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अब भी शहर के आबोहवा में फैला है प्रदूषण, एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर
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अब भी शहर के आबोहवा में फैला है प्रदूषण, एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर
गोरखपुर। पटाखों का शोर और उससे निकलने वाला धुआं कब का थम चुका है। अयोध्या मामले में फैसले के बाद से शहर में शहर में गाड़ियों की आवाजाही भी कम रही। इसके बावजूद गोरखपुर की आबोहवा काफी प्रदूषित है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अब भी अस्वास्थ्यकर बना हुआ है। दरअसल यह गोरखपुर के आसपास ईंट भट्टों और शहर में हो रहे निर्माण की वजह से है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा की गुणवत्ता बताने का पैमाना है। इसके तहत हवा में पीएम 10, पीएम 2.5, कार्बन डाई आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, मिथेन आदि की मात्रा मिलाकर प्रति घन मीटर में मापा जाता है। 100 एक्यूआई तक हवा की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है। इससे ज्यादा होने पर यह स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशील लोगों, अस्थमा के मरीजों, छोटे बच्चों के लिए नुकसानदायक मानी जाती है। रविवार को गोरखपुर की हवा की गुणवत्ता इस स्तर से ज्यादा दर्ज की गई।
गोरखपुर से सटे इलाकों गुलरिहा, भटहट, जगदीशपुर, करजहां, जगदीशपुर आदि इलाकों में काफी ईंट भट्ठे हैं। इससे निकलने वाले धुएं से वातावरण में पीएम-10 और पीएम-2.5 के अलावा कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा शहर में जो भी निर्माण होते हैं, उनमें मानकों का ध्यान नहीं रखा जाता है। निर्माण सामग्रियों को ढंका नहीं जा रहा है।
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कैलाश पांडेय, मौसम विशेषज्ञ
कुछ यूं रहा गोरखपुर एवं आसपास का एयर क्वालिटी इंडेक्स
इलाका एक्यूआई
गोरखपुर- 153
खलीलाबाद- 152
देवरिया- 158
पडरौना- 153
सिद्धार्थनगर- 151
एयर क्वालिटी इंडेक्स का मानक
एक्यूआई स्थिति रंग
0- 50 अच्छा हरा
51-100 संतोषजनक पीला
101-150 अस्वास्थ्यकर नारंगी
(संवेदनशील लोगों के लिए)
151-200 अस्वास्थ्यकर लाल
201-300 अति अस्वास्थ्यकर बैंगनी
301-500 खतरनाक गहरा लाल (मैरून)
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गोरखपुर। पटाखों का शोर और उससे निकलने वाला धुआं कब का थम चुका है। अयोध्या मामले में फैसले के बाद से शहर में शहर में गाड़ियों की आवाजाही भी कम रही। इसके बावजूद गोरखपुर की आबोहवा काफी प्रदूषित है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अब भी अस्वास्थ्यकर बना हुआ है। दरअसल यह गोरखपुर के आसपास ईंट भट्टों और शहर में हो रहे निर्माण की वजह से है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा की गुणवत्ता बताने का पैमाना है। इसके तहत हवा में पीएम 10, पीएम 2.5, कार्बन डाई आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, मिथेन आदि की मात्रा मिलाकर प्रति घन मीटर में मापा जाता है। 100 एक्यूआई तक हवा की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है। इससे ज्यादा होने पर यह स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशील लोगों, अस्थमा के मरीजों, छोटे बच्चों के लिए नुकसानदायक मानी जाती है। रविवार को गोरखपुर की हवा की गुणवत्ता इस स्तर से ज्यादा दर्ज की गई।
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गोरखपुर से सटे इलाकों गुलरिहा, भटहट, जगदीशपुर, करजहां, जगदीशपुर आदि इलाकों में काफी ईंट भट्ठे हैं। इससे निकलने वाले धुएं से वातावरण में पीएम-10 और पीएम-2.5 के अलावा कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा शहर में जो भी निर्माण होते हैं, उनमें मानकों का ध्यान नहीं रखा जाता है। निर्माण सामग्रियों को ढंका नहीं जा रहा है।
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कैलाश पांडेय, मौसम विशेषज्ञ
कुछ यूं रहा गोरखपुर एवं आसपास का एयर क्वालिटी इंडेक्स
इलाका एक्यूआई
गोरखपुर- 153
खलीलाबाद- 152
देवरिया- 158
पडरौना- 153
सिद्धार्थनगर- 151
एयर क्वालिटी इंडेक्स का मानक
एक्यूआई स्थिति रंग
0- 50 अच्छा हरा
51-100 संतोषजनक पीला
101-150 अस्वास्थ्यकर नारंगी
(संवेदनशील लोगों के लिए)
151-200 अस्वास्थ्यकर लाल
201-300 अति अस्वास्थ्यकर बैंगनी
301-500 खतरनाक गहरा लाल (मैरून)