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श्रद्धा के साथ मनी निर्जला एकादशी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 16 Jun 2016 08:45 PM IST
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निर्जला एकादशी पर अंबेडकर चौक पर राहगीरों को शरबत पिलाते स्वामी देवानंद सोसायटी फॉर डिस्एबल्ड के सदस्य।
- फोटो : mahesh kumar
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जेष्ठ शुक्ल एकादशी बृहस्पतिवार को निर्जला एकादशी के रूप में श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के वातावरण में मनाई गई। भगवान विष्णु के नाम पर श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ उपवास रखा और एकादशी व्रत कथा सुनकर दीर्घायु बनाने की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर दान-पुण्य कर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने की कोशिश की।
एकादशी उपवास रखने के बाद द्वादशी यानी शुक्रवार को श्रद्धालु ब्रह्म बेला में स्नान-ध्यान के बाद ब्राह्मण भोज कराएंगे और ‘ऊं नमो भगवते बासुदेव’ मंत्र का जाप करके गौ-दान, वस्त्रदान, फल और मीठा जल का दान करेंगे। कुछ श्रद्धालु स्वर्णदान की परंपरा का भी निर्वहन करेंगे।
अखिल भारतीय विद्वत सभा के महामंत्री पं. बृजेश पांडेय ने बताया कि जो भी व्यक्ति वर्ष पर्यत्न एकादशी व्रत रहने में असमर्थ हो जाता है, वह निर्जला एकादशी का व्रत रखकर 12 महीने की एकादशी व्रतों का पुण्य प्राप्त कर लेता है। इस व्रत से सभी तीर्थों का पुण्य और सब दानों का फल प्राप्त हो जाता है। पं. ब्रजेश के मुताबिक द्वादशी यानी शुक्रवार को 11.36 बजे इस व्रत का पारण करना श्रेयष्कर है।
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एकादशी उपवास रखने के बाद द्वादशी यानी शुक्रवार को श्रद्धालु ब्रह्म बेला में स्नान-ध्यान के बाद ब्राह्मण भोज कराएंगे और ‘ऊं नमो भगवते बासुदेव’ मंत्र का जाप करके गौ-दान, वस्त्रदान, फल और मीठा जल का दान करेंगे। कुछ श्रद्धालु स्वर्णदान की परंपरा का भी निर्वहन करेंगे।
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अखिल भारतीय विद्वत सभा के महामंत्री पं. बृजेश पांडेय ने बताया कि जो भी व्यक्ति वर्ष पर्यत्न एकादशी व्रत रहने में असमर्थ हो जाता है, वह निर्जला एकादशी का व्रत रखकर 12 महीने की एकादशी व्रतों का पुण्य प्राप्त कर लेता है। इस व्रत से सभी तीर्थों का पुण्य और सब दानों का फल प्राप्त हो जाता है। पं. ब्रजेश के मुताबिक द्वादशी यानी शुक्रवार को 11.36 बजे इस व्रत का पारण करना श्रेयष्कर है।
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