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पाठकों को लुभा रहीं कम कीमत की किताबें
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 23 Sep 2016 08:15 PM IST
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कचहरी क्लब पुस्तक मेले में किताबों का अवलोकन करते लोग।
- फोटो : Rajesh Kumar
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कचहरी क्लब में लगा राष्ट्रीय पुस्तक मेला सातवें दिन पूरे रौ में दिखा। पाठकों की भीड़ और मनपसंद किताबों को देख उनकी आंखों में चमक इसकी गवाही दे रही थीं। समय की मांग को देखते हुए प्रकाशकों ने अपनी तरफ से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। उनकी ओर से किताबों में दी जा रही छूट पाठकों को लुभा रही है।
कम कीमत की किताबें परिसर की शुरुआत से ही पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। 1925 में महात्मा गांधी द्वारा स्थापित सस्ता साहित्य मंडल इसकी कमान संभाले हुए हैं। इस स्टाल पर 20 रुपये से लेकर 10 हजार तक की किताबें मौजूद हैं। स्टाल संचालक महेंद्र सिंह विष्ट बताते हैं कि यह ट्रस्ट ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ पर इच्छुक पाठकों तक किताबों को पहुंचाने का बीड़ा उठाए है। सह संचालक मनोज शर्मा ने बताया कि पट्टाभि सीतारमैया की लिखी किताब ‘कांग्रेस का इतिहास’ की काफी डिमांड है। कम कीमत में राजगोपालाचारी का लिखा रामायण व महाभारत, रस्किन बांड की कहानियां, टैगोर की रचनावली, नेहरू बांगमय और बच्चों की कहानी की किताबों में पाठकों की खासी दिलचस्पी हैं।
राजकमल प्रकाशन के स्टाल पर तो 25 साहित्यकारों की प्रतिनिधि कहानियां और प्रतिनिधि कविताएं महज 60 रुपये में उपलब्ध हैं। स्टाल के संचालक सुदेश शर्मा के मुताबिक कीमत कम होने का नतीजा है कि करीब 60 फीसदी किताबेें अब तक बिक चुकी हैं। पद्म बुक कंपनी के स्टाल पर बच्चों के लिए 20 रुपये की हर किताब के डेस्क हर वक्त भीड़ लगी हुई है। स्टाल संचालक संजय कुमार बताते हैं 100 रुपये में आइस्टीन, मार्टिन लूथर किंग, अंबेडकर, विवेकानंद जैसे महापुरुषों की बायोग्राफी और चेतन भगत की ‘द गर्लफ्रैंड’ पर लोगों का बहुत जोर है। वाणी प्रकाशन के राकेश सिन्हा बताते हैं कि उनके स्टाल पर 20 से 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। राजपाल एंड संस के अशोक शुक्ला भी अपनी स्टाल पर 20 से 30 प्रतिशत की छूट देकर पाठकों को लुभा रहे हैं।
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कम कीमत की किताबें परिसर की शुरुआत से ही पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। 1925 में महात्मा गांधी द्वारा स्थापित सस्ता साहित्य मंडल इसकी कमान संभाले हुए हैं। इस स्टाल पर 20 रुपये से लेकर 10 हजार तक की किताबें मौजूद हैं। स्टाल संचालक महेंद्र सिंह विष्ट बताते हैं कि यह ट्रस्ट ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ पर इच्छुक पाठकों तक किताबों को पहुंचाने का बीड़ा उठाए है। सह संचालक मनोज शर्मा ने बताया कि पट्टाभि सीतारमैया की लिखी किताब ‘कांग्रेस का इतिहास’ की काफी डिमांड है। कम कीमत में राजगोपालाचारी का लिखा रामायण व महाभारत, रस्किन बांड की कहानियां, टैगोर की रचनावली, नेहरू बांगमय और बच्चों की कहानी की किताबों में पाठकों की खासी दिलचस्पी हैं।
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राजकमल प्रकाशन के स्टाल पर तो 25 साहित्यकारों की प्रतिनिधि कहानियां और प्रतिनिधि कविताएं महज 60 रुपये में उपलब्ध हैं। स्टाल के संचालक सुदेश शर्मा के मुताबिक कीमत कम होने का नतीजा है कि करीब 60 फीसदी किताबेें अब तक बिक चुकी हैं। पद्म बुक कंपनी के स्टाल पर बच्चों के लिए 20 रुपये की हर किताब के डेस्क हर वक्त भीड़ लगी हुई है। स्टाल संचालक संजय कुमार बताते हैं 100 रुपये में आइस्टीन, मार्टिन लूथर किंग, अंबेडकर, विवेकानंद जैसे महापुरुषों की बायोग्राफी और चेतन भगत की ‘द गर्लफ्रैंड’ पर लोगों का बहुत जोर है। वाणी प्रकाशन के राकेश सिन्हा बताते हैं कि उनके स्टाल पर 20 से 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। राजपाल एंड संस के अशोक शुक्ला भी अपनी स्टाल पर 20 से 30 प्रतिशत की छूट देकर पाठकों को लुभा रहे हैं।
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