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जिनके जिम्मे सबकी सुरक्षा उन्हें सुविधा के लाले
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पुलिस लाइंस का जर्जर मकान।
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जिनके जिम्मे सबकी सुरक्षा उन्हें सुविधा के लाले
विष्णु त्रिपाठी
गोरखपुर। पुलिस का व्यवहार और जिम्मेदारी समझाने की कोशिशें तो तमाम होती हैं मगर उनकी बदहाली की तरफ ध्यान देने वाला कोई नहीं। पुलिस लाइंस में बने सरकारी आवासों में पुलिस वालों के परिवार बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। आलम यह है कि छत से प्लास्टर टूटकर कब ऊपर गिर जाए यह मालूम नहीं। दीवार के प्लास्टर उखड़ चुके है। शौचालय के दरवाजे जैसे तैसे खड़े हैं। वायरिंग देख ले तो कोई अंजान आदमी तुरंत घर से बाहर आ जाए।
इस हालत में रहने वाले पुलिस वालों से उम्मीद की जाती है कि वे सुविधा मांगे बिना जिम्मेदारी निभाते जाएं। अफसर पूरी स्थिति से वाकिफ हैं। प्रस्ताव तैयार कर समय समय पर शासन में भेजते भी हैं लेकिन ना तो धन आता है और ना ही इनकी बदहाली दूर हो पा रही है। परिवार की सुरक्षा की खातिर पुलिसकर्मी पैरवी कर पुलिस लाइंस में मकान तो ले लेते हैं लेकिन घर में जाने के बाद पता चलता है कि जर्जर दीवार में एक कील भी नहीं लगा सकते है। कुछ नए भवन भी बने हैं लेकिन उनमें सिर्फ बिना परिवार वाले ही सिपाही रहते है।
जेल के मकान भी बदहाल
जेल में बंदियों की निगरानी करने वाले बंदी रक्षकों के आवास भी बदहाल हैं। नाम ना छापने के शर्त पर बंदी रक्षकों ने बताया कि मकानों की मरम्मत के लिए जो धन पिछले साल आया तो उसे अफसरों ने अपने बंगलों की की मरम्मत में लगा लिया।
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पुलिस लाइंस में रहते हैं करीब पांच सौ परिवार
पुलिस लाइंस के इन जर्जर मकानों में करीब पांच सौ पुलिसकर्मी और उनके परिजन रहते हैं। वहीं जेल कैंपस के मकानों में करीब सौ से अधिक बंदीरक्षक व उनके परिजन रहते हैं।
चारों तरफ है गंदगी का अंबार
चाहे वह पुलिस लाइंस हो या जेल कैं पस में बंदीरक्षकों के आवास। हर जगह गंदगी का अंबार है। नालियों की भी व्यवस्था ठीक नहीं है। घरों के आसपास झाड़ियां हैं। यहां सफाई केवल दीपावली-दशहरा के मौके पर ही होती है।
..
