निगम का भरोसा छोड़िए, सांड़ से खुद बचाइए जान
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तकरीबन दो साल की कवायद के बाद निगम के फैसले हवा हवाई साबित हुए। आज तक न तो किसी को मुआवजा मिला और न ही पशुबाड़े के लिए जमीन की खरीद हो सकी। ऐसे में जानलेवा साबित हो रहे सांड़ों से निजात के लिए अगर नगर निगम से उम्मीदें पाल रखी हैं तो आपके लिए अच्छी सूचना नहीं है। फिलहाल इन सांड़ों से शहर वालों को खुद ही अपनी सुरक्षा करनी होगी। सांड़ों से हो रही समस्याओं से निजात दिलाने की नगर निगम की दोनों योजनाएं धाराशायी हो गई हैं। मुआवजा देने संबंधी बोर्ड का निर्णय फाइलों में उलझ कर रह गया।
फाइलों में उलझ गई मुआवजा देने की घोषणा
नगर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड ने सांड़ के हमले में हताहतों के परिजनों को मुआवजा देने का निर्णय लिया था, लेकिन नगर निगम नियमावली में ऐसे किसी तरह के मुआवजा का प्रावधान नहीं था। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया, लेकिन मामला वहीं अटक गया।
सांड़ों को लखनऊ भेजने की योजना भी हो गई थी फेल
तत्कालीन नगर आयुक्त ने यहां के सांड़ों को लखनऊ भेजने का निर्णय लिया गया था, लेकिन लखनऊ में ही तकरीबन दो हजार छुट्टा पशु का हवाला देते हुए नगर निगम लखनऊ ने यहां के सांड़ों को लेने से इंकार कर दिया था। इसके साथ ही नगर निगम की यह योजना भी फेल हो गई थी।
नगर निगम कान्हा उपवन को उपलब्ध नहीं करा सका जमीन
लखनऊ में पशुबाड़े को संचालित कर रहे स्वयंसेवी संस्था कान्हा उपवन के संचालक ने गोरखपुर में भी पशुबाड़े को संचालित करने को लेकर हामी भर दी थी, लेकिन नगर निगम द्वारा जमीन उपलब्ध नहीं कराने की वजह से कान्हा उपवन यहां पशुबाड़ा संचालित नहीं कर सका।
फिर से जमीन खरीदने की कोशिश में लगा निगम प्रशासन
गोरखपुर। एक सांड़ द्वारा पैडलेगंज के पास गिरधरगंज के एक युवा व्यवसायी को मार डालने के बाद नगर निगम फिर से पशुबाड़े की तलाश में जुट गया है। मेयर डॉ. सत्या पांडेय, नगर आयुक्त बीएन सिंह ने डीएम से मुलाकात की। नगर आयुक्त ने बताया कि डीएम ने गोरखपुर शहर के आसपास के ब्लाकों में पशुबाड़े की जमीन तलाशने का निर्देश संबंधित ब्लॉक के अधिकारियों को दिया है। यहां चारागाह के अलावा नदी किनारे की 10-12 एकड़ वाली जमीन की तलाश की जा रही है।