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नौकरी और मदद मिली तो हौसला बढ़ा: शहीद की पत्नी विजयलक्ष्मी
Fri, 15 Mar 2019 12:13 AM IST
vivek shukla
गंगेश्वर त्रिपाठी पडरौना (देवरिया)
गंगेश्वर त्रिपाठी पडरौना (देवरिया)
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 15 Mar 2019 12:13 AM IST
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विजयलक्ष्मी
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शहीद विजय मौर्य की पत्नी विजय लक्ष्मी मौर्य का कहना है कि पुलवामा के आतंकी हमले में उनकी तो दुनिया उजड़ गई थी, लेकिन सरकार और लोगों की मदद मिली तो खुद और परिवार को संभालने का रास्ता मिल गया।
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डेढ़ साल की बेटी आराध्या के साथ सेंट जेवियर्स स्कूल के कार्यक्रम में शामिल होने आईं विजयलक्ष्मी बातचीत करते-करते भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि सेना के शौर्य और पति की शहादत पर उन्हें गर्व है। पति की कमी तो जिंदगी भर खलेगी, लेकिन उनके सपने को पूरा करने में मैं कोई कसर नहीं छोड़ूंगी।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान देवरिया के छपिया जगदीश गांव निवासी विजयलक्ष्मी की आंखों में आतंकी हमले के प्रति गुस्सा साफ दिख रहा था। उन्होंने बताया कि पति विजय मौर्य ने दस दिन की छुट्टी बिताकर जाते समय जल्द घर आने का वादा किया था, लेकिन 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में वह शहीद हो गए।
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एक पल में ही उनके सारे सपने चकनाचूर हो गए। उनकी शहादत की खबर सुनकर सहसा विश्वास ही नहीं हो रहा था। डेढ़ साल की बेटी आराध्या को तो इस बात का पता ही नहीं है कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। सरकार ने उन्हें देवरिया कलेक्ट्रेट में कनिष्ठ लिपिक के पद पर नौकरी दी है।
लोगों ने भी उनके टूटे हौसलों को सहारा दिया है। 2014 में विजय से शादी करने वाली विजयलक्ष्मी बेटी को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाना चाहती हैं ताकि वह भी अपने पिता की तरह देश की सेवा कर सकें।