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चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की किस्मत संवारेंगे लक्ष्मी शंकर शुक्ला!
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 27 May 2016 03:26 PM IST
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चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार
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गोरखपुर जिले में आने वाले चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से लक्ष्मी शंकर शुक्ल भाजपा प्रत्याशी के तौर पर किस्मत आजमाने जा रहे हैं। जानिए उनके प्रोफाइल के बारे में।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में गोरखपुर का सदैव एक अलग स्थान रहा हैं। इस जिले ने उत्तर प्रदेश को वीर बहादुर सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री), महावीर प्रसाद और योगी आदित्यनाथ जैसै कई बड़े नेता दिए हैं। गोरखपुर के राजनीति की सबसे खास बात यह है कि यह राजनीतिक बदलावों के लिए हमेशा तैयार रहता है। यहां कोई भी राजनेता अपने जीत को लेकर पुरी तरह से दावा नहीं कर सकता है।
ऐसे ही राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा है गोरखपुर का चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र। इस बार क्षेत्र से बदलाव का चेहरा बनने की दावेदारी कर रहें हैं लक्ष्मी शंकर गोरखपुर की नौ विधानसभाओं में से एक चिल्लूपार विधानसभा हमेशा से राजनीति का केन्द्र रहा है। कई दिग्गज नेता यहां से विधायक रहे हैं।
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लेकिन कोई भी नेता अभी तक जनता की अंकाक्षाओं व उम्मीदों पर पुरी तरह से खरा नहीं उतर पाया है। एक अच्छे नेता की इस क्षेत्र को अभी भी दरकरार है, जो जनता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहें, विकास करें और उनसे किए गए वादों को पुरा करें। ऐसे में लक्ष्मी शंकर शुक्ला, जनता के सामने इस बार ऐसी ही उम्मीदों के साथ आए हैं। जनता से किए गए वादों को पुरा करना ही इनकी प्राथमिकता है।
ट्रांस ओशियन कंपनी के प्रबंध निदेशक 45 वर्षीय, लक्ष्मी शंकर शुक्ला, इस बार चिल्लूपार विधानसभा से विधायक पद के लिए उम्मीदवारी पेश कर रहें हैं। साफ सुथरी छवि वाले लक्ष्मी शंकर शुक्ला, मैरिन इंजीनियरिंग में परास्नातक हैं। काफी सालों तक नौकरी करने के बाद इन्होंने भाजपा के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरूवात की है। जनता की सेवा के लिए ये हमेशा तत्पर रहते है।
उत्तराखंड हादसे के दौरान इन्होंने डाक्टरों की एक टीम पीड़ितों के मदद के लिए भेजी थी। अपने क्षेत्र में ये नियमित अंतराल पे मुफ्त नेत्र शिविर लगवाते रहते हैं। किसान अधिकारों को लेकर ये काफी मुखर रहें हैं। क्षेत्र की बिजली समस्या को लेकर इन्होंने आंदोलन भी छेड़ रखा है। इनके इन्हीं कार्यों को देखते हुए 2014 में इन्हें सरयू रत्न पुरूस्कार से नवाजा।
भाजपा सदस्यता अभियान के दौरान इन्होंने 15000 लोगों को भाजपा पार्टी की सदस्यता दिलाई, जो क्षेत्र में इनकी लोकप्रियता को दर्शाता है। लेकिन अंतिम फैसला तो जनता को करना है। आपको क्या लगता है, क्या इस बार चिल्लूपार में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में गोरखपुर का सदैव एक अलग स्थान रहा हैं। इस जिले ने उत्तर प्रदेश को वीर बहादुर सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री), महावीर प्रसाद और योगी आदित्यनाथ जैसै कई बड़े नेता दिए हैं। गोरखपुर के राजनीति की सबसे खास बात यह है कि यह राजनीतिक बदलावों के लिए हमेशा तैयार रहता है। यहां कोई भी राजनेता अपने जीत को लेकर पुरी तरह से दावा नहीं कर सकता है।
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ऐसे ही राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा है गोरखपुर का चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र। इस बार क्षेत्र से बदलाव का चेहरा बनने की दावेदारी कर रहें हैं लक्ष्मी शंकर गोरखपुर की नौ विधानसभाओं में से एक चिल्लूपार विधानसभा हमेशा से राजनीति का केन्द्र रहा है। कई दिग्गज नेता यहां से विधायक रहे हैं।
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लेकिन कोई भी नेता अभी तक जनता की अंकाक्षाओं व उम्मीदों पर पुरी तरह से खरा नहीं उतर पाया है। एक अच्छे नेता की इस क्षेत्र को अभी भी दरकरार है, जो जनता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहें, विकास करें और उनसे किए गए वादों को पुरा करें। ऐसे में लक्ष्मी शंकर शुक्ला, जनता के सामने इस बार ऐसी ही उम्मीदों के साथ आए हैं। जनता से किए गए वादों को पुरा करना ही इनकी प्राथमिकता है।
ट्रांस ओशियन कंपनी के प्रबंध निदेशक 45 वर्षीय, लक्ष्मी शंकर शुक्ला, इस बार चिल्लूपार विधानसभा से विधायक पद के लिए उम्मीदवारी पेश कर रहें हैं। साफ सुथरी छवि वाले लक्ष्मी शंकर शुक्ला, मैरिन इंजीनियरिंग में परास्नातक हैं। काफी सालों तक नौकरी करने के बाद इन्होंने भाजपा के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरूवात की है। जनता की सेवा के लिए ये हमेशा तत्पर रहते है।
उत्तराखंड हादसे के दौरान इन्होंने डाक्टरों की एक टीम पीड़ितों के मदद के लिए भेजी थी। अपने क्षेत्र में ये नियमित अंतराल पे मुफ्त नेत्र शिविर लगवाते रहते हैं। किसान अधिकारों को लेकर ये काफी मुखर रहें हैं। क्षेत्र की बिजली समस्या को लेकर इन्होंने आंदोलन भी छेड़ रखा है। इनके इन्हीं कार्यों को देखते हुए 2014 में इन्हें सरयू रत्न पुरूस्कार से नवाजा।
भाजपा सदस्यता अभियान के दौरान इन्होंने 15000 लोगों को भाजपा पार्टी की सदस्यता दिलाई, जो क्षेत्र में इनकी लोकप्रियता को दर्शाता है। लेकिन अंतिम फैसला तो जनता को करना है। आपको क्या लगता है, क्या इस बार चिल्लूपार में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?