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गणतंत्र दिवस पर होंगे विविध कार्यक्रम

Tue, 26 Jan 2016 01:45 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 26 Jan 2016 01:45 AM IST
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on republic day may programme occur
गणतंत्र दिवस पर मंगलवार को स्कूल, कॉलेज, संस्थाओं, सरकारी दफ्तरों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। क्रॉस कंट्री रेस के साथ इसकी शुरुआत होगी। शहर में लगी सभी महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया जाएगा। चौरीचौरा और सहजनवां शहीद स्थली पर अफसर माल्यार्पण करेंगे। इस दौरान स्कूलों में खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। कमिश्नर दफ्तर और कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह आठ बजे झंडारोहण होगा। पुलिस लाइंस, सरस्वती शिशु मंदिर, बार एसोसिएशन में सुबह 9 बजे, जबकि सीएमओ दफ्तर पर आठ बजे ध्वजारोहण होगा।
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बच्चों की जिद देख फ्लैश बैक में गए अभिभावक
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भीषण ठंड के बावजूद बच्चे गणतंत्र दिवस की तैयारी में जुटे रहे। सोमवार को बच्चे तिरंगा झंडा, बैंड, टोपी और बैज आदि की खरीदारी के लिए अभिभावक के साथ बाजार निकले। बच्चों की जिद पूरी करने में जुटे अभिभावक एक तरफ उन्हें समझाकर सामानों की सूची कम कराने की जद्दोजहद करते दिखे तो वहीं दूसरी तरफ वे खुद के अनुभव को भी साझा करने में लगे रहे। अभिभावकों के कुछ ऐसे ही अनुभव को ‘अमर उजाला’ ने भी समेटा।
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याद आती है वो टोली और रिहर्सल
मैं सेंट्रल स्कूल के पहले बैच का छात्र था। इसलिए वहां मनाए गए पहले गणतंत्र दिवस का साक्षी भी रहा। टैगोर, गांधी, इंदिरा, भगत सिंह जैसी टोलियों में बंटकर हमने खूब रिहर्सल किया। नतीजतन कार्यक्रम भी यादगार बन गया। कम से कम मुझे तो न फिर वैसी कभी तैयारी देखने को मिली और न ही किसी स्कूल में वैसा कार्यक्रम।
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- डॉ. संजय बैजल, प्रोफेसर

भीषण ठंड पर भारी पड़ी जिद
मुझे आज भी याद है नब्बे के दशक की शुरुआत का वह साल, जब भीषण ठंड पड़ी थी और इक्कीस दिन तक सूर्य के दर्शन नहीं हुए थे। उसी बीच पड़ा था गणतंत्र दिवस। माता-पिता किसी भी कीमत पर स्कूल भेजने को तैयार नहीं थे, लेकिन मैं भी जिद पर अड़ी थी कि स्कूल के लड्डू खाकर रहूंगी। आखिरकार मैं स्कूल पहुंच ही गई।
- रुक्मिणी पांडेय, अधिवक्ता

हॉस्टल में झंडा फहराने का उत्साह
उच्च शिक्षा का लंबा समय संत कबीर हॉस्टल में गुजरा। इसलिए उन दिनों वही घर था और वही शिक्षण संस्थान। राष्ट्रीय पर्व के प्रति श्रद्धा बचपन से थी, सो वहां भी इसे लेकर संजीदा रहता था। इसे लेकर मित्रों की अरुचि को रुचि में बदलता और उनमें देश के प्रति समर्पण के भाव जगाता। उसके बाद उन्हें लेकर झंडा फहराने का उत्साह ही अलग था।

- अशोक सिंह, अधिवक्ता

रिहर्सल से जाना इस दिन का महत्व
कक्षा पांच का विद्यार्थी था। कक्षा में टीचर आईं और बोली कौन बेहतर ढंग से राष्ट्रगान गा सकता है। इतना सुनना था कि मैंने हाथ उठा दिया, लेकिन जब सुनाने की बारी आई तो बार-बार गलती होने लगी। टीचर ने दो दिन का वक्त दिया और रिहर्सल करने को कहा। दिन-रात के प्रयास से सफलता मिली और पर्व के महत्व की जानकारी भी।
- संतोष शुक्ला, कंप्यूटर इंजीनियर
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