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नाथ परंपरा महान, आदित्यनाथ इसके मणि : मोदी

Fri, 22 Jul 2016 08:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Fri, 22 Jul 2016 08:47 PM IST
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Naath tradition is great, Aaditynath is its gem, says Modi
गोरखनाथ मंदिर में महन्त अवेद्यनाथ की मूर्ति का अनावरण करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। साथ में राज्यपाल राम नाईक, महंत आदित्यनाथ। - फोटो : Rajesh Kumar
ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा के अनावरण अवसर पर गोरक्षनाथ मंदिर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नाथ पंथ की परंपरा महान है और आदित्यनाथ इसके मणि हैं। महंत अवेद्यनाथ से अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे उनका संबंध तब से था जब वह राजनीति में नहीं थे। इस पीठ का योगदान आजादी की लड़ाई के साथ ही सामाजिक समरसता के क्षेत्र में भी रहा है। महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम महंत आदित्यनाथ कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ से नाथ संप्रदाय की परंपरा के बारे में बहुत सी जानकारी हमने प्राप्त की। उन्होंने बताया था कि नाथ पंथ के लोग भारत ही नहीं दुनिया के अन्य देशों में भी हैं। कैसे लोग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और किस तरह अवसर पर एकत्रित होते हैं, मैंने इसकी भी जानकारी उनसे ली थी। वह हमारे प्रेरणा स्रोत थे। कहा कि हमारे देश में अनेक संत परंपराएं हैं, पर सबमें एक बात समान है, संत कभी गरीब को भूूखा नहीं देख सकता। उसके पास जो गया, वह भूखा नहीं लौटा। संत झोपड़ी में बैठता है पर भक्त जब उसके पास जाता है तो उससे पूछता है कि प्रसाद लिया कि नहीं, प्रसाद लेकर ही जाना।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि कई संत धार्मिक कार्यों के अलावा स्वच्छता के क्षेत्र में भी लगे हैं। कई संत शौचालय बनवा रहे हैं। कई संत आंख का आपरेशन कराने के लिए कैंप लगवाते हैं। पशु निरोगी हो, उसकी सेवा में बहुत से संत अपना जीवन खपा देते हैँ। देश के लाखों संत भारत को परंपरागत ढंग से आधुनिक बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह यह उनका सौभाग्य है कि महान संत अवेद्यनाथ की प्रतिमा का अनावरण करने का अवसर उन्हें मिला। यह धरती महान है। इससे महावीर, बुद्ध, कबीर का कहीं न कहीं से जुड़ाव रहा है। जिनका संदेश दुनिया में गया है। उनके मानने वाले दुनिया भर में हैं।
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प्रधानमंत्री ने संतों के पांव भी छुए
दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयेजित संत सम्मेलन में संतों के अलावा कई गणमान्य लोग भी पहुंचे थे। प्रधानमंत्री जब संतों को संबोधित करने मंच पर पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने संतों के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। संतों ने उन्हें अंगवस्त्र और शाल देकर सम्मानित किया।


‘राष्ट्र संत अवेद्यनाथ’ का विमोचन
संत सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ पर लिखी पुस्तक ‘राष्ट्र संत अवेद्यनाथ’ का विमोचन भी किया। इस पुस्तक के अलग-अलग अध्याय को अलग-अलग लोगों ने लिखा है। पुस्तक में उनके बचपन से लेकर समाधि तक का जिक्र किया गया है। पुस्तक का संपादन सदानंद गुप्त एवं प्रदीप राव ने किया है। मोदी ने सदानंद गुप्त को अंगवस्त्र देकर सम्मानित भी किया।
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