फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   mixture on food

कसता रहा शिकंजा, बढ़ती रही मिलावटखोरी

Sat, 19 Mar 2016 02:06 AM IST
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर।
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sat, 19 Mar 2016 02:06 AM IST
विज्ञापन
mixture on food
खाद्य सामग्री की जांच के लिए नमूने लेते अधिकारी। - फोटो : shivharsh
जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए मिलावट पर लगाम लगाना चुनौती साबित होता जा रहा है। साल दर साल महकमे ने मिलावटखोरों पर जैसे-जैसे शिकंजा तेज किया, मिलावटखोर भी सिर उठाते चले गए। तीन साल के आंकड़े इसके गवाह है। हर साल अधिक नमूने, अधिक जांच रिपोर्ट मगर फेल होने वाले नमूनों की संख्या कम होने के बजाए बढ़ती ही गई।
विज्ञापन


जानकार इसक ी वजह नए खाद्य सुरक्षा कानून का लचीला होना मान रहे हैं। उनका कहना है कि सीधी कार्रवाई के बजाए पहले नमूने लेने और हिदायत की बाध्यता, मिलावटखोरों के हौसले में इजाफा कर रही है। अफसरों, कर्मचारियों की संख्या के साथ ही अन्य संसाधनों का अभाव भी इसकी बड़ी वजह है।
विज्ञापन


जिले की करीब 44 लाख की आबादी के सेहत की जिम्मेदारी महज छह खाद्य सुरक्षा अधिकारियों पर है। यही हाल प्रयोगशालाओं का भी है। जब तक वहां से जांच रिपोर्ट आती है, संबंधित खाद्य सामग्री की खेप ही बिक जाती है। यूं तो नियम के मुताबिक 15 दिन के भीतर नमूनों की जांच रिपोर्ट आ जानी चाहिए मगर आती तीन से चार महीने बाद है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


महकमे के मुताबिक तीन सालों में इस साल सबसे ज्यादा नमूने तो लिए ही गए। कार्रवाई भी ज्यादा हुई। अप्रैल 2015 से अभी तक कुल 431 नमूने लिए गए। 328 की जांच रिपोर्ट मिल चुकी है, जिनमें से 137 नमूने फेल हो गए हैं। इनमें से सर्वाधिक 90 नमूने दूध और उनसे बने उत्पादों के हैं। इसके अलावा घी, नमक, मसाला, तेल, आईस्क्रीम समेत तकरीबन सभी खाद्य पदार्थ जांच में फेल हुए हैं। आठ नमूने तो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पाए गए। इनमें दूध, मिठाई (चांदी की जगह एल्यूमीनियम का वर्क), मसाला और बेकरी उत्पाद शामिल हैं। इन आठों मामलों में एसीजीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

साल                नमूने लिए        जांच रिपोर्ट मिली    फेल हुए नमूने    वाद हुए    जुर्माना 
2015-16            431                328                        137            142        474878
2014-15            318                180                        77                75        379000
2013-14            199                233                        64                45        238000                                


पिछले सालों की तुलना में इस बार सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। नमूने तो अधिक लिए ही गए, रिपोर्ट भी अधिक आई और मुकदमे भी सबसे ज्यादा हुए। महकमा ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक पूरे साल कार्रवाई करता है। लोगों को भी थोड़ा जागरूक होना पड़ेगा। पैकेजिंग पर ध्यान देना होगा और दुकानदार से इसपर आपत्ति भी दर्ज करानी होगी। किसी को भी अगर कहीं पर मिलावटखोरी की सूचना मिले तो वह विभाग को सूचित कर सकता है, तत्काल एक्शन लिया जाएगा।
- अनिल कुमार राय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed