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सिंधु जल संधि को नहीं मान रहा पाक

Fri, 02 Dec 2016 01:33 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Fri, 02 Dec 2016 01:33 AM IST
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Pakistan are denying to accept the indus waters treaty
सिंधू जल
नेशनल हाइड्रो पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष एवं एमडी इंजीनियर एमके सिंह ने पाकिस्तान पर सिंधु जल संधि को न मानने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने किशन गंगा और राटले हाइड्रो पॉवर (पनबिजली) प्रोजेक्ट के समझौते की अनदेखी है। पाकिस्तान, कश्मीर में चल रहे विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने को हर हथकंडे अपना रहा है। फिर चाहे वह कूटनीतिक हो या फिर आतंकवाद।
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एमएमएमयूटी के तीसरे स्थापना दिवस समारोह में शिरकत करने आए एमके सिंह ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने विश्व बैंक में हुई शिकायत से प्रोजेक्ट में देरी की आशंका को खारिज किया, लेकिन आतंकवाद के चलते परियोजना में देरी की बात स्वीकारी। कहा कि पाक प्रायोजित आतंक से अशांत घाटी में किशन गंगा और राटले पनबिजली परियोजना पर असर पड़ा है। किशन गंगा पनबिजली परियोजना के तहत डैम बन चुका है।
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उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि के प्रावधानों में तय था कि भारत-पाकिस्तान में से जो भी देश समझौते में तय नदियों पर पहले प्रोजेक्ट बनाएगा उस पर दूसरा निर्माण नहीं कराएगा, लेकिन पाकिस्तान इसकी अनदेखी करते हुए विश्व बैंक में इन परियोजना की संरचना पर सवाल उठाते हुए इसे संधि के खिलाफ बता रहा है। उन्होंने बताया कि घाटी में आतंकवाद के चलते जहां अभी राटले परियोजना का सर्वे कार्य शुरू नहीं हो सका है तो वहीं किशन गंगा पनबिजली परियोजना का काम भी रुका हुआ है।
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किशन गंगा पनबिजली परियोजना को नवंबर-दिसंबर में पूरा होना था, लेकिन नौ जुलाई से आतंकवाद के चलते काम पूरी तरह से ठप है। हालात देखते हुए अभी इसके पूरे होने में करीब आठ से नौ महीने और लगेंगे। बांदीपुरा जहां किशन गंगा प्रोजेक्ट का पॉवर स्टेशन बन रहा है वहां पिछले पांच महीने से आतंकवाद से हालात काफी खराब हैं। इसके पूरा होने के बाद 330 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी।

यूं तूल पकड़ा मामला

उड़ी में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि का मामला भी सुर्खियों में आ गया। देश में व्यापक तौर पर समझौता खत्म करने की मांग उठी। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी पानी और रक्त एक साथ न बहने देने की बात कहकर सख्त रुख का संकेत दे दिया। तबसे गाहे-ब-गाहे यह संधि सुर्खियां बटोर रही है। हाल ही में पाक ने किशन गंगा और राटले पनबिजली परियोजना की संरचना को लेकर विश्व बैंक के समक्ष आपत्तियां जताई थीं। इस पर भारत की ओर से विश्व बैंक से निष्पक्ष विशेषज्ञ की तैनाती की मांग की गई तो पाकिस्तान ने पंचाट के गठन को कहा। नवंबर के पहले पखवारे में विश्व बैंक की ओर से निष्पक्ष विशेषज्ञ की तैनाती के साथ ही पंचाट में सुनवाई का भी फैसला सुना दिया गया। भारत सरकार की ओर से विश्व बैंक द्वारा एक साथ दो समानांतर तंत्रों पर आगे बढ़ने के आदेश को कानूनी रूप से अतार्किक करार दिया गया था। साथ ही फैसले को कानूनी रूप से असमर्थ बताया था।

पाक के रुख पर टिका समझौते का भविष्य

एनएचपीसी के एमडी एवं अध्यक्ष एमके सिंह ने सिंधु जल संधि के भविष्य को पाकिस्तान के रुख पर टिका बताया। उन्होंने कहा कि पीएम पूर्व में आतंकी हमले के बाद समझौते को लेकर सख्त रुख का संकेत दे चुके हैं। भारत सरकार समझौते का सम्मान करती है, लेकिन पाकिस्तान अपनी करतूतों से इसे नष्ट करने पर तुला हुआ है। विश्व बैंक में पाकिस्तान द्वारा की गई शिकायत और उसकी ओर से प्रायोजित आतंकवाद इसी का हिस्सा है।
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