1100 मरीजों का इलाज हो चुका है। डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि प्रतिमाह 400 मरीजों का इस योजना के अंतर्गत इलाज सुनिश्चित कराएं।
उन्होंने कहा कि शासन की टीम ने समीक्षा कर इंसेफेलाइटिस और आईसीएमआर में सात अलग-अलग तरीकों से डायग्नोज करने का प्लान तैयार किया है। बताया कि अभी प्रदेश में ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी डॉक्टरों की कमी है, ऐसे में 500 बेड के बाल रोग सेवा संस्थान में सभी विभागों को तुरंत चलाना संभव नहीं है। इसमें सुपरस्पेशिलिटी अभी काम नहीं कर रही, लेकिन ओपीडी शुरू है। अगले एक माह में न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, नेफ्र ालॉजी, यूरोलॉजी, कार्डियालॉजी, डायलीसिस, विभागों में एक ओटी, तीन वार्ड व एक आईसीयू को शुरू कराने की व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा इंसेफेलाइटिस वार्ड में उपकरणों की संख्या बढ़ा दी गई है। औषधियों का इंतजाम भी कर लिया गया है। एमबीबीएस की सीटें 100 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है।

अंदर चल रही थी समीक्षा बैठक, बाहर हंगामा
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज में एक तरफ प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे प्रशासनिक भवन में अधिकारियों संग समीक्षा बैठक कर रहे थे, कि इसी दौरान न्यूरो की बीमारी का इलाज कराने आए मरीज और तीमारदार प्राचार्य कक्ष के बाहर हंगामा करने लगे। वे डॉक्टर के कक्ष में नहीं होने से आक्रोशित थे। तीमारदारों और मरीजों ने कहा कि सुबह से ही इंतजार कर रहे हैं, घंटों बैठने के बाद भी डॉक्टर अपने कक्ष में मौजूद नहीं हैं। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि सभी डॉक्टर समीक्षा बैठक में गए हुए हैं। इसके बाद मरीज और तीमारदार प्रिंसिपल ऑफि स पहुंचकर हंगामा करने लगे। वहां मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह समझा बुझाकर उन्हें वापस भेजा।
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