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नौ साल में कूड़ा निस्तारण का हल नहीं ढूंढ सका नगर निगम 

Sat, 06 May 2017 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 06 May 2017 01:30 AM IST
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Nagar nigam failed to solve the matter of darbage collection
शहर के कई इलाकों में ऐसे ही कूड़े फैले रहते हैं। - फोटो : Amar Ujala
जिस सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के न होने से गोरखपुर स्वच्छ सर्वेक्षण में पिछड़ गया, उसके लिए नगर निगम पिछले नौ साल से प्रयास कर रहा है। तकरीबन 20 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के मामले में नगर निगम उसी जगह खड़ा है, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी। नगर निगम अगर इस प्लांट को तैयार करा लेता तो गोरखपुर स्वच्छ सर्वेक्षण में 400 और अंक हासिल कर कुल 1156 अंक के साथ राष्ट्रीय स्तर पर 137वीं और प्रदेश की रैकिंग में दूसरा स्थान हासिल कर लेता। केवल वाराणसी नगर निगम 1515 अंक हासिल कर प्रदेश में पहले स्थान पर रहता।
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सात साल से पेच में फंसा हुआ है निर्माण कार्य  
नगर निगम कार्यकारिणी और नगर निगम बोर्ड ने फरवरी 2008 में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के प्रस्ताव की स्वीकृति दी थी। इसके लिए महेसरा में 28 एकड़ जमीन खरीदी गई। अवस्थापना निधि से भूमि की कीमत का भुगतान किया गया। 2009 में इसके लिए निविदा जारी होने के साथ नवंबर 2009 में ही इसके लिए कार्यादेश जारी कर दिया गया था। अगस्त 2010 में इस प्लांट को बनाने की जिम्मेदारी एपीआर कंपनी को मिली। काम शुरू करने के बाद कंपनी ने निर्माण कार्य में रोड़ा अटकाना शुरू कर दिया। आखिरकार मामला शासन में पहुंचा और कंपनी को ब्लैकलिस्टेड करने के बाद नई कंपनी की तलाश शुरू हुई, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। 
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अब तक डूब चुके हैं करीब 20 करोड़ रुपये  
अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम फॉर स्माल एंड मीडियम टाउंस (यूआईडीएसएसएमटी) के तहत सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। इसे बनाने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को दी गई। शासन स्तर पर निर्णय के बाद सीएंडडीएस ने आंध्र प्रदेश की कंपनी एपीआर को इसे बनाने का ठेका दिया। करोड़ों रुपये लगा देने के बावजूद केंद्र की यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। जमीन खरीदने से लेकर अब तक करीब 19.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। एपीआर कंपनी ने नियम और शर्तों की आड़ में कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस और नगर निगम को अंधेरे में रखते हुए बैंक गारंटी की कुल 4.07 करोड़ रुपये की रकम भी भुगतान करा ली। 
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