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एमआरआई को देने होंगे 2500 रुपये
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 25 Jun 2016 08:43 PM IST
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मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में एमआरआई के लिए 2500 रुपये देने होंगे। शासन ने कॉलेज प्रशासन के प्रस्ताव पर पर सहमति देते हुए शुल्क निर्धारित कर दिया है। बीपीएल कार्ड धारक और गरीबों को यह सुविधा मुफ्त मिलेगी।
लंबे समय से मेडिकल कॉलेज में एमआरआई न होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा था। छह महीने पहले मशीन आने के बाद भी इसकी शुरुआत नहीं हो पाई थी। बीते दिनों उद्घाटन के बाद जांच तो शुरू कर दी गई मगर शुल्क निर्धारित न होने से जांच मुफ्त में किया जा रहा था, जिसके चलते कॉलेज प्रशासन का नुकसान हो रहा था। अब शासन ने शुल्क का निर्धारण कर दिया है। प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर में एमआरआई के लिए पांच हजार से दस हजार रुपये तक शुल्क देना होता है।
मरीजों को कम दर में जांच उपलब्ध हो सके, इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पीपीपी मॉडल पर परिसर में इंद्रा डायग्नोस्टिक सेंटर खोला गया था, मगर वहां पर भी यह जांच महंगी थी। बड़ी बात यह कि एक साल से मशीन खराब होने पर यह जांच पूरी तरह से ठप हो गई थी। मजबूरन जांच के लिए मरीज को प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर में जाना पड़ रहा था। मगर अब मेडिकल कॉलेज में ही कम खर्च में एमआरआई जांच शुरू होने पर मरीजों को राहत मिल गई है। बीपीएल और निर्धन लोगों को यह सुविधा मुफ्त होगी मगर उसके लिए प्राचार्य की अनुमति लेनी जरूरी होगी।
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लंबे समय से मेडिकल कॉलेज में एमआरआई न होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा था। छह महीने पहले मशीन आने के बाद भी इसकी शुरुआत नहीं हो पाई थी। बीते दिनों उद्घाटन के बाद जांच तो शुरू कर दी गई मगर शुल्क निर्धारित न होने से जांच मुफ्त में किया जा रहा था, जिसके चलते कॉलेज प्रशासन का नुकसान हो रहा था। अब शासन ने शुल्क का निर्धारण कर दिया है। प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर में एमआरआई के लिए पांच हजार से दस हजार रुपये तक शुल्क देना होता है।
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मरीजों को कम दर में जांच उपलब्ध हो सके, इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पीपीपी मॉडल पर परिसर में इंद्रा डायग्नोस्टिक सेंटर खोला गया था, मगर वहां पर भी यह जांच महंगी थी। बड़ी बात यह कि एक साल से मशीन खराब होने पर यह जांच पूरी तरह से ठप हो गई थी। मजबूरन जांच के लिए मरीज को प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर में जाना पड़ रहा था। मगर अब मेडिकल कॉलेज में ही कम खर्च में एमआरआई जांच शुरू होने पर मरीजों को राहत मिल गई है। बीपीएल और निर्धन लोगों को यह सुविधा मुफ्त होगी मगर उसके लिए प्राचार्य की अनुमति लेनी जरूरी होगी।
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