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तबियत बिगड़ने पर ट्रेन में ही हुआ इलाज
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 11 Jul 2016 07:17 PM IST
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रेलवे बोर्ड की सुरक्षा हेल्पलाइन यात्रियों के लिए मददगार साबित हो रही है। हेल्पलाइन पर सूचना मिलते ही यात्रियों की सुरक्षा के साथ इलाज की व्यवस्था भी ट्रेन में ही कराई जा रही है। नौ जुलाई को साबरमती एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक यात्री के बेटे का इलाज ट्रेन में ही कराया गया। तबियत ठीक होने पर ही यात्री को रवाना किया गया।
दरभंगा से अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस (19166) में परवेज ठाकुर स्लीपर कोच में अपने बेटे के साथ यात्रा कर रहे थे। बी-2 कोच में 46 व 48 नंबर बर्थ उन्होंने आरक्षित करा रखी थी। मऊ के पहले ही उनके बेटे की तबियत अचानक खराब हो गई। उसे बुखार और दर्द होने लगा। परवेज ने बेटे की हालात खराब देख रेलवे बोर्ड के सुरक्षा हेल्प लाइन नंबर 1149 पर दोपहर करीब 1:25 बजे फोन कर सूचना दी।
हेल्पलाइन नंबर से सूचना तत्काल मंडल सुरक्षा नियंत्रण कक्ष, वाराणसी को भेजी गई और ट्रेन के मऊ स्टेशन पहुंचने पर आरपीएफ पोस्ट के हेड कांस्टेबल अंबिका सिंह यादव ने डॉक्टर को साथ लेकर यात्री से मुलाकात की और उनके बेटे का इलाज कराया। जरूरी दवाओं के बाद थोड़ी ही देर में बेटे की तबियत ठीक हो गई। इसके बाद यात्री की सहमति पर उन्हें गंतव्य स्टेशन के लिए ट्रेन से रवाना कर दिया गया।
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दरभंगा से अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस (19166) में परवेज ठाकुर स्लीपर कोच में अपने बेटे के साथ यात्रा कर रहे थे। बी-2 कोच में 46 व 48 नंबर बर्थ उन्होंने आरक्षित करा रखी थी। मऊ के पहले ही उनके बेटे की तबियत अचानक खराब हो गई। उसे बुखार और दर्द होने लगा। परवेज ने बेटे की हालात खराब देख रेलवे बोर्ड के सुरक्षा हेल्प लाइन नंबर 1149 पर दोपहर करीब 1:25 बजे फोन कर सूचना दी।
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हेल्पलाइन नंबर से सूचना तत्काल मंडल सुरक्षा नियंत्रण कक्ष, वाराणसी को भेजी गई और ट्रेन के मऊ स्टेशन पहुंचने पर आरपीएफ पोस्ट के हेड कांस्टेबल अंबिका सिंह यादव ने डॉक्टर को साथ लेकर यात्री से मुलाकात की और उनके बेटे का इलाज कराया। जरूरी दवाओं के बाद थोड़ी ही देर में बेटे की तबियत ठीक हो गई। इसके बाद यात्री की सहमति पर उन्हें गंतव्य स्टेशन के लिए ट्रेन से रवाना कर दिया गया।
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