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ऑपरेशन नहीं हुए, हार्ट की ओपीडी भी ठप रही
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2015 07:56 PM IST
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सोमवार को जिला अस्पताल के ऑर्थो और जनरल ओटी में एक भी ऑपरेशन नहीं हुए। डॉक्टर न होने और राज्यपाल के दौरे को लेकर चार सेफ हाउस बनाए जाने के कारण मरीजों की वेटिंग लिस्ट बढ़ गई। वहीं कॉर्डियोलॉजिस्ट न होने से हार्ट की ओपीडी भी ठप रही।
सोमवार को भीड़ ज्यादा होने से तीन पर्ची काउंटर भी कम पड़ गए। घंटों कतार में लगने के बाद लोगों को पर्ची मिल सकी। इस बीच एसआईसी के पहल से हड्डी और जनरल सर्जरी की ओपीडी में आए मरीजों को इलाज मिल पाया।
राज्यपाल के दौरे के लिए बने चार सेफ हाउस में जिला अस्पताल के दो सर्जन और दोनों ऑर्थो सर्जन की ड्यूटी लगाई गई थी।
इसके बाद यह तय माना जा रहा था कि सर्जरी और ऑर्थो की ओपीडी नहीं चल पाएगी। मगर अस्पताल खुलने से पहले ही एसआईसी ने सभी जिम्मेदारों के साथ वार्ता कर नई तैनाती पर आए ऑर्थो सर्जन को सोमवार से ही ड्यूटी शुरू करने को कहा। ओपीडी ठप न होने पाए इसके लिए जिला अस्पताल में बनाए गए सेफ हाउस में तैनात सर्जन और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव से ओपीडी शुरू करने को कहा गया।
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एसआईसी के इन निर्णयों का फायदा मरीजों को मिला। सिर्फ हार्ट की ओपीडी नहीं चल सकी। इन मरीजों को मेडिसिन में भेजकर उपचार करवाने का प्रयास किया गया, जिससे मेडिसिन में भीड़ बढ़ गई और लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
एसआईसी डॉ. एचआर यादव ने बताया कि मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए प्रयास किए गए। ऑर्थो और सर्जरी दोनों ही ओपीडी में मरीजों को उपचार मिल गया। सिर्फ ऑपरेशन डॉक्टर के न होने की वजह से प्रभावित रहा।
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सोमवार को भीड़ ज्यादा होने से तीन पर्ची काउंटर भी कम पड़ गए। घंटों कतार में लगने के बाद लोगों को पर्ची मिल सकी। इस बीच एसआईसी के पहल से हड्डी और जनरल सर्जरी की ओपीडी में आए मरीजों को इलाज मिल पाया।
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राज्यपाल के दौरे के लिए बने चार सेफ हाउस में जिला अस्पताल के दो सर्जन और दोनों ऑर्थो सर्जन की ड्यूटी लगाई गई थी।
इसके बाद यह तय माना जा रहा था कि सर्जरी और ऑर्थो की ओपीडी नहीं चल पाएगी। मगर अस्पताल खुलने से पहले ही एसआईसी ने सभी जिम्मेदारों के साथ वार्ता कर नई तैनाती पर आए ऑर्थो सर्जन को सोमवार से ही ड्यूटी शुरू करने को कहा। ओपीडी ठप न होने पाए इसके लिए जिला अस्पताल में बनाए गए सेफ हाउस में तैनात सर्जन और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव से ओपीडी शुरू करने को कहा गया।
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एसआईसी के इन निर्णयों का फायदा मरीजों को मिला। सिर्फ हार्ट की ओपीडी नहीं चल सकी। इन मरीजों को मेडिसिन में भेजकर उपचार करवाने का प्रयास किया गया, जिससे मेडिसिन में भीड़ बढ़ गई और लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
एसआईसी डॉ. एचआर यादव ने बताया कि मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए प्रयास किए गए। ऑर्थो और सर्जरी दोनों ही ओपीडी में मरीजों को उपचार मिल गया। सिर्फ ऑपरेशन डॉक्टर के न होने की वजह से प्रभावित रहा।