वर्जन
बंदी रक्षकों के मकान जर्जर हो चुके हैं। इसके मरम्मत के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। अनुमति मिलने के बाद जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा।- डॉ रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
पुलिस लाइंस में रहने वाले पुुलिस वालों के जर्जर मकान की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही इसको ठीक करा दिया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी पुलिसकर्मी को कोई दिक्कत न हो।- बोत्रे रोहन प्रमोद, सीओ लाइंस
हो चुके है हादसे
18 सितंबर 2017 : पुलिस लाइंस में हेड कांस्टेबल जनरैल सिंह के मकान का छज्जा गिर गया। घर के एक सदस्य को हल्की चोट भी आई थी।
21 जुलाई 2017 : पुलिस लाइंस में सिपाही राजनाथ के मकान का छज्जा गिर गया। परिवार के लोग बाल-बाल बच गए थे लेकिन बाइक क्षतिग्रस्त हो गई थी।
2018 : पुलिस लाइंस में आईजी के पीआरओ रहे नागेश्वर सिंह के मकान का छज्जा गिर गया था।
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विष्णु त्रिपाठी
गोरखपुर। पुलिस का व्यवहार और जिम्मेदारी समझाने की कोशिशें तो तमाम होती हैं मगर उनकी बदहाली की तरफ ध्यान देने वाला कोई नहीं। पुलिस लाइंस में बने सरकारी आवासों में पुलिस वालों के परिवार बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। आलम यह है कि छत से प्लास्टर टूटकर कब ऊपर गिर जाए यह मालूम नहीं। दीवार के प्लास्टर उखड़ चुके है। शौचालय के दरवाजे जैसे तैसे खड़े हैं। वायरिंग देख ले तो कोई अंजान आदमी तुरंत घर से बाहर आ जाए।
इस हालत में रहने वाले पुलिस वालों से उम्मीद की जाती है कि वे सुविधा मांगे बिना जिम्मेदारी निभाते जाएं। अफसर पूरी स्थिति से वाकिफ हैं। प्रस्ताव तैयार कर समय समय पर शासन में भेजते भी हैं लेकिन ना तो धन आता है और ना ही इनकी बदहाली दूर हो पा रही है। परिवार की सुरक्षा की खातिर पुलिसकर्मी पैरवी कर पुलिस लाइंस में मकान तो ले लेते हैं लेकिन घर में जाने के बाद पता चलता है कि जर्जर दीवार में एक कील भी नहीं लगा सकते है। कुछ नए भवन भी बने हैं लेकिन उनमें सिर्फ बिना परिवार वाले ही सिपाही रहते है।
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जेल के मकान भी बदहाल
जेल में बंदियों की निगरानी करने वाले बंदी रक्षकों के आवास भी बदहाल हैं। नाम ना छापने के शर्त पर बंदी रक्षकों ने बताया कि मकानों की मरम्मत के लिए जो धन पिछले साल आया तो उसे अफसरों ने अपने बंगलों की की मरम्मत में लगा लिया।
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पुलिस लाइंस में रहते हैं करीब पांच सौ परिवार
पुलिस लाइंस के इन जर्जर मकानों में करीब पांच सौ पुलिसकर्मी और उनके परिजन रहते हैं। वहीं जेल कैंपस के मकानों में करीब सौ से अधिक बंदीरक्षक व उनके परिजन रहते हैं।
चारों तरफ है गंदगी का अंबार
चाहे वह पुलिस लाइंस हो या जेल कैं पस में बंदीरक्षकों के आवास। हर जगह गंदगी का अंबार है। नालियों की भी व्यवस्था ठीक नहीं है। घरों के आसपास झाड़ियां हैं। यहां सफाई केवल दीपावली-दशहरा के मौके पर ही होती है।
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वर्जन
बंदी रक्षकों के मकान जर्जर हो चुके हैं। इसके मरम्मत के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। अनुमति मिलने के बाद जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा।- डॉ रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
पुलिस लाइंस में रहने वाले पुुलिस वालों के जर्जर मकान की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही इसको ठीक करा दिया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी पुलिसकर्मी को कोई दिक्कत न हो।- बोत्रे रोहन प्रमोद, सीओ लाइंस
हो चुके है हादसे
18 सितंबर 2017 : पुलिस लाइंस में हेड कांस्टेबल जनरैल सिंह के मकान का छज्जा गिर गया। घर के एक सदस्य को हल्की चोट भी आई थी।
21 जुलाई 2017 : पुलिस लाइंस में सिपाही राजनाथ के मकान का छज्जा गिर गया। परिवार के लोग बाल-बाल बच गए थे लेकिन बाइक क्षतिग्रस्त हो गई थी।
2018 : पुलिस लाइंस में आईजी के पीआरओ रहे नागेश्वर सिंह के मकान का छज्जा गिर गया था।