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अवसाद रोधी दवा सिटालोप्राम अधोमानक निकली

Mon, 02 Dec 2019 01:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2019 01:09 AM IST
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medicine below standard
जिले में अवसाद रोधी दवा सिटालोप्राम अधोमानक निकली
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ऐहतेशाम उद्दीन अहमद
गोरखपुर। अवसाद के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा सिटालोप्राम लैब जांच में फेल हो गई। दवा की 5000 गोलियाें की आपूर्ति की गई थी, अधोमानक पाए जाने पर इनका वितरण पूरी तरह रोक दिया गया है। दवा के अधोमानक होने की पुष्टि के लिए दो और नमूने भेजे गए हैं। पुष्टि की रिपोर्ट आने के बाद यह दवा उप्र मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन (यूपीएमएससी) को लौटा दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन की ओर से मानसिक रोग में इस्तेमाल होने वाली सिटालोप्राम टेबलेट की 5000 गोलियां आपूर्ति की गई थीं। यह गोलियां जिला अस्पताल में मानसिक रोग विभाग के चिकित्सकों के परामर्श पर मरीजों को दी जानी थीं।
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एलियांस बायोटेक कंपनी की इस दवा की 150-150 गोलियाें के तीन नमूने अक्तूबर माह में यूपीएमएससी के जरिए जांच कराने भेजे गए थे। इसी सप्ताह मिली रिपोर्ट में सिटालोप्राम दवा अधोमानक पाई गई। रिपोर्ट आने के बाद इस दवा के वितरण को पूर्णतया रोक दिया गया है। इस संबंध में कंपनी का पक्ष नहीं मिल पाया है। जब भी पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
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लैब टेस्ट में अधोमानक पाई जाने वाली दवाओं का वितरण पूर्णतया रोक दिया जाता है। जिला अस्पताल के लिए सिटालोप्राम की 5000 गोलियां आपूर्ति की गई थीं, जांच में इन्हें अधोमानक पाया गया, इनका वितरण नहीं किया जाएगा। - डॉ. राजकुमार गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल गोरखपुर
छह दवाएं मानक के अनुरूप पाई गईं
जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिटालोप्राम के साथ ही छह अन्य दवाओं के नमूने भी जांच केे लिए भेजे गए थे। सभी दवाएं जांच में मानक के अनुरूप पाई गई हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटी एलर्जी दवा क्लोरफेनिरअमीन (सीपीएम), पेट की समस्या में इस्तेमाल होने वाली दवा डायक्लोमिन, एंटी बायोटिक सिप्रोफ्लॉक्सासिन, हृदयरोग के इलाज में इस्तेमाल होने वाली डाइजॉक्सिन, एंटीबायोटिक लीवोफ्लॉक्सासिन और जेई-एईएस के रोगियों में झटके आदि रोकने में इस्तेमाल होने वाली फेनिटोइन सोडियम दवा जांच के लिए भेजी गई थी। जांच में ये भी मानक के अनुरूप पाई गईं। पास होने के बाद अब यह दवाएं जिले में मरीजों को बांटी जाएंगी।
क्या है जांच की प्रक्रिया
जिले में दवाओं की मांग पर यूपीएमएससी में पंजीकृत वेंडर कंपनियाें की ओर से दवा की आपूर्ति की जाती है। दवा गुणवत्तापूर्ण है या नहीं, इसकी जांच के लिए प्रदेश में 11 सरकारी लैब हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग वेंडर की ओर से आपूर्ति की गई दवा के नमूने जांच के लिए यूपीएमएससी को भेजता है। प्रत्येक दवा के तीन नमूने भेजे जाते हैं, इनकी जांच अलग-अलग लैब में होती है।

एक भी नमूना अधोमानक पाए जाने पर दवा का वितरण पूर्णतया रोक दिया जाता है। अधोमानक दवाएं यूपीएमएससी को लौटा दी जाती हैं। यदि एक ही बैच की दवा तीन से दो या उससे अधिक जिलोें से भेजे गए नमूनों में अधोमानक पाई जाती हैं तो उस दवा के सारे बैच वापस मंगा लिए जाते हैं। यूपीएमएससी कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकती है।
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