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जानबूझ कर ठप की गई थी ऑक्सीजन की सप्लाई
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 29 Apr 2016 09:04 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में लगा ऑक्सीजन कैप्शूल।
- फोटो : amar ujala
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बुधवार की रात अचानक मेडिकल कॉलेज में ठप हुई लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई की जांच शुरू हो गई। जांच को गठित दो सदस्यीय टीम ने जांच शुरू की तो उनके भी होश उड़ गए। मेडिकल कॉलेज परिसर में लगे टैंक में अभी 60 हजार प्वाइंट ऑक्सीजन है जो कम से कम तीन दिन और चलता। ऐसे में अचानक ऑक्सीजन ठप किए जाने को साजिश माना जा रहा है। फिलहाल जांच जारी है। प्राचार्य का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मेडिकल कॉलेज में लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स ने 25 अप्रैल को टैंक में ऑक्सीजन भरा था। उस समय प्राचार्य को लिखे गए पत्र के जरिए ऑक्सीजन भुगतान के बाद ही फिर से भरे जाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि इसी पत्र में यह भी कहा गया था कि कम से कम चार दिन का ऑक्सीजन स्टोर है। मगर दूसरे ही दिन बुधवार की रात दस बजे अचानक ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई।
यह तो अच्छा था कि ज्यादा रात नहीं हुई थी और आनन फानन सिलिंडर वाले ऑक्सीजन से मरीजों की जान बचा ली। उसी दिन देर रात दो बजे पर्याप्त मात्रा में सिलिंडर भी मंगा लिए गए। इसके बाद प्राचार्य ने इस पर साजिश को देखते हुए डॉ. सतीश और डॉ. शहनवाज की एक कमेटी गठित कर जांच का आदेश दे दिया। टीम ने शुक्रवार को जांच शुरू किया और ऑक्सीजन का मीटर देखा तो उसमें अभी पर्याप्त ऑक्सीजन बचा हुआ है।
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दो सदस्यीय कमेटी मामले की जांच कर रही है। मीटर के हिसाब से ऑक्सीजन बचा हुआ है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स ने 25 अप्रैल को टैंक में ऑक्सीजन भरा था। उस समय प्राचार्य को लिखे गए पत्र के जरिए ऑक्सीजन भुगतान के बाद ही फिर से भरे जाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि इसी पत्र में यह भी कहा गया था कि कम से कम चार दिन का ऑक्सीजन स्टोर है। मगर दूसरे ही दिन बुधवार की रात दस बजे अचानक ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई।
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यह तो अच्छा था कि ज्यादा रात नहीं हुई थी और आनन फानन सिलिंडर वाले ऑक्सीजन से मरीजों की जान बचा ली। उसी दिन देर रात दो बजे पर्याप्त मात्रा में सिलिंडर भी मंगा लिए गए। इसके बाद प्राचार्य ने इस पर साजिश को देखते हुए डॉ. सतीश और डॉ. शहनवाज की एक कमेटी गठित कर जांच का आदेश दे दिया। टीम ने शुक्रवार को जांच शुरू किया और ऑक्सीजन का मीटर देखा तो उसमें अभी पर्याप्त ऑक्सीजन बचा हुआ है।
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दो सदस्यीय कमेटी मामले की जांच कर रही है। मीटर के हिसाब से ऑक्सीजन बचा हुआ है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज