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गलती मेडिकल कॉलेज की, भुगत रहा परिवार
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 28 May 2016 07:18 PM IST
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मेडिकल कॉलेज
एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) मरीज के कोडिंग में बरती जा रही लापरवाही तीमारदारों की मुसीबत बढ़ा दे रही है। बीमारी से जान गंवाने वाले मासूमों के घर वाले मुआवजे के लिए सीएमओ दफ्तर और मेडिकल कॉलेज का चक्कर काट रहे हैं। ऐसे ही एक पीड़ित परिवार ने सीएमओ से गुहार लगाई है।
मुआवजे की पड़ताल में पता चला कि मेडिकल कॉलेज से दिए गए सर्टिफिकेट में एईएस कोड अंकित ही नहीं है। सीएमओ ने कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखा है, जिसके बाद एसआईसी ने मेडिसिन और बाल रोग विभाग को लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है।
पिपराइच थाना क्षेत्र के बिचौआपुर निवासी रामपत की ढाई वर्षीय बेटी खुशबू एईएस की चपेट में आ गई थी। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान 23 अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद घर वालों को डेथ सर्टिफिकेट भी दे दिया गया, मगर जब उसने मुआवजे के लिए आवेदन किया तो मुआवजा नहीं मिला।
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सीएमओ से मुलाकात की तो उन्होंने कारण जानने के लिए मातहतों को बुलाया तो मेडिकल कॉलेज की कमी सामने आ गई। इसके बाद सीएमओ ने कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखा है। इससे हरकत में आए कॉलेज प्रशासन ने भी सख्ती कर दी है।
विभागाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में एसआईसी ने लिखा है कि आरटीआई और अन्य कई मामलों में ऐसी शिकायतें आ रही हैं। इसलिए इसमें अनियमितता न बरती जाए और कोड जरूर अंकित जाए। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि मेडिसिन विभाग को इस संबंध में पत्र लिख दिया गया है।
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मुआवजे की पड़ताल में पता चला कि मेडिकल कॉलेज से दिए गए सर्टिफिकेट में एईएस कोड अंकित ही नहीं है। सीएमओ ने कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखा है, जिसके बाद एसआईसी ने मेडिसिन और बाल रोग विभाग को लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है।
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पिपराइच थाना क्षेत्र के बिचौआपुर निवासी रामपत की ढाई वर्षीय बेटी खुशबू एईएस की चपेट में आ गई थी। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान 23 अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद घर वालों को डेथ सर्टिफिकेट भी दे दिया गया, मगर जब उसने मुआवजे के लिए आवेदन किया तो मुआवजा नहीं मिला।
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सीएमओ से मुलाकात की तो उन्होंने कारण जानने के लिए मातहतों को बुलाया तो मेडिकल कॉलेज की कमी सामने आ गई। इसके बाद सीएमओ ने कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखा है। इससे हरकत में आए कॉलेज प्रशासन ने भी सख्ती कर दी है।
विभागाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में एसआईसी ने लिखा है कि आरटीआई और अन्य कई मामलों में ऐसी शिकायतें आ रही हैं। इसलिए इसमें अनियमितता न बरती जाए और कोड जरूर अंकित जाए। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि मेडिसिन विभाग को इस संबंध में पत्र लिख दिया गया है।