{"_id":"5706b8924f1c1b7d26c8149e","slug":"pm-call-confrance-for-gorakhpur-aiims","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर में एम्स के बारे में कल प्रधानमंत्री ने बुलाई है बैठक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर में एम्स के बारे में कल प्रधानमंत्री ने बुलाई है बैठक
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 08 Apr 2016 01:14 AM IST
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pm modi
- फोटो : pti
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एम्स को लेकर तमाम राजनीतिक दलों के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक बड़ी राहत देने वाली खबर है। गोरखपुर में एम्स की स्थापना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौ अप्रैल को बैठक बुलाई है।
इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से उप्र शासन के मार्फत पूर्व में एम्स के लिए चयनित बंद पड़ी धुरियापार चीनी मिल की जमीन से जुड़ी पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। खुद पीएमओ में तैनात अफसरों ने छह अप्रैल को डीएम ओएन सिंह से मामले में बात कर पीएम की बैठक के पहले रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
पीएम के दखल और शासन के निर्देशों के बाद आनन-फानन में जिला प्रशासन ने एसडीएम गोला नलिनी कांत सिंह की निगरानी में कानूनगो और लेखपाल की टीम से दोबारा धुरियापार चीनी मिल की जमीन का सर्वे कराया। दो दिनों तक चले इस सर्वे के बाद एसडीएम ने बृहस्पतिवार को रिपोर्ट डीएम को भेज दी। इसे देर शाम शासन को भी भेज दिया गया।
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मिल के नाम करीब 237 एकड़ जमीन है जबकि एम्स के लिए 200 एकड़ जमीन की जरूरत है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है।
बता दें कि एम्स के लिए पूर्व में सदर तहसील के खुटहन, चौरीचौरा के सरदारनगर और गोला तहसील में करीब एक दशक से बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। जमीन तय करने के लिए गठित कमेटी ने खुटहन की जमीन को सबसे उपयुक्त बताया था मगर कोई कार्रवाई आगे बढ़ती तभी इस जमीन के कुछ हिस्से को अपना बताते हुए कुछ काश्तकारों ने दावा ठोक दिया। हालांकि चकबंदी प्रक्रिया में उनके दावे को खारिज कर पूरी जमीन वन विभाग के नाम कर दी गई।
इसके बाद काश्तकार हाईकोर्ट चले गए और कोर्ट ने इस मामले में फैसला अभी सुरक्षित रखा है। उधर, विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे मुद्दा बना लिया और एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठानी शुरू कर दी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मामला तूल पकड़ता देख अब पीएम ने खुद दखल दी है और जमीन के दूसरे विकल्पों से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तलब की है।
गोरखपुर समेत देश के दूसरी जगहों पर एम्स की स्थापना के संबंध में प्रधानमंत्री ने नौ अप्रैल को बैठक बुलाई है। शासन के निर्देशों के मद्देनजर विकल्प के तौर पर संबंधित जमीन का सर्वे कराकर रिपोर्ट भेज दी गई।
- ओएन सिंह, डीएम
इसलिए विकल्प बन सकती है मिल की जमीन
0 मिल की 237 एकड़ की जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं
0 जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर की ही दूरी
0 पहले से बिजली पॉवर स्टेशन मौजूद, पानी की भी माकूल व्यवस्था
0 12 किलोमीटर के दायरे में गोरखपुर-वाराणसी एनएच 29 को फोरलेन की मिल चुकी है मंजूरी
0 100 किलोमीटर के दायरे में महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, फै जाबाद, मऊ, आजमगढ़, अंबेडकर नगर आदि जिलों के अलावा बिहार बॉर्डर के भी इलाके
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इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से उप्र शासन के मार्फत पूर्व में एम्स के लिए चयनित बंद पड़ी धुरियापार चीनी मिल की जमीन से जुड़ी पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। खुद पीएमओ में तैनात अफसरों ने छह अप्रैल को डीएम ओएन सिंह से मामले में बात कर पीएम की बैठक के पहले रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
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पीएम के दखल और शासन के निर्देशों के बाद आनन-फानन में जिला प्रशासन ने एसडीएम गोला नलिनी कांत सिंह की निगरानी में कानूनगो और लेखपाल की टीम से दोबारा धुरियापार चीनी मिल की जमीन का सर्वे कराया। दो दिनों तक चले इस सर्वे के बाद एसडीएम ने बृहस्पतिवार को रिपोर्ट डीएम को भेज दी। इसे देर शाम शासन को भी भेज दिया गया।
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मिल के नाम करीब 237 एकड़ जमीन है जबकि एम्स के लिए 200 एकड़ जमीन की जरूरत है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है।
बता दें कि एम्स के लिए पूर्व में सदर तहसील के खुटहन, चौरीचौरा के सरदारनगर और गोला तहसील में करीब एक दशक से बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। जमीन तय करने के लिए गठित कमेटी ने खुटहन की जमीन को सबसे उपयुक्त बताया था मगर कोई कार्रवाई आगे बढ़ती तभी इस जमीन के कुछ हिस्से को अपना बताते हुए कुछ काश्तकारों ने दावा ठोक दिया। हालांकि चकबंदी प्रक्रिया में उनके दावे को खारिज कर पूरी जमीन वन विभाग के नाम कर दी गई।
इसके बाद काश्तकार हाईकोर्ट चले गए और कोर्ट ने इस मामले में फैसला अभी सुरक्षित रखा है। उधर, विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे मुद्दा बना लिया और एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठानी शुरू कर दी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मामला तूल पकड़ता देख अब पीएम ने खुद दखल दी है और जमीन के दूसरे विकल्पों से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तलब की है।
गोरखपुर समेत देश के दूसरी जगहों पर एम्स की स्थापना के संबंध में प्रधानमंत्री ने नौ अप्रैल को बैठक बुलाई है। शासन के निर्देशों के मद्देनजर विकल्प के तौर पर संबंधित जमीन का सर्वे कराकर रिपोर्ट भेज दी गई।
- ओएन सिंह, डीएम
इसलिए विकल्प बन सकती है मिल की जमीन
0 मिल की 237 एकड़ की जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं
0 जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर की ही दूरी
0 पहले से बिजली पॉवर स्टेशन मौजूद, पानी की भी माकूल व्यवस्था
0 12 किलोमीटर के दायरे में गोरखपुर-वाराणसी एनएच 29 को फोरलेन की मिल चुकी है मंजूरी
0 100 किलोमीटर के दायरे में महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, फै जाबाद, मऊ, आजमगढ़, अंबेडकर नगर आदि जिलों के अलावा बिहार बॉर्डर के भी इलाके