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प्रदूषण का असर : गीडा में निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध
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प्रदूषण का असर : गीडा में निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध
गोरखपुर। दिवाली के बाद प्रदूषण से गोरक्षनगरी का वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए गीडा ने अपने क्षेत्राधिकार में सभी निर्माण कार्य और इमारती तोड़फोड़ पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिला प्रशासन ने भी पराली जलाए जाने से रोकने की कवायद शुरू कर दी है।
गीडा के मुख्य कार्यपालक संजीव रंजन के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या बेहद खराब स्तर पर पहुुंच गई है। वर्तमान में जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से अधिक पहुंच गया है। इसका अर्थ है कि वायु में प्रदूषक पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 10 और (पीएम) 2.5 की मात्रा 400 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर के खतरनाक स्तर तक घुली हैं। वायु में इस हद तक घुले प्रदूषक मनुष्य के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करते हैं। प्रदूषक पीएम 10 मुख्य रूप से निर्माण एवं ध्वस्तीकरण के दौरान उठने वाले धूल कण होते हैं।
पीएम 2.5 के मुख्य कारण कचरा जलने से उठने वाला धुआं या वाहनों से निकलने वाले डीजल, पेट्रोल के धुआं है। इन प्रदूषकों पर काबू पाने के लिए गीडा सीईओ संजीव रंजन ने शहर में किसी भी तरह के निर्माण और ध्वस्तीकरण पर प्रतिबंध की घोषणा की है। गीडा के क्षेत्राधिकार में निर्माणाधीन सड़कों के ऐसे कार्य जिनमें धूल कण उड़ते हैं वहां पर पानी का छिड़काव कराने का ओदश जारी किया है।
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जिला स्तरीय कमेटी निगरानी कर पराली जलाने पर लगाएगी अंकुश
खरीफ मौसम में फसल अवशेष यानी पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सेल का गठन किया गया है। टीम में सभी एसडीएम और तहसीलदार सदस्य हैं। तहसील स्तर पर सचल दल और उड़न दस्ते बनाए गए हैं। इन दस्तों में तहसीलदार, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी शामिल किए गए हैं। यह अधिकारी और उड़न दस्ते अपने क्षेत्र में पराली जलाने संबंधी दैनिक सूचना जिला अधिकारी को भेजेंगे। जिला स्तरीय सेल की प्रथम बैठक बृहस्पतिवार को होगी।
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गोरखपुर। दिवाली के बाद प्रदूषण से गोरक्षनगरी का वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए गीडा ने अपने क्षेत्राधिकार में सभी निर्माण कार्य और इमारती तोड़फोड़ पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिला प्रशासन ने भी पराली जलाए जाने से रोकने की कवायद शुरू कर दी है।
गीडा के मुख्य कार्यपालक संजीव रंजन के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या बेहद खराब स्तर पर पहुुंच गई है। वर्तमान में जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से अधिक पहुंच गया है। इसका अर्थ है कि वायु में प्रदूषक पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 10 और (पीएम) 2.5 की मात्रा 400 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर के खतरनाक स्तर तक घुली हैं। वायु में इस हद तक घुले प्रदूषक मनुष्य के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करते हैं। प्रदूषक पीएम 10 मुख्य रूप से निर्माण एवं ध्वस्तीकरण के दौरान उठने वाले धूल कण होते हैं।
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पीएम 2.5 के मुख्य कारण कचरा जलने से उठने वाला धुआं या वाहनों से निकलने वाले डीजल, पेट्रोल के धुआं है। इन प्रदूषकों पर काबू पाने के लिए गीडा सीईओ संजीव रंजन ने शहर में किसी भी तरह के निर्माण और ध्वस्तीकरण पर प्रतिबंध की घोषणा की है। गीडा के क्षेत्राधिकार में निर्माणाधीन सड़कों के ऐसे कार्य जिनमें धूल कण उड़ते हैं वहां पर पानी का छिड़काव कराने का ओदश जारी किया है।
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जिला स्तरीय कमेटी निगरानी कर पराली जलाने पर लगाएगी अंकुश
खरीफ मौसम में फसल अवशेष यानी पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सेल का गठन किया गया है। टीम में सभी एसडीएम और तहसीलदार सदस्य हैं। तहसील स्तर पर सचल दल और उड़न दस्ते बनाए गए हैं। इन दस्तों में तहसीलदार, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी शामिल किए गए हैं। यह अधिकारी और उड़न दस्ते अपने क्षेत्र में पराली जलाने संबंधी दैनिक सूचना जिला अधिकारी को भेजेंगे। जिला स्तरीय सेल की प्रथम बैठक बृहस्पतिवार को होगी